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Tuesday, June 28, 2022

June 28, 2022

राकेश टिकैत ने युवक की आत्महत्या को अग्निपथ योजना से जोड़ा, यूजर्स बोले- अब आप ही हमारे तारनतार...

राकेश टिकैत ने युवक की आत्महत्या को अग्निपथ योजना से जोड़ा, यूजर्स बोले- अब आप ही हमारे तारनतार...

नई दिल्ली : भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना (Agneepath Scheme) पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने फतेहपुर (Fatehpur) में एक युवक की आत्महत्या (Suicide) को अग्निपथ योजना से जोड़ दिया है। राकेश टिकैत ने इस आत्महत्या के पीछे की वजह को मोदी सरकार (Modi Government) की संवादहीनता को जिम्मेदार ठहराया है। खास बात है कि फतेहपुर पुलिस (Fatehpur Police) ने भी राकेश टिकैत की ट्वीट पर रिप्लाई किया है और स्थिति स्पष्ट की है कि इस आत्महत्या का तालुक्क अग्निपथ योजना से नहीं है। यही नहीं, यूजर्स भी लगातार रिप्लाई कर राकेश टिकैत पर निशाना साध रहे हैं।  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने अपने ट्वीट में लिखा, 'सरकार की योजनाओं को लागू करने से पहले संवादहीनता की वजह से किसान आंदोलन में 750 किसानों ने अपनी जान गवाई और अब अग्निपथ योजना का संवाद ना होने की वजह से पहले रोहतक में सचिन और अब फतेहपुर में विकास ने अपनी जान दे दी। ये बेहद दुःखद खबर है।' पुलिस ने किया रिप्लाई फतेहपुर पुलिस ने इस घटना के बाद पक्ष सामने रखा था। इसके बावजूद राकेश टिकैत ने इस आत्महत्या को सीधे अग्निपथ योजना से जोड़ दिया। राकेश टिकैत का ट्वीट वायरल हुआ तो फतेहपुर पुलिस ने रिप्लाई करते हुए दोबार से स्पष्ट किया गया कि इस युवक की आत्महत्या का अग्निपथ योजना से कोई संबंध नहीं है। फतेहपुर पुलिस ने थाना कल्यानपुर क्षेत्रान्तर्गत ग्राम हरदौलपुर में घटित घटना के सम्बंध में क्षेत्राधिकारी बिंदकी द्वारा दी गई बाइट को भी शेयर किया है। थाना कल्यानपुर क्षेत्रान्तर्गत ग्राम हरदौलपुर में घटित घटना के सम्बंध में क्षेत्राधिकारी बिंदकी द्वारा दी गयी बाइट।#UPPolice pic.twitter.com/vktRMR0y1o — FATEHPUR POLICE (@fatehpurpolice) June 25, 2022 यूजर्स भी भड़के ट्विटर यूजर्स को जब इस आत्महत्या की सच्चाई पता चली तो उन्होंने राकेश टिकैत पर निशाने साधने शुरू कर दिए। आलोक नामक यूजर ने लिखा, 'किसानों को उनके घर वालों ने जिन्दा भेजा था, आपके बुलावे पे। उनकी मौत के जिम्मेदार आप है। अब उनके घर के भरण पोषण की जिम्मेदारी आपकी है। भागिये मत जवाबदेही से। नेतागीरी सिर्फ उकसाने का नाम नही, जवाबदेही भी होनी चाहिये।' गौरव सिंह ने लिखा, 'अब तो आप ही हम सबका तारनहार बन सकते हो।' सरकार पर भी साधा निशाना बता दें कि ज्यादातर यूजर्स ऐसे भी हैं, जो सरकार पर भी प्रहार कर रहे हैं। इन यूजर्स का कहना है कि चाहे अग्निपथ योजना को लेकर आत्महत्या नहीं की, लेकिन आत्महत्या के पीछे की वजह तो नौकरी न मिलना ही था। राकेश धानीवाला ने लिखा, 'समय बदला है, सरकारें बदली हैं, नियम भी बदले हैं, तो लोगों को भी बदलने की जरूरत है ! आत्म हत्या किसी भी समस्या का अंतिम समाधान नहीं है। युवाओं को समझना होगा!!' इसी प्रकार अन्य यूजर्स ने भी लिखा कि युवाओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी बेरोजगारी होती है। सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए।
June 28, 2022

