जींद :आज जींद में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान जोगिंद्र ईगराह ने की और संचालन संदीप जाजवान ने किया। बैठक में यूनियन के कार्यकर्ताओं और निर्माण मजदूरों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए सीटू (CITU) जिला उपाध्यक्ष कॉमरेड रमेश चंद्र ने कहा कि मौजूदा सरकार मजदूर विरोधी नीतियों पर चल रही है। उन्होंने कहा कि राजनीति ही तय करती है कि मजदूरों की हालत कैसी होगी और मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
बैठक में यह भी चर्चा करते हुए यूनियन के राज्य सचिव कपूर सिंह, राज्यउपाध्यक्ष कश्मीर सिंह सेलवाल यूनियन के जिला कैशियर राजेश जलालपुर कलां ने कहा हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री ने रोहतक में विश्वकर्मा पूजा के नाम पर कार्यक्रम किया, लेकिन निर्माण मजदूरों और कारीगरों के लिए कोई राहत नहीं दी गई। यूनियन ने इस कार्यक्रम का विरोध करने का फैसला किया। इसके बाद 16 सितंबर को रात 11 बजे मुख्यमंत्री ने यूनियन प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। इस बातचीत के बाद विरोध प्रदर्शन फिलहाल स्थगित किया गया, लेकिन चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते मजदूरों और कारीगरों को राहत नहीं दी गई, तो आंदोलन और भी तेज किया जाएगा।
बैठक में गंभीर चिंता जताई गई कि निर्माण मजदूरों का पंजीकरण बंद होने से उन्हें कई योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इनमें शामिल हैं: कन्यादान योजना, मातृत्व-पितृत्व सहायता, छात्रवृत्ति, स्कूटी योजना, मृत्यु उपरांत आर्थिक सहायता। इससे मजदूर परिवारों की हालत और खराब हो गई है।
साथ ही, बैठक में यह भी बताया गया कि हाल ही में आई बाढ़ से मजदूरों का जान-माल और काम का भारी नुकसान हुआ है। कई मजदूरों के घर और निर्माण सामग्री बह गई, काम ठप पड़ा और परिवार आर्थिक तंगी में आ गए। यूनियन ने मांग की कि बाढ़ प्रभावित मजदूरों और कारीगरों को आपातकालीन राहत और मुआवजा दिया जाए। आज की मीटिंग को उपरोक्त के अलावा यूनियन के जिला उपाध्यक्ष सुभाष पांचाल, जिला कमेटी सदस्य ख़ुजानी, कमलेश, मूर्ति दीनदयाल, पवन कुमार, सुल्तान नगुरा, रणबीर, राजेश भनभेवा, मनोज गांगोली,कुलबीर, सुल्तान जांगड़ा, आनंद पोली, जगदीश कृषिंधु, दिलबाग हाट, रामचंद्र, रामदास, बलराज,राकेश ,आदि भी शामिल रहे। जारी कर्ता संदीप दालमवाला जिला सहसचिव भवन निर्माण कामगार यूनियन जींद
✍️ यूनियन की मुख्य मांगें
1. निर्माण मजदूरों का पंजीकरण तुरंत बहाल किया जाए।
2. बंद की गई सभी कल्याणकारी योजनाओं को पुनः शुरू किया जाए।
3. मजदूरों को निम्नलिखित लाभ नियमित और समय पर दिए जाएँ: कन्यादान योजना,
मातृत्व-पितृत्व सहायता, छात्रवृत्ति, स्कूटी योजना, मृत्यु उपरांत आर्थिक सहायता
4. निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड को पारदर्शी बनाया जाए।
5. श्रम विभाग में भ्रष्टाचार और देरी रोकने के उपाय किए जाएँ।
6. मजदूरों के लिए पेंशन व सामाजिक सुरक्षा की गारंटी।
7. निर्माण मजदूरों और कारीगरों के लिए विशेष राहत पैकेज, विशेषकर बाढ़ प्रभावितों के लिए।
8. मजदूर विरोधी नीतियों और कानूनों को रद्द किया जाए।
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