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Tuesday, June 15, 2021

अस्पताल ने मृत घोषित किया, घर आते ही चालू हो गई बच्चे की धड़कन

अस्पताल ने मृत घोषित किया, घर आते ही चालू हो गई बच्चे की धड़कन
बहादुरगढ़ :  अस्पतालों में लापरवाही के केस तो सामने आते रहते हैं, लेकिन दिल्ली का एक बड़ा अस्पताल इस मामले में दो कदम आगे निकला। इस अस्पताल के स्टाफ द्वारा मृत घोषित किए एक बच्चे की घर पहुंचने पर धड़कन चालू मिली। दवाओं और दुआओं के बूते आज बालक स्वस्थ है लेकिन अस्पताल स्टाफ की लापरवाही पर परिजनों में नाराजगी है। मामला बहादुरगढ़ शहर से जुड़ा है। दरअसल, किला मोहल्ला के निवासी विजय कुमार शर्मा के पौते करीब 6 वर्षीय कुणाल शर्मा को टाइफाइड हो गया था। तबीयत अधिक बिगड़ी तो 25 मई को कुणाल दिल्ली स्थित कलावती अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। वहां उपचार शुरू हुआ। चिकित्सकों ने कहा कि हालत गम्भीर है, बचने के चांस बहुत कम हैं। विजय कुमार के मुताबिक, 26 मई को वह अपने पौते से मिलने गए। मिलकर बहादुरगढ़ वापस आए ही थे कि बेटे हितेश का फोन आया। हितेश ने कहा कि कुणाल के पास बस आधे घंटे का समय है। हमने उसे समझाकर शांत कराया। आधे घंटे बाद उसका फिर फोन आया और बोला कि कुणाल नहीं रहा। डॉक्टरों ने डेड घोषित कर दिया है। इतना सुनकर परिवार में चीख-पुकार मच गई। अस्पताल के स्टाफ ने अपनी तरफ से कुणाल को मरा हुआ समझ कर रितेश को थमा दिया। फिर अंतिम संस्कार की बात चली तो दादी आशा ने कहा कि कुणाल को बहादुरगढ़ ले आओ। इधर, सारी तैयारियां कर ली थी। बर्फ की सिल्ली समेत तमाम सामान मंगवा लिया। अगली सुबह अंतिम संस्कार ही करना था। 
हर किसी की आंखें नम थी। जैसे ही कुणाल को लेकर एम्बुलेंस आई तो सभी के आंसू निकल पड़े। कुणाल को एम्बुलेंस से निकाला गया। जब अन्नु (कुणाल की ताई) ने कुणाल को हाथों में उठाया तो उसे कुछ महसूस हुआ। कुणाल की धड़कन चालू थी। इसके बाद हितेश व उसके भाई आदि ने मुंह से उसको सांस देना शुरू किया। जैसे ही पिता हितेश ने सांस देनी चाही तो बेटे कुणाल ने उसके होठों को काट लिया। इसके बाद उसकी छाती को पम्प किया गया। उसके हाथ-पांव हिलने लगे। यह देख मौके पर मौजूद हर कोई हैरान हो गया। किसी ने चमत्कार कहा तो किसी ने इत्तेफाक लेकिन कुणाल की शरीर में हुई हलचल ने उसके परिजनों में उम्मीद जगा दी। इसके बाद जिस एम्बुलेंस में डालकर कुणाल को दिल्ली से लाया गया था, उसी में पुन: डालकर संजीवनी अस्पताल में ले जाया गया। यहां अस्पताल संचालकों ने कहा कि देर हो गई, चांस बहुत कम है। इसे दिल्ली के अग्रसेन या बालाजी एक्शन अस्पताल में ले जाओ लेकिन उस दौरान इन दोनों अस्पतालों में बेड खाली नहीं थे। फिर रोहतक स्थित एक अस्पताल में ले गए। 

 वहां डॉक्टरों ने कहा कि 15 प्रतिशत ही बचने के चांस हैं। यह सुनकर हितेश व अन्य परिजन फिर से रोने लगे तो मौजिज लोगों ने परिवार का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जीरो से 15 प्रतिशत पर आए हैं, तो आगे सब सही होगा। ईश्वर पर विश्वास रखो। परिवार ने उम्मीद नहीं छोड़ी। उधर, अस्पताल में दवाएं चल रही थी तो इधर घर-परिवार में हर कोई ईश्वर से कुणाल के स्वस्थ होने की कामना कर रहा रहा। दुआएं रंग लाईं और कई दिन इलाज चलने के बाद पिछले सोमवार को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। अब वह ठीक है और दिल्ली में अपनी नानी के यहां गया है। विजय कुमार शर्मा ने बताया कि अस्पताल स्टाफ की अनदेखी या लापरवाही ने तो उनका चिराग छीन ही लिया था लेकिन इसे इत्तेफाक कहें या चमत्कार, ईश्वर की कृपया से उनका बच्चा आज स्वस्थ है। अस्पताल की लापरवाही के बाद हितेश का कुणाल को बिना पैक किए ले आना, आशा का तुरंत कुणाल को बहादुगढ़ लाने को कहना, अन्नु को कुणाल की धड़कन महसूस होना आदि इत्तेफाक ही हैं।

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