थाने में गूंजी किलकारी : गर्भवती को ट्रेन में हुई प्रसव पीड़ा, पुलिस कर्मचारियों ने RPF थाने में करवाई नॉर्मल डिलीवरी

थाने में गूंजी किलकारी : गर्भवती को ट्रेन में हुई प्रसव पीड़ा, पुलिस कर्मचारियों ने RPF थाने में करवाई नॉर्मल डिलीवरी

सोनीपत : पश्चिम एक्सप्रेस ट्रेन से अमृतसर जा रही एक गर्भवती महिला को यात्रा के दौरान प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। कंट्रोल रूम से इसकी सूचना रेलवे स्टेशन पर अधिकारियों को दी गई। जब तक ट्रेन प्लेटफार्म पर पहुंची, वहां पर आरपीएफ ( रेलवे सुरक्षा बल ) का महिला स्टाफ पहुंच गया। एंबुलेंस नहीं पहुंचने के कारण महिला पुलिस कर्मी गर्भवती महिला को आरपीएफ थाना में लेकर गई और महिला की सामान्य डिलीवरी कराई। महिला ने बेटी को जन्म दिया। बाद में आरपीएफ ने अपनी गाड़ी से जच्चा-बच्चा को नागरिक अस्पताल सोनीपत के जच्चा-बच्चा वार्ड में भर्ती करवाया। आरपीएफ के अनुसार दिल्ली की तरफ से पश्चिम एक्सप्रेस दोपहर बाद 1:29 मिनट पर सोनीपत रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर दो पर पहुंची। कृष्णा कालोनी, जिला वलसाढ, गुजरात की रेणू पत्नी मुकेश ट्रेन की बोगी बी-तीन में सीट नंबर 55 पर यात्रा कर रही थी। रेणू सूरत से अमृतसर जा रही थी। जैसे ही ट्रेन सोनीपत के नजदीक पहुंची तो रेणू को प्रसव पीड़ा तेजी हो गई। उसके साथ तीन साल का बेटा था। बोगी में सवार यात्रियों ने महिला को संभाला। वहीं, इसकी सूचना रेलवे कर्मचारियों के माध्यम से स्टेशन पर पहुंचाई, ताकि महिला को रेलवे स्टेशन पर उतारकर बेहतर उपचार मिल सके। सूचना के बाद स्टेशन पर एएसआई जगबीर सिंह, महिला कांस्टेबल सुमन यादव, मनीषा, कांस्टेबल नवीन कुमार स्टेशन पर पहुंचे। उन्होंने महिला को संभाला। 
 *समय पर न एंबुलेंस पहुंची, न ही स्वास्थ्यकर्मी* 

सोनीपत रेलवे स्टेशन परिसर में हेल्थ सेंटर बनाया गया है। हेल्थ सेंटर बनाने के पीछे लक्ष्य भी रेलवे कर्मचारियों के साथ-साथ यात्रियों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करानी है। सेंटर पर महिला डाक्टर नहीं है। लंबे समय से रेलवे कर्मचारियों द्वारा महिला डाक्टर की नियुक्ति करने की मांग कर रह हैं। सोमवार को जैसे ही कंट्रोल रूम से महिला यात्री की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली तो हेल्थ सेंटर से भी सुविधा नहीं मिली। एंबुलेंस तक समय पर स्टेशन पर नहीं पहुंची। पुलिसकर्मियों ने स्वजनों को दी जानकारी गर्भवती को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद स्वजन की जच्चा-बच्चा के सकुशल होने की सूचना दी गई। आरपीएफ में कार्यरत एएसआइ जसबीर सिंह और हेड कांस्टेबल धीरज तोमर के अनुसार जच्चा-बच्चा स्वस्थ हैं। कंट्रोल रूप से सूचना मिलते ही एंबुलेंस बुलाने के लिए काल की थी, लेकिन समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंची। वहीं, महिला ने बताया कि गुजरात में पति के साथ रहती है और अमृतसर अपने घर जा रही थी। उन्होंने सहायता करने पर रेलवे कर्मचारियों का धन्यवाद भी किया।

