June 06, 2026
लाखों श्रद्धालुओं को हल्के में लेने का मामला गूंजायेगे लोकसभा में : सतपाल ब्रह्मचारी
8 दिन बाद सोमवती अमावस्या, डूबकी लगाने को तीर्थ में नहीं पानी
सोनीपत सांसद ने शासन-प्रशासन के रूख पर जताई बड़ी नाराजगी
लाखों श्रद्धालुओं को हल्के में लेने का मामला गूंजायेगे लोकसभा में : सतपाल ब्रह्मचारी
भाजपा के झूठे आडंबर को लेकर देश भर में दिखायेंगे आईना
जींद : ( संजय कुमार ) अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए जिस सोमवती अमावस्या के इंतजार में पांडवों ने 12 वर्षों तक इंतजार किया था उसके महत्व को सिस्टम संभालने वाले हल्के में ले रहे है। यही कारण है कि 15 जून को आ रही सोमवती अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं के सामने तीर्थ के पानी में डूबकी लगाने की बड़ी समस्या खड़ी होती हुई दिखाई दे रही है। क्योंकि कच्छुआ गति से चल रहे जीर्णोधार के कारण तीर्थ के तालाब में महज एक-एक फूट पानी ही रह गया है। यह पानी भी बुरी तरह से सड़ चुका है। सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं के सामने पानी की समस्या का समाधान न होने पर सोनीपत-जींद सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने शासन-प्रशासन से बड़ी नाराजगी जाहिर की है। सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि तीर्थ पांडू पिंडारा में पानी व्यवस्था के लिए वे अधिकारियों को कई बार बोल चुके है। मगर इस सरकार में व्यवस्था ऐसी है कि सभी को सांप सूंघा हुआ है। सरकार गूंगी, बहरी और अंधी हो चुकी है। ना आम की सुनवाई है ना खास की। सरकार के जो विधायक और मंत्री है वे जनता के हितो से मूंह मोड़ चुके है। सोमवती अमावस्या पर देश भर से 5 लाख से अधिक श्रद्धालु तीर्थ पांडू पिंडारा पर पहुंचकर अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना करते है। मगर 15 जून को आ रही सोमवती अमावस्या पर शासन-प्रशासन की और से अभी तक व्यवस्था बेहद निराशा जनक है। इस मसले को वे देश की सबसे बड़ी पंचायत में गूंंजाकर भाजपा सरकार की पोल खोलने का काम करेंगे। भाजपा सरकार लोगों की धार्मिक भावनाओं, लोगों की श्रद्धा को कितने हल्के में ले रही है यह बात लोकसभा में जग जाहिर करेंगे। अगर सोमवती अमावस्या पर समय रहते पानी की व्यवस्था नहीं हुई तो इसके लिए सिस्टम संभालने वालो को जिम्मेदार ठहराते हुए उस दिन खास निर्णय लिया जायेगा। सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि जिस विभाग को और जिस ठेकेदार को तीर्थ पांडू पिंडारा के जीर्णोधार का जिम्मा दिया हुआ है वे लोग, लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को कम आंक रहे है।
अधिकारी कहते है कि पानी की पाईपो के जरिए नहाने की व्यवस्था कर दी जायेगी। मगर अधिकारी इस बात को भुल गये है कि 200-400 लोगों के लिए तो ऐसी व्यवस्था हो सकती है मगर लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह औपचारिकता बड़ी परेशानी देने वाली साबित होगी। ऐसे में सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भावनाओं से खिलवाड़ हुआ तो निश्चित तौर पर देश की राजधानी में गूंजने का काम करेंगे।
*पांडवों ने परिजनों की आत्मा की शांति के लिए किया था पिंडदान*
तीर्थ पांडु पिंडारा के लिए किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की थी। सोमवती अमावस्या के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है।