Breaking

Friday, January 30, 2026

हरियाणा कृषि ऋण में लालफीताशाही खत्म करेगा, आरबीआई समर्थित डिजिटल क्रेडिट सिस्टम जल्द आएगा

हरियाणा कृषि ऋण में लालफीताशाही खत्म करेगा, आरबीआई समर्थित डिजिटल क्रेडिट सिस्टम जल्द आएगा
चंडीगढ़ - हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि   कृषि लोन में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक दिक्कतों को दूर करने के मकसद से एक बड़े सुधार के तहत, हरियाणा सरकार एक पारदर्शी, टेक्नोलॉजी पर आधारित ग्रामीण क्रेडिट सिस्टम शुरू करने जा रही है, जिससे किसानों को लोन से जुड़े दस्तावेज़ीकरण (डॉक्यूमेंटेशन) के लिए बैंकों और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी।

राज्य सरकार जल्द ही भारत के सबसे एडवांस्ड इंटीग्रेटेड फार्म क्रेडिट सिस्टम में से एक को विकसित करने के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के साथ एक एमओयू साइन करेगी। इस फ्रेमवर्क के तहत, कृषि लोन की मंजूरी सीधे डिजिटाइज़्ड ज़मीन के रिकॉर्ड से जुड़ी होगी, जिससे वित्तीय संस्थानों और राजस्व प्रशासन के बीच बिना किसी रुकावट के समन्वय पक्का होगा।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि यह नया सिस्टम जिस तरह से कृषि क्रेडिट दिया जाता है, उसमें एक बड़ा बदलाव है। उन्होंने बताया कि अब किसानों को लोन लेने के लिए सिर्फ़ अपने आधार नंबर की ज़रूरत होगी, क्योंकि ज़मीन से जुड़ी सभी जानकारी राज्य के डिजिटल रिकॉर्ड से अपने आप मिल जाएगी।

“यह सिर्फ़ एक प्रौद्योगिकी अपग्रेड नहीं है, बल्कि किसानों के लिए सार्वजनिक सेवा वितरण का पूरी तरह से नया तरीका है। उन्होंने कहा ‘पटवारी-तहसील-बैंक का जो पुराना सिस्टम था, जिसकी वजह से देरी होती थी, उसे खत्म कर दिया जाएगा।

यह प्रोजेक्ट दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में किसान क्रेडिट कार्ड लोन पर ध्यान दिया जाएगा, जो हरियाणा में खेती के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला क्रेडिट साधन है। आधार प्रमाणीकरण के बाद, ज़मीन की विवरण अपने आप मिल जाएंगी, लोन से जुड़ी एंट्रीज़ अपने आप ज़मीन के रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएंगी और भुगतान करने पर गिरवी की एंट्रीज़ तुरंत हटा दी जाएंगी। यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी मानवीय दखल के काम करेगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। दूसरे चरण में, इस सिस्टम को बढ़ाकर सभी तरह के कृषि और ग्रामीण लोन को शामिल किया जाएगा, जिससे पूरे राज्य में एक यूनिफाइड डिजिटल क्रेडिट इकोसिस्टम बनेगा।

उन्होंने कहा कि इस पहल से सभी स्टेकहोल्डर्स को काफी फायदे होंगे। किसानों का समय बचेगा, उन्हें तेज़ी से क्रेडिट मिलेगा, और लोन स्टेटस और ज़मीन के रिकॉर्ड की रियल-टाइम ट्रैकिंग से पूरी पारदर्शिता मिलेगी। बैंकों और फाइनेंशियल संस्थानों को रियल टाइम में वेरिफाइड ज़मीन का डेटा मिलेगा, जिससे धोखाधड़ी वाले आवेदनों से जुड़े जोखिम कम होंगे और परिचालन क्षमता (ऑपरेशनल एफिशिएंसी) बेहतर होगी। राजस्व प्रशासन को खुद-ब-खुद अपडेट होने वाले रिकॉर्ड, कम गलतियों और ज़मीन के रिकॉर्ड की बेहतर विश्वसनीयता से फायदा होगा।

राजस्व रिकॉर्ड और लोन देने वाली संस्थाओं के बीच रियल-टाइम इंटीग्रेशन धोखाधड़ी और गलत कामों के खिलाफ एक मज़बूत सुरक्षा कवच का काम करेगा। उन्होंने कहा कि जाली दस्तावेज़ों या पुराने रिकॉर्ड का इस्तेमाल करने की कोई भी कोशिश सिस्टम द्वारा अपने आप पकड़ ली जाएगी, जिससे लोन देने वालों और असली किसानों दोनों की सुरक्षा होगी।

No comments:

Post a Comment