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Saturday, May 23, 2026

विनेश फोगाट को कारण बताओ नोटिस दिए जाने पर कोर्ट ने कुश्ती महासंघ को लगाई फटकार

विनेश फोगाट को कारण बताओ नोटिस दिए जाने पर कोर्ट ने कुश्ती महासंघ को लगाई फटकार
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने पहलवान विनेश फोगाट को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस पर शुक्रवार को रेसलिंग फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (डब्ल्यूएफ़आई) को फटकार लगाई है.

बार एंड बेंच के अनुसार, इस नोटिस में कहा गया था कि पेरिस ओलंपिक में गोल्ड मेडल मुकाबले से पहले अधिक वज़न होने की वजह से अयोग्य ठहराए जाने से विनेश ने देश को शर्मिंदा किया.

चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीज़न बेंच ने कहा कि ओलंपिक में विनेश के साथ एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी, लेकिन खेल प्रबंधन की ज़िम्मेदारी तय करने के बजाय डब्ल्यूएफ़आई उन्हीं को दोषी ठहरा रहा है.
कोर्ट ने कहा, “क्या आप देश में कुश्ती के हित में इसी तरह काम कर रहे हैं? ओलंपिक में फ़ाइनल तक पहुंची एक महिला खिलाड़ी के साथ यह हादसा हुआ और आपने लिख दिया कि यह राष्ट्रीय शर्म थी. फ़ाइनल में उन्हें अयोग्य ठहराया गया, तो क्या वह राष्ट्रीय शर्म थी? इस देश के लोगों ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया? क्या वह राष्ट्रीय शर्म थी?”

कोर्ट ने एशियन गेम्स ट्रायल्स के चयन नियमों में कुश्ती महासंघ की ओर से किए गए बदलाव पर भी सवाल उठाए और कहा कि फ़ेडरेशन को बदले की भावना से काम नहीं करना चाहिए.

फ़रवरी 2026 में जारी नई नीति के मुताबिक, ट्रायल्स में हिस्सा लेने का अधिकार सिर्फ़ 2025 और 2026 की कुछ प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं तक सीमित कर दिया गया.

जबकि पुरानी नीति में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल करने वाले खिलाड़ियों के लिए विशेष परिस्थितियों में छूट देने का प्रावधान था.

विनेश फोगाट का कहना है कि चयन की समय-सीमा इस तरह तय की गई कि वह उनकी मातृत्व अवकाश, बच्चे के जन्म और उसके बाद की रिकवरी के बीच आ गई.

विनेश के वकील राजशेखर राव ने कहा कि जनवरी 2026 में विनेश प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए पात्र हो गई थीं और उनका पंजीकरण भी स्वीकार कर लिया गया था.

उन्होंने कहा, “मैं प्रतियोगिता स्थल पहुंचती हूं और मुझे बताया जाता है कि कार्यक्रम से ठीक पहले मुझे रोक दिया गया है... कारण बताओ नोटिस देखिए. लगता है कोई किसी तरह बहाना ढूंढ रहा है.”

कोर्ट ने विनेश को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने पर केंद्र सरकार की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए.

कोर्ट ने कहा, “क्या ये लोग खेल प्रशासक हैं? आपने इनके ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई की? क्या खेल विभाग को इस तरह के नोटिस जारी होने की जानकारी नहीं थी? अगर वह देश का नाम रोशन कर रही हैं, तो क्या आप उन्हें एक मौका भी नहीं देंगे? क्या उन्होंने कोई नियम तोड़ा है? क्या यह नीति बनाने से पहले आपसे सलाह ली गई थी? यह पूरी तरह पिछड़ा कदम है और आप चुप बैठे हैं.”

केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह भी कारण बताओ नोटिस की भाषा देखकर हैरान हैं.

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