Monday, June 27, 2022

June 27, 2022

अग्निपथ योजना के विरोध में यूथ कांग्रेस ने अर्धनग्न होकर किया प्रदर्शन

अग्निपथ योजना के विरोध में यूथ कांग्रेस ने अर्धनग्न होकर किया प्रदर्शन

सिरसा : सेना में भर्ती को लेकर केंद्र सरकार द्वारा नई भर्ती योजना अग्निपथ को लेकर यूथ कांग्रेस की ओर से सुभाष चौक पर अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन का नेतृत्व यूथ कांग्रेस के प्रदेश महासचिव वेदप्रकाश भाट ने किया। वेद भाट ने कहा कि यह योजना देश के युवाओं के साथ खिलवाड़ है और देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान है। वेद भाट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना किसी विचार-विमर्श के पहले नोटबंदी की, जिससे आम वर्ग दो वक्त की रोटी का मोहताज हो गया। उसके बाद युवाओं के लिए अग्निपथ जैसी योजना लाकर केंद्र सरकार ने युवाओं के तन से कपड़े उतारने की पूरी-पूरी योजना बना डाली है। वेद भाट ने कहा कि हर वर्ष दो करोड़ लोगों को रोजगार देने की बात करने वाले प्रधानमंत्री स्थाई रोजगार देने की बजाय सरकारी विभागों को ही बेचने पर आमादा हैं। कुछ विभागों का तो निजीकरण हो चुका है और कुछ का होने की कगार पर है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना से युवा वर्ग इधर गिरे तो कुंआ और उधर गिरे तो खाई वाली स्थिति में आ जाएगा। इतना ही नहीं यह योजना देश की सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपनी झूठी वाहवाही करवाने की बजाय देश व जनता के हित को देखते हुए नीतियां व कानून बनाए। उन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण अडवानी, मुरली मनोहर जोशी तथा भाजपा के वयोवृद्ध नेताओं से मशविरा जरूर करना चाहिए। वेद भाट ने अग्निपथ योजना को तुरंत वापस लेकर पुरानी नीति के अनुसार सेना भर्ती करने की मांग की है, ताकि देश की युवा शक्ति सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सके और सेना को और अधिक मजबूती मिल सके। इस मौके पर कमल कांटीवाल ने कहा कि यह योजना सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है। सरकार निजीकरण की बजाय स्थाई नौकरी की व्यवस्था करे, ताकि युवा अपने परिवार का बेहतर तरीके से पालन-पोषण कर सके।

Sunday, June 26, 2022

June 26, 2022

अग्निपथ योजना के खिलाफ फिर सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस, 27 जून को देशभर में धरना- हुड्डा

अग्निपथ योजना के खिलाफ फिर सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस, 27 जून को देशभर में धरना- हुड्डा 

रोहतक: पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि देशहित, देश की सुरक्षा, फौज और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली अग्निपथ योजना का विरोध जारी रहेगा। 27 तारीख को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक गांधीवादी तरीके से पूरे देश में कांग्रेस धरना प्रदर्शन करेगी। रोहतक में धरने के अगवानी वह खुद करेंगे और करनाल में प्रदेश अध्यक्ष चौधरी उदयभान इसकी कमान संभालेंगे। 

