July 19, 2026
डहीना गांव के गौरव पट्ट पर अंकित होंगे 3 और 'गुमनाम' स्वतंत्रता सेनानियों के नाम, ऐतिहासिक दस्तावेजों से जुटाए अकाट्य प्रमाण
डहीना गांव के गौरव पट्ट पर अंकित होंगे 3 और 'गुमनाम' स्वतंत्रता सेनानियों के नाम, ऐतिहासिक दस्तावेजों से जुटाए अकाट्य प्रमाण
रेवाड़ी/डहीना : देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों को उनका वास्तविक हक और पहचान दिलाने के लिए हरियाणा में एक अनूठी और सराहनीय मुहिम चलाई जा रही है। स्वतंत्रता सेनानी राम सिंह के सुपुत्र श्री भगवान फोगाट और अमर शहीद स्वतंत्रता सेनानी नेतराम लोहचब के वंशज शोधकर्ता ने आधिकारिक ऐतिहासिक दस्तावेजों को खंगालकर गांव डहीना के 3 और ऐसे 'गुमनाम' नायकों (Unsung Heroes) के नाम खोज निकाले हैं, जिन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज (I.N.A.) में शामिल होकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान और संघर्ष किया था। इस मुहिम के दौरान दिनेश खोला ने डहीना गांव के गौरव पट्ट की फोटो भेजकर शोधकर्ताओं की बड़ी मदद की और वे भी इस राष्ट्रभक्ति की मुहिम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बने हैं।अब इन तीनों वीरों के नामों को भी डहीना गांव के आधिकारिक 'गौरव पट्ट' पर 'आजादी के दीवाने' के रूप में ससम्मान अंकित करवाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।आधिकारिक रिकॉर्ड (Who's Who) से प्रमाणित हुए डहीना के ये 3 नए नायक:शहीद हवलदार भगवान सिंह (Intelligence Group, I.N.A.): ब्रिटिश सेना की 32nd I.B.T. कंपनी को छोड़कर देश सेवा के लिए आजाद हिंद फौज में शामिल हुए। उन्होंने आई.एन.ए. के 'इंटेलिजेंट ग्रुप' में हवलदार के रूप में सेवाएं दीं और मोर्चे पर लड़ते हुए देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी (Killed in Action)।
हवलदार मंगल सिंह (पुत्र: श्री जाधा राम - 3rd Guerrilla Regt., I.N.A.): पहले ब्रिटिश सेना की 4/19 Hyd. रेजिमेंट का हिस्सा थे। बाद में नेताजी के आह्वान पर देश की आजादी के लिए आजाद हिंद फौज की तीसरी गुरिल्ला रेजिमेंट में हवलदार बने और युद्ध के दौरान लापता (Missing) घोषित किए गए।नायक रामजी लाल (4/19 Hyd. Regt. / I.N.A.): ये भी डहीना गांव के रहने वाले थे, जिन्होंने ब्रिटिश सेना की 4/19 Hyd. रेजिमेंट के बजाय देश की अपनी सेना (I.N.A.) को चुना और आजाद हिंद फौज में 'नायक' (NK.) के पद पर रहकर अंग्रेजों के खिलाफ लोहा लिया।
"गौरव पट्ट का अनादर, गांव का अनादर"डहीना गांव के गौरव पट्ट पर पहले से ही श्री देव कर्ण सिंह, श्री जगजीत सिंह और श्री बनवारी लाल जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के नाम अंकित हैं, जिसके नीचे लिखा है कि "इस गौरव पट्ट का अनादर गांव का अनादर है।"शोधकर्ताओं का कहना है कि सरकार की मुहीम के तहत हर गांव में गौरव पट्ट तो बनाए गए हैं, लेकिन कई वीरों के नाम आज भी सरकारी दफ्तरों और पुरानी किताबों के रिकॉर्ड में ही दबे रह गए। श्री भगवान फोगाट और साथी शोधकर्ता ने 'पंजाब Freedom Fighters' और 'हुज हू ऑफ इंडियन मार्टर्स' जैसी प्रामाणिक और ऐतिहासिक धरोहर पुस्तकों से ये अकाट्य सबूत जुटाए हैं। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य हर गांव के गौरव पट्ट पर उन सभी वीरों के नाम लिखवाना है जिन्हें इतिहास ने भुला दिया था