जींद का स्वास्थ्य बेड़ा हुआ मजबूत
प्रदेशभर में 137 एमओ को अपॉयमेंट लेटर जारी किए
जींद को मिले 18 नए चिकित्सा अधिकारी
16 साल से रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली, रेडियोलॉजिस्ट की दरकार
जींद : जिला के लोगों के लिए खुशखबरी है। जिला का स्वास्थ्य बेड़ा और मजबूत होने जा रहा है। चिकित्सकों की नई भर्ती से जींद को कुल 18 चिकित्सक मिले हैं। पहले जींद में 40 चिकित्सा अधिकारी (एमओ) काम कर रहे हैं। ऐसे में 18 एमओ और मिलने से स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी। स्वास्थ्य विभाग ने नवनियुक्त एमओ को अपॉयमेंट लेटर जारी किए हैं। जिन उम्मीदवारों ने 21 अप्रैल और 28 अप्रैल को अपना बायोमेट्रिक और दस्तावेज सत्यापन पूरा कर लिया था, उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं। साथ ही दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि नवनियुक्त एमओ निर्धारित प्रक्रिया जैसे चिकित्सा और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद चिकित्सा अधिकारी के पद पर कार्यभार ग्रहण कर सकते हैं। उनके नियुक्ति पत्र हरियाणा राज्य के सभी सिविल सर्जनों को डाक द्वारा भेजे गए हैं। प्रदेशभर में कुल 137 एमओ को अपॉयमेंट लेटर जारी किए गए हैं। जिनमें से जींद के लिए 18 एमओ है। अब यह तो वक्त ही बताएगा कि इन एमओ में से जींद में कितने ज्वायन करते हैं।
1. डा. रूपेश कुंडू
2. डा. पूर्णिमा
3. डा. वंदना
4. डा. आरती
5. डा. सुधीर
6. डा. अभिषेक
7. डा. नवीन पंवार
8. डा. सौरभ
9. डा. अभिनव रमन
10. डा. वैभव सिंह
11. डा. ऊषा
12. डा. चमन वर्मा
13. डा. अंजली
14. डा. दया सिंह
15. डा. पूजा कादियान
16. डा. परमवीर राठी
17. डा. अनिरूद्ध
*निर्माण से लेकर अबतक नही हुई अस्पताल में चिकित्सकों की कमी पूरी*
जिला मुख्यालय पर 1975 में नागरिक अस्पताल की शुरूआत हुई थी। उस समय से लेकर आजतक जिले में चिकित्सकों की कमी कभी भी दूर नहीं हुई। जींद अस्पताल की बात की जाए तो यहां 55 चिकित्सकों की आवश्यकता है। वहीं जिला में 222 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। जबकि सौ से अधिक पद रिक्त हैं। ऐसे में 18 एमओ और मिलने से चिकित्सकों की कमी काफी हद तक दूर होगी। इसके अलावा एक पीएमओ, पांच एसएमओ लेवल के अधिकारी कार्यरत हैं।
200 बैड का अस्पताल, स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की कमी
जिला मुख्यालय पर 200 बैड का अस्पताल बना हुआ है। वहीं, सफीदों, नरवाना तथा उचाना सब डिविजन पर 100-100 बैड के अस्पताल हैं। उधर, जुलाना, पिल्लूखेडा, अलेवा, उझाना समेत आठ स्थानों पर सीएचसी बनाई गई है। वहीं जिले में 26 पीएचसी बनाई गई हैं और 185 हैल्थ सैंटर बनाए गए है। जिन पर लोगों को नजदीक स्वास्थय सेवा उपलब्ध करवाने का जिम्मा है। स्पेशलिस्ट चिकित्सकों व अन्य की कमी को लेकर स्वत: अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिना चिकित्सकों के मरीजों को कैसे स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें। 16 साल से रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली
नागरिक अस्पताल में पिछले 16 साल से किसी भी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हुई है। बिना रेडियोलॉजिस्ट के कारण जिले के लोगों को निजी अस्पतालों में महंगी फीस पर अल्ट्रासाउंड करवाने पड़ रहे हैं।
कभी वीआईपी डयूटी तो कभी कैंप बढा देते हैं परेशानी
चिकित्सकों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होना लाजमी है।
इसके अलावा कभी वीआईपी डयूटी तो कहीं कोई स्वास्थ्य कैंप तो कभी दिव्यांग कैंप के लिए चिकित्सकों को जाना पड़ता है। जिससे अस्पताल में आने वाले मरीजों को परेशानी होती है। मरीजों व उनके तिमारदारों को पता ही नही चल पाता है कि अस्पताल में उनके उपचार से संबंधित चिकित्सक है या नही।
हर दिन हजारों की संख्या में होती है ओपीडी
नागरिक अस्पताल में ओपीडी की बात की जाए तो प्रतिदिन 1700 तक की ओपीडी होती है। सोमवार व मंगलवार को ओपीडी की संख्या 1800 से दो हजार तक पहुंच जाती है। ऐसे में सुबह होते ही चिकित्सकों के कमरे के आगे मरीजों की लाइन लग जाती हैं। रोजाना सैंकड़ों मरीज इलाज के लिए दूर-दूर के गांवों से सिविल अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन डॉक्टरों की कमी से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
*चिकित्सकों की कमी के बावजूद बेहतरीन सुविधाएं दे रहे* : *डा. सुमन*
सिविल सर्जन डा. सुमन कोहली ने बताया कि जिला को 18 चिकित्सक (एमओ) मिले हैं। इस समय विशेषज्ञों व चिकित्सकों की कमी के बावजूद भी जितनी सुविधाएं उपलब्ध हैं, उनके माध्यम से चिकित्सकों द्वारा अस्पताल में उपचार की बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किया जाता है। नए चिकित्सकों के ज्वायन करने से स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर होंगी।
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