हुड्डा ने दोहराया कि अग्निपथ योजना ना देश हित में है, ना देश की सुरक्षा, ना फौज और युवाओं के हित में। इस योजना से फौज के भीतर ही 2 किस्म की फौज बन जाएंगी, एक परमानेंट और एक टेंपरेरी। इनके बीच में समन्व्य स्थापित करना बेहद मुश्किल होगा।
हुड्डा ने कहा कि हरियाणा सरकार अग्निवीरों को पक्की नौकरी देने का वादा करके सब्जबाग दिखा रही है। जबकि हकीकत यह है कि बीजेपी-जेजेपी सरकार की नीतियों के चलते हरियाणा पूरे देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी झेल रहा है। आँकड़े बताते हैं कि अब तक 29,275 पूर्व सैनिकों ने नौकरी के लिए आवेदन किया है। जबकि सरकार ने सिर्फ 543 को ही नौकरी दी है। यानी सरकार सिर्फ 1.8% पूर्व सैनिकों को ही नौकरी दी है। ऐसे में 4 साल की नौकरी के बाद सेना से वापस आने वाले 75% अग्निवीरों को यह सरकार नौकरी कैसे देगी? अगर ऐसा है तो सरकार हरियाणा के अग्निवीरों को पहले पक्की नौकरी दे और 4 साल के सेना में डेपुटेशन पर भेजे। 

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि इजराइल जैसे छोटे देशों की तुलना भारत जैसे विशाल देश से नहीं हो सकती। इन छोटे-छोटे देशों में ना तो बेरोजगारी है और ना ही लोग सेना में भर्ती होना चाहते। इसलिए वहां पर सेना में सेवाएं देना अनिवार्य किया गया है। जबकि, भारत के युवा खुद सेना में भर्ती होने का सपना देखते हैं और एक सैनिक बनकर खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं। ऐसे में इजरायल जैसे देशों की नीति भारत में लागू नहीं हो सकती। सरकार को इसपर पुनर्विचार करते हुए अग्निपथ योजना को वापस लेना चाहिए और पक्की भर्तियां शुरू करनी चाहिए। पिछले 3 साल में अगर भर्तियां पूरी होती तो हरियाणा के करीब 20,000 युवा आज फौज में भर्ती होकर देश सेवा कर रहे होते। 
निकाय चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि शहरी मतदाता ने भाजपा जजपा को पूरी तरह नकार दिया है। इस चुनाव में बीजेपी को सिर्फ 26% वोट मिले यानी हर 4 में से 3 मतदाताओं ने भाजपा के खिलाफ वोट किया। जबकि निर्दलीय उम्मीदावरों को बीजेपी जेजेपी से दोगुने वोट मिले हैं। लेकिन इस हार को भी भाजपा जेजेपी जीत के तौर पर पेश कर रही है। उसकी हालत खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे वाली हो गई है। 

हुड्डा ने रिकॉर्ड तोड़ महंगाई के बीच सिंचाई विभाग और वॉटर रिसोर्स अथॉरिटी की ओर से वाटर सप्लाई के रेट में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार गरीब आदमी से लेकर किसान तक हर एक पर महंगाई की बड़ी मार मारने जा रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि सरकार आम आदमी के जीने, मरने, सांस लेने, सोने और जागने पर भी टैक्स ले रही है। लगातार टैक्स पर टैक्स और कीमत पर कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करती रहेगी।
रोहतक न्यायिक परिसर और अन्य सरकारी इमारतों को शहर के बाहर निकालने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में हुड्डा ने कहा कि वह अपने स्टैंड पर कायम हैं। किसी भी कीमत पर न्यायिक परिसर और अन्य सरकारी दफ्तरों को शहर से बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा। क्योंकि, हर छोटे-बड़े कार्य के लिए बड़ी तादाद में आम आदमी की आवाजाही इन दफ्तरों में होती है। अगर यह शहर से बाहर जाएंगे तो ना सिर्फ वकीलों व कोर्ट स्टाफ को दिक्कत होगी बल्कि आम लोगों को भी कोर्ट कचहरी जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय है करना पड़ेगा।
June 26, 2022

देश व युवाओं के साथ खिलवाड़ है अग्रिपथ योजना : अशोक अरोड़ा

देश व युवाओं के साथ खिलवाड़ है अग्रिपथ योजना : अशोक अरोड़ा

अग्रिपथ योजना के विरोध में 27 जून को उपायुक्त कार्यालय पर धरना देंगें कांग्रेस कार्यकर्ता  

