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Wednesday, February 18, 2026

एसएलएससी ने दी 402 करोड़ रुपये से अधिक की सौर ऊर्जा आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी

एसएलएससी ने दी 402 करोड़ रुपये से अधिक की सौर ऊर्जा आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी

 हरियाणा के 94 गांवों के लगभग 8,900 किसानों को मिलेगा लाभ

 11,040 हेक्टेयर क्षेत्र आएगा आधुनिक सिंचाई के दायरे में
चंडीगढ़-सतत कृषि और वैज्ञानिक जल प्रबंधन को बढ़ावा देने के मकसद से राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति (एसएलएससी) ने हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में सूक्ष्म सिंचाई एवं कमान एरिया विकास प्राधिकरण (मिकाडा) के अंतर्गत चार सामुदायिक सौर ऊर्जा आधारित एकीकृत सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

कुल 402.41 करोड़ रुपये लागत की ये परियोजनाएं भिवानी, झज्जर, कुरुक्षेत्र और महेंद्रगढ़ जिलों के 20 ब्लॉकों में स्थित 61 नहरी आउटलेट्स पर लागू की जाएंगी। वर्ष 2026-27 से 2028-29 के बीच पूरी होने वाली इन परियोजनाओं से 11,040 हेक्टेयर कृषि योग्य कमांड एरिया आधुनिक सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के अंतर्गत आ जाएगा तथा 94 गांवों के 8,926 किसानों को सीधा लाभ होगा।

जिला-वार स्वीकृत राशि में भिवानी के लिए 95.78 करोड़, झज्जर के लिए 114.68 करोड़, कुरुक्षेत्र के लिए 77.17 करोड़ तथा महेंद्रगढ़ के लिए 114.78 करोड़ रुपये शामिल हैं। परियोजनाओं का लाभ-लागत अनुपात 1.21:1 से 1.65:1 के बीच है, जो उनकी आर्थिक व्यवहार्यता और दीर्घकालिक लाभ को दर्शाता है। नहरी क्षेत्रों में ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणाली को बढ़ावा देकर, इन परियोजनाओं का लक्ष्य जल उपयोग दक्षता बढ़ाना, ट्रांसमिशन हानि कम करना और फसल उत्पादकता बढ़ाना है।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि जल की आपूर्ति और मांग का समन्वित प्रबंधन जलवायु परिवर्तन और गिरते भूजल स्तर की चुनौतियों से निपटने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विभागों को परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, सख्त निगरानी और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि निर्धारित अवधि में किसानों तक इनका लाभ पहुंच सके। सौर ऊर्जा आधारित प्रणाली से परिचालन लागत में कमी आएगी और सिंचाई पर्यावरण के अनुकूल बनेगी। उन्होंने अधिकारियों को खेतों में जाकर किसानों के साथ श्रेष्ठ प्रथाओं को साझा करने के निर्देश भी दिए।

समिति ने पीडीएमसी (पर ड्रॉप मोर क्रॉप) दिशानिर्देश, 2025 के अनुसार निर्माता एवं आपूर्तिकर्ताओं के पंजीकरण सहित 16 व्यापक सुधार एजेंडों की समीक्षा कर उन्हें मंजूरी दी। 165 आवेदनों की गहन जांच के बाद 147 निर्माताओं एवं आपूर्तिकर्ताओं को वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक पंजीकरण के लिए पात्र पाया गया। विक्रेताओं ने राज्य/पीडीएमसी मानकों के अनुरूप दरें निर्धारित करने पर सहमति व्यक्त की, जिससे किसानों को कीमतों के उतार-चढ़ाव से संरक्षण मिलेगा।

यह योजना लाभार्थी-आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण/इन-काइंड मॉडल के तहत जारी रहेगी। इससे किसान आपूर्तिकर्ता का चयन कर सकेंगे परंतु अनुदान स्वीकृत लागत सीमा के भीतर ही जारी किया जाएगा। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मिकाडा पोर्टल को जीएसटी पोर्टल से जोड़ा जाएगा, ताकि बिलों का डिजिटल सत्यापन हो सके और फर्जी या बढ़े हुए बिलों पर रोक लगे। विक्रेताओं के लिए वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए घटक-वार बैंक गारंटी व्यवस्था को भी मंजूरी दी गई है तथा नियमानुसार जीएसटी को अनुदान हिस्से के तौर पर शामिल किया गया है।
गुणवत्ता आश्वासन तंत्र को भी मजबूत किया गया है। प्रयोगशाला परीक्षण रिपोर्टों की राज्य स्तर पर जांच, उल्लंघन पर कड़े दंड प्रावधान तथा प्रतिवर्ष कम से कम 20 प्रतिशत परियोजनाओं की स्वतंत्र निगरानी का प्रावधान किया गया है। क्लस्टर-आधारित क्रियान्वयन रणनीति और सार्वजनिक-निजी-सीएसआर मॉडल पर भी विचार किया गया, ताकि खास तौर पर अनुसूचित जाति, लघु एवं सीमांत किसानों को दीर्घकालिक रखरखाव सहयोग मिल सके।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच मिकाडा ने 18 जिलों में नाबार्ड वित्तपोषित 99 माइक्रो सिंचाई फंड योजनाएं 563.43 करोड़ रुपये की लागत से सफलतापूर्वक लागू की हैं। सहायक अवसंरचना का कार्य पूरा किया जा चुका है और लक्षित क्षेत्र के लगभग 40 प्रतिशत भाग में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली स्थापित की जा चुकी है।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण कुमार गुप्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अनुराग अग्रवाल, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव श्री पंकज अग्रवाल, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के महानिदेशक श्री राजनारायण कौशिक, मिकाडा के प्रशासक श्री बिरेंद्र सिंह, मिकाडा के मुख्य अभियंता श्री एस.डी. शर्मा, निदेशक–एमआई (मिकाडा) श्री धूप सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे

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