आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट ने गैंगरेप और बच्चे के यौन उत्पीड़न के मामले में किया बरी
नई दिल्ली : साल 2008 में आसाराम के मुटेरा आश्रम में दो बच्चों की हत्या का मामला सामने आने के बाद लगभग हर राजनीतिक दल के नेताओं ने उनसे दूरी बना ली (फ़ाइल फोटो)
दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे आसाराम को बुधवार को राजस्थान हाई कोर्ट से आंशिक राहत मिली है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, कोर्ट ने आईपीसी और पॉस्को क़ानून के तहत गैंगरेप और बच्चे के साथ सामूहिक यौन उत्पीड़न के आरोपों से उन्हें बरी कर दिया.
हालांकि, नाबालिग से रेप के मामले में उनकी सज़ा बरकरार रखी गई, जिसमें उम्रकैद की सज़ा जारी रहेगी.
पीटीआई के मुताबिक़, जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीज़न बेंच ने आसाराम को आईपीसी की धारा 376(डी) और पास्को एक्ट की धारा 5(जी)/6 के आरोपों से बरी किया.
कोर्ट ने आपराधिक साज़िश से जुड़ी आईपीसी की धारा 120(बी) के तहत भी उन्हें दोषमुक्त कर दिया.
फिलहाल वह अस्थायी जमानत पर बाहर हैं. सोमवार को उनकी अंतरिम जमानत सात दिन के लिए बढ़ाई गई थी.
*कौन हैं आसाराम?*
अप्रैल 1941 में मौजूदा पाकिस्तान के सिंध इलाके के बेरानी गांव में पैदा हुए आसाराम का असली नाम असुमल हरपलानी है.
सिंधी व्यापारी समुदाय से संबंध रखने वाले आसाराम का परिवार 1947 में विभाजन के बाद भारत के अहमदाबाद शहर में आ बसा.
साठ के दशक में उन्होंने लीलाशाह को अपना आध्यात्मिक गुरु बनाया. बाद में लीलाशाह ने ही असुमल का नाम आसाराम रखा.
1972 में आसाराम ने अहमदाबाद से लगभग 10 किलोमीटर दूर मुटेरा कस्बे में साबरमती नदी के किनारे अपनी पहली कुटिया बनाई.
यहाँ से शुरू हुआ आसाराम का आध्यात्मिक प्रोजेक्ट धीरे-धीरे गुजरात के अन्य शहरों से होता हुआ देश के अलग-अलग राज्यों में फैल गया.
No comments:
Post a Comment