कुरुक्षेत्र :  हरियाणा के पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अशोक अरोड़ा ने कहा है कि सरकार द्वारा लाई गई अग्रिपथ योजना देश व युवाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा को लेकर शॉर्ट टर्म नीतियां नहीं बननी चाहिए। देश की सुरक्षा कोई अल्पकालिक या अनौपचारिक विषय नहीं है। अग्रिपथ के नाम पर सैन्य भर्ती को लेकर जो खानापूर्ति करने वाला लापरवाह रवैया अपनाया जा रहा है, वह देश और देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए घातक साबित होगा। अग्रिपथ योजना के लाए जाने से देश का युवा वर्ग असंतुष्ट और आक्रोशित है। सेना में जवानों की भर्ती की संख्या को कमी के साथ-साथ मात्र चार साल के लिए सीमित किया जा रहा है, यह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। सरकार को तुरंत इस फैसले को वापिस लेना चाहिए।
Agripath scheme is playing with country and youth: Ashok Arora Haryana Bulletin News
पूर्व मंत्री ने कहा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दिशा निर्देश पर 27 जून दिन सोमवार को अग्रिपथ योजना के विरोध में उपायुक्त कार्यालय पर थानेसर हल्के के कार्यकर्ता धरना देंगें। इस दिन थानेसर हल्का के सभी कार्यकर्ता सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक धरना देंगें। अशोक अरोड़ा ने कहा कि इस योजना के आने से फौज की तैयारी कर रहे युवाओं में अपने जीवन को लेकर असमंजस पैदा हो गई है। ऐसे में सरकार को चाहिए इस योजना को तुरंत वापिस ले।

Thursday, June 16, 2022

June 16, 2022

अग्निपथ के विरोध में रोहतक में सुसाइड:पिता बोले- बेटे को सेना में जाने का जुनून था, आखिरी बार बात हुई तो मन नहीं भांप पाया

अग्निपथ के विरोध में रोहतक में सुसाइड:पिता बोले- बेटे को सेना में जाने का जुनून था, आखिरी बार बात हुई तो मन नहीं भांप पाया

जींद/रोहतक : भारतीय सेना में भर्ती की नई स्कीम 'अग्निपथ' के विरोध में सुसाइड करने वाले युवक का परिवार अपने बेटे की मौत के लिए सरकार को जिम्मेदार मानता है। हरियाणा के रोहतक में बतौर पेइंग गेस्ट (PG) रहकर दो साल से सेना भर्ती की तैयारी कर रहे जींद के लिजवाना कलां गांव के सचिन ने सुसाइड से चंद घंटे पहले ही अपने पिता सत्यपाल से बात की थी।

22 साल के बेटे के सुसाइड की खबर मिलने के बाद रोहतक PGI में उसकी बॉडी लेने पहुंचे सत्यपाल को इस बात का मलाल है कि बेटे से बातचीत में वह उसके मन की बात को भांप नहीं पाए। उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि कल शाम को उनकी सचिन से हुई बातचीत आखिरी थी और अब उनका बेटा कभी लौटकर नहीं आएगा।
"पिता ने कहा- आखिरी बार बात हुई तो मायूसी का अहसास नहीं हुआ*

सत्यपाल के अनुसार, कल शाम को जब सचिन से बात हुई तो उन्होंने उससे पूछा कि तूझे किसी चीज की जरूरत तो नहीं है? जवाब में उसने कहा कि सबकुछ है। इसके बाद उन्होंने बेटे से अच्छे से भर्ती की तैयारी करने को कहा। इसके बाद फोन कट गया।

सेना से रिटायर्ड सत्यपाल ने अफसोस भरे लहजे में कहा कि अगर बातचीत में बेटे की परेशानी या मायूसी का जरा सा भी अहसास हो जाता तो मैं 35 किलोमीटर दूर गांव से दौड़कर रोहतक में उसके पास पहुंच जाता। उसके कभी सुसाइड नहीं करने देता।

