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Wednesday, June 24, 2026

जींद को सिर्फ एनसीआर का टैग नहीं, विकास का अधिकार भी मिले: अग्रवाल समाज

एनसीआर में रखा है तो सुविधाएं भी दो: डॉ. राजकुमार गोयल, 12 साल बाद भी जींद को नहीं मिला अपेक्षित लाभ

जींद को सिर्फ एनसीआर का टैग नहीं, विकास का अधिकार भी मिले: अग्रवाल समाज
जींद : अखिल भारतीय अग्रवाल समाज हरियाणा के अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी डॉ. राजकुमार गोयल ने कहा है कि यदि जींद को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बनाए रखना है तो जिले को भी एनसीआर के अनुरूप सुविधाएं और विकास कार्य उपलब्ध कराए जाने चाहिए। केवल कागजों में एनसीआर का दर्जा देने से जनता को कोई लाभ नहीं मिलेगा। जींद में भी मेट्रो जैसी आधुनिक परिवहन व्यवस्था, बड़े औद्योगिक क्षेत्र, बेहतर सड़क नेटवर्क, आधुनिक स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाएं तथा निवेश को बढ़ावा देने वाली योजनाएं लागू की जानी चाहिए।
डॉ. गोयल अन्य पदाधिकारियों के साथ हाल ही में हुई एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णय पर चर्चा कर रहे थे। इस बैठक में हरियाणा के सभी 14 जिलों, जिनमें जींद भी शामिल है, को एनसीआर में यथावत रखने का फैसला लिया गया है।
उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2014 में जींद को एनसीआर में शामिल किया गया था, तब लोगों को उम्मीद थी कि जिले में बड़े उद्योग स्थापित होंगे, आधुनिक परिवहन सुविधाएं विकसित होंगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आधारभूत ढांचे में तेजी से सुधार होगा। लेकिन 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी जींद को एनसीआर में शामिल होने का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है।
डॉ. गोयल ने कहा कि यदि जींद वास्तव में एनसीआर का हिस्सा है तो उसका विकास भी दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद और अन्य विकसित एनसीआर क्षेत्रों की तर्ज पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि जिले के लिए विशेष विकास पैकेज तैयार किया जाए और उन योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए जो रोजगार, निवेश और आधारभूत ढांचे को मजबूत कर सकें।
एनसीआर के नाम पर नियम मिले, सुविधाएं नहीं
डॉ. गोयल ने कहा कि एनसीआर में शामिल होने के बाद जिले के लोगों को कई प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। विशेष रूप से 10 और 15 वर्ष पुराने वाहनों से जुड़े नियमों के कारण हजारों वाहन मालिक प्रभावित हुए हैं। इससे आम नागरिकों के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, लेकिन इसके बदले जिले को एनसीआर स्तर की सुविधाएं नहीं मिल सकीं।
जींद को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत

इस अवसर पर सावर गर्ग ने कहा कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड द्वारा जींद को एनसीआर में बनाए रखने का निर्णय लिया गया है, इसलिए यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जिले को केवल नियमों और प्रतिबंधों तक सीमित न रखा जाए। यहां आधुनिक परिवहन व्यवस्था, औद्योगिक विकास, बेहतर सड़कें, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और उच्चस्तरीय शिक्षा संस्थान स्थापित किए जाने चाहिए।
रामधन जैन ने कहा कि यदि जींद एनसीआर का हिस्सा है तो उसका विकास भी अन्य विकसित एनसीआर शहरों की तरह नजर आना चाहिए। केवल एनसीआर का दर्जा देने से जनता को कोई लाभ नहीं होगा, जब तक कि उन्हें वास्तविक विकास और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध न कराई जाएं।
सरकार उठाए ठोस कदम: पवन बंसल

पवन बंसल ने कहा कि जिले के व्यापारी, उद्योगपति और आम नागरिक लंबे समय से एनसीआर के लाभों का इंतजार कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि प्रदेश और केंद्र सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएं और जींद को विकास की मुख्यधारा से जोड़ें। उन्होंने मांग की कि जिले के लिए विशेष विकास योजनाएं तैयार की जाएं ताकि एनसीआर में शामिल होने का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंच सके।
वहीं मनीष गर्ग ने कहा कि यदि जींद को एनसीआर में रखना है तो उसे एनसीआर जैसी सुविधाएं और विकास भी देना होगा। तभी इस निर्णय का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सकेगा और जिले की जनता को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल पाएगा।
इस दौरान सावर गर्ग, रामधन जैन, पवन बंसल, सोनू जैन, जयभगवान सिंगला और मनीष गर्ग सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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