डबडबाई आंखों से आकाश की तरफ निहारते हुए सत्यपाल ने कहा, 'सचिन छोटा था, इसलिए सबका लाड़ला था। बेटे की तरह उनका भी सपना था कि उनका खून उन्हीं की तरह फौज में भर्ती होकर देश सेवा करे।'

इस बीच सचिन की मौत से आहत लिजवाना कलां ​​​​​​ और उसके आसपास के ​चार गांवों के लोगों ने शनिवार को जींद-रोहतक रोड जाम करने की चेतावनी दी है। इन चारों की गांवों के बच्चे लिजवाना कलां गांव के स्टेडियम में सेना में भर्ती की तैयारी करते हैं।
सचिन की मौत के बाद लिजवाना में उनके घर में उमड़े ग्रामीण।

*परिवार को सचिन से थी बड़ी उम्मीदें*

जींद के ऐतिहासिक गांव लिजवाना कलां के सत्यपाल ने बताया कि वह खुद सेना में रहकर देश की सेवा कर चुके हैं। उनकी चार बेटियां और दो बेटे हैं। सचिन सबसे छोटा था। उसकी चारों बहनों और बड़े भाई मंगत की शादी हो चुकी है। मंगत बेरोजगार है। परिवार में केवल सचिन ही अविवाहित था। वह अपना और अपने परिवार का सपना पूरा करने के लिए दो बरसों से रोहतक में रहकर आर्मी की भर्ती की तैयारी कर रहा था। परिवार को भी सचिन से बड़ी उम्मीदें थीं। देश सेवा के साथ-साथ परिवार का खर्च चलाने के लिए वह सेना में भर्ती होना चाहता था।

*2 साल पहले आर्मी भर्ती में फिजिकल और मेडिकल टेस्ट दिया था*

सचिन 2 साल पहले गोवा में हुई आर्मी की 'रिलेशन भर्ती' में फिजिकल और मेडिकल टेस्ट पूरा कर चुका था। अब केवल लिखित पेपर होना बाकी था। कोरोना और दूसरी वजहों से 2 साल में कई बार पेपर की तारीख आगे खिसकती रही। सेना में जाना उसका जुनून बन चुका था।

लिखित पेपर के लिए सचिन दो साल से रोहतक में रहकर कोचिंग ले रहा था। सचिन की बड़ी बहन पूनम कहती हैं कि उन्होंने कई बार समझाना चाहा लेकिन सचिन के दिमाग पर केवल सेना में जाने का भूत सवार था। वह कोई दूसरी नौकरी या काम करने को तैयार नहीं था।
पीजीआई में पहुंचे डीएसपी पुलिस के जवानों से जानकारी लेते हुए।

*बहन से साझा किया भाई का दर्द*

रोहतक में बतौर पेइंग गेस्ट रहकर सेना भर्ती की तैयारी कर रहा सचिन आर्मी में भर्ती के लिए लाई गई अग्रिपथ योजना से मायूस हो गया था। बुधवार को ही उसने अपने पिता सत्यपाल को फोन किया था कि वह जल्दी ही गांव आएगा। केंद्र सरकार की नई योजना आने के बाद सचिन ने खरकरामजी में ब्याही गई अपनी बड़ी बहन पूनम को भी फोन किया था। बहन से बातचीत में उसने कहा था कि अब वह अपना शायद सपना पूरा नहीं कर पाएगा। पूनम के अनुसार, उन्होंने फोन पर बातचीत में सचिन को हौसला बनाए रखने के लिए कहा था मगर वह सुसाइड कर लेगा, इसका आभास नहीं था।

*रात में दोस्त के जन्मदिन पर की पार्टी*

परिवार ने बताया कि बुधवार को सचिन के दोस्त का जन्मदिन था। वह उसके जन्मदिन की पार्टी में भी गया और देर रात लौटा। पार्टी में भी वह दोस्तों के साथ बहुत ज्यादा घुलमिल नहीं पाया। सचिन के रूम मेट रूपेश ने बताया कि सचिन काफी शालीन स्वभाव का था और सबके साथ घुल मिलकर रहता था। बुधवार शाम को उसने बताया था कि वह बर्थ-डे पार्टी में जा रहा है और वापसी में उसके साथ कुछ साथी होंगे इसलिए आप दूसरे कमरों में सो जाना। देर रात जब सचिन लौटा तो वह लोग सो चुके थे। गुरुवार सुबह उन्होंने आवाज लगाई लेकिन जब दरवाजा नहीं खुला तो उन्होंने गेट तोड़ दिया। अंदर सचिन की बॉडी फंदे पर झूल रही थी।

*तीन-चार दिन से परेशान था*

पेइंग गेस्ट में सचिन के साथ रहकर कोचिंग लेने वाले युवकों ने उसके परिवार को बताया कि सचिन तीन-चार दिन से परेशान था। हालांकि अपनी परेशानी का पता उसने घरवालों को नहीं लगने दिया। सेना भर्ती की परीक्षा न होने और नई स्कीम के कारण वह परेशान था। उसने अपनी परेशानी का जिक्र दोस्तों के आगे किया तो था मगर खुलकर कुछ नहीं बताया। इसलिए दोस्तों को भी आभास नहीं हुआ कि सचिन आत्महत्या जैसा कदम उठा सकता है।

*पिता ने दिया युवाओं को संदेश*

सचिन के पिता और पूर्व सैनिक सत्यपाल ने कहा कि किसी भी तरह के हालात में युवाओं को धैर्य बनाए रखने की जरूरत है। युवाओं को चाहिए कि वह अपने परिवार के हितों को देखते हुए ऐसा कोई कदम न उठाएं जिससे उनके परिवार को दिक्कत हो। सत्यपाल ने कहा कि शायद उनके बेटे का वक्त आ गया था।

*4 गांवों के युवाओं में मायूसी*

सचिन अपने गांव लिजवाना कलां के स्टेडियम में ही आर्मी भर्ती की तैयारी करता था। इस स्टेडियम में लिजवाना कलां के अलावा आसपास के अकालगढ़, मेहरड़ा और फतेहगढ़ के युवा भी आते हैं। यह सभी युवा सेना और पुलिस में भर्ती के लिए मेहनत करते हैं। सचिन की मौत से मायूस इन युवाओं ने कहा कि सरकार की गलत नीति की वजह से यह घटना घटी है। शनिवार को चारों गांवों के युवा जुलाना पहुंचकर जींद-रोहतक मार्ग को जाम करेंगे।
June 16, 2022

सेना भर्ती के लिये अग्निपथ योजना के दूरगामी परिणाम बेहतर नहीं होंगे - भूपेंद्र हुड्डा

अग्निपथ योजना पर पुनर्विचार करे सरकार - भूपेंद्र हुड्डा

इसे तर्कसंगत बनाए और सेना से निकले जवानों को स्थायी जॉब देने की नीति लेकर आए - भूपेंद्र हुड्डा
सेना भर्ती के लिये अग्निपथ योजना के दूरगामी परिणाम बेहतर नहीं होंगे - भूपेंद्र हुड्डा
4 साल बाद सेवा से निकाल दिये गये 75 प्रतिशत नौजवान फिर बेरोजगार हो जायेंगे और नौकरी के लिये दर दर की ठोकर खाने को मजबूर होंगे - भूपेंद्र हुड्डा
पिछले 3 वर्षों में ओवरएज हो चुके युवाओं को आयु सीमा में छूट देने पर भी विचार करे सरकार - भूपेंद्र हुड्डा

चंडीगढ़, 15 जून :  पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सेना भर्ती के लिये बनायी गयी नयी अग्निपथ पॉलिसी को न तो देश हित में न ही नौजवानों के हित में बताया और सरकार से अनुरोध किया कि इस पॉलिसी पर पुनः विचार करे साथ ही इसे तर्कसंगत बनाते हुए 4 साल बाद बाद सेना से निकले जवानों को स्थायी जॉब देने की नीति लेकर आए। उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना को लेकर देश भर के नौजवानों में मायूसी है। इस योजना को तैयार करते समय इसके दूरगामी परिणामों पर पूरी तरह से विचार नहीं किया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय में इस पॉलिसी का असर बेहद बुरा होगा जो देश की सुरक्षा के हित में भी नहीं है। ऐसा लगता है कि सरकार वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी का पैसा बचाने और सैन्य बल की क्षमता को घटाकर आधा करने की नीयत से देश की सुरक्षा के साथ समझौता कर रही है। 

उन्होंने कहा कि कोरोना के नाम पर पिछले 3 वर्षों से सेना में भर्ती बंद होने के चलते बड़ी संख्या में युवा ओवरएज हो चुके हैं। इस नयी पॉलिसी के लागू होने के बाद जो नौजवान पिछले कई वर्षों से सेना भर्ती की आस लगाये बैठे थे न सिर्फ उनको, बल्कि उन नौजवानों जिन्होंने सेना भर्ती के लिये लिखित परीक्षा, फिजिकल टेस्ट दे दिये थे और परिणाम का इंतजार कर रहे थे, की भी उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है। पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने मांग करी कि सरकार पिछले 3 वर्षों में ओवरएज हो चुके युवाओं को आयु सीमा में छूट देने पर भी विचार करे। 
अग्निपथ योजना की खामियों को गिनाते हुए चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि अग्निवीर के तौर पर जिन्हें सेना में भर्ती किया जायेगा उनमें से 75 प्रतिशत जवानों को 4 साल बाद रिटायर कर दिया जायेगा। उनके भविष्य का क्या होगा, इसका कोई ख्याल नहीं रखा गया है। यह योजना सेना की परंपरा, प्रकृति, नैतिकता और मूल्यों पर खरी नहीं उतरती। योजना के तहत प्रशिक्षण की जो अवधि तय की गई है वह अपर्याप्त है। कामचलाऊ प्रशिक्षण से सेना की क्षमता और प्रभाव पर बुरा असर पड़ सकता है। महज 4 साल की सर्विस होने से सेना को टूरिस्ट संगठन की तरह समझा जाने लगेगा। नई व्यवस्था में रेजिमेंट व्यवस्था खत्म होने से जवानों का नाम, नमक और निशान से लगाव भी खत्म हो जाएगा। सेना से 4 साल बाद निकाले गये अग्निवीरों को सेवा निधि के तौर पर 11.71 लाख एकमुश्त रकम देने की बात सरकार कह रही है, जबकि सच्चाई ये है कि इस निधि में से आधा हिस्सा ही सरकार का है आधा तो सैनिकों की कमाई का पैसा होगा। उन्होंने सीधा सवाल किया कि 4 साल बाद फिर से बेरोजगार होने वाले अग्निवीर क्या 11.71 लाख रुपये में पूरी जिंदगी बिता पायेंगे? उन्हें 4 साल की नौकरी के बाद न पेंशन, न मिलिट्री अस्पताल न कैंटीन की सुविधा ही मिल पायेगी। 
उन्होंने कहा कि साढ़े 21 साल और 25 साल की उम्र में फिर से जो 75 प्रतिशत सैनिक बेरोजगार होंगे उनके स्थायी रोजगार के लिये सरकार ने कोई योजना नहीं बनाई है और उन्हें अधर में छोड़ दिया है। इसके अलावा, सेना की 4 साल की सर्विस पूरी करने वाले इन नौजवानों की फौज नौकरी के लिये दर-दर भटकने को मजबूर हो जायेगी। हथियारों का प्रयोग जानने वाले ऐसे बेरोजगार नौजवानों को आसानी से गुमराह किया जा सकता है जो समाज के लिये गंभीर खतरा साबित हो सकता है। भूपेंद्र हुड्डा ने फिर दोहराया कि सरकार देश और समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखकर निर्णय ले और इस योजना पर पुनर्विचार करे।