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Monday, September 8, 2025

विवाह के बाद महिलाओं का सरनेम न बदलने का प्रस्ताव पारित

अग्रवाल समाज के परिचय सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण को लेकर उठी बडी मांग
विवाह के बाद महिलाओं का सरनेम न बदलने का प्रस्ताव पारित
जींद : शादी के बाद महिलाएं अपना सरनेम न बदलें। महिलाओं की पहचान और सशक्तिकरण को लेकर जींद में रविवार को अखिल भारतीय अग्रवाल समाज के परिचय महासम्मेलन में यह बड़ा प्रस्ताव रखा गया। मंच से प्रस्ताव पारित किया गया कि शादी के बाद महिलाएं अपना सरनेम बदलकर अपनी पहचान न खोएं, बल्कि अपने शादी से पहले वाले सरनेम को ही बरकरार रखें।
अखिल भारतीय अग्रवाल समाज के प्रदेशाध्यक्ष राजकुमार गोयल ने यह प्रस्ताव कई राज्यों से आए अग्र नेताओं व हजारों की भीड के सामने रखा। सभी ने हाथ उठाकर प्रस्ताव पारित किया। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया और आश्वासन दिया कि उचित मंच पर इस प्रस्ताव को रखा जाएगा।
अध्यक्ष राजकुमार गोयल ने कहा कि “आजादी के 75 साल बाद भी महिलाएं अपनी असली पहचान नहीं रख पा रही हैं। शादी के बाद उनका सरनेम बदल जाता है, जिससे उनके आधार कार्ड, शैक्षिक डिग्रियों और अन्य दस्तावेजों में बड़ी दिक्कतें आती हैं। तलाक या पुनर्विवाह की स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। ऐसे में महिला की वास्तविक पहचान अधर में लटक जाती है।”
गोयल ने स्पष्ट कहा कि महिला शादी के बाद ससुराल में “गोद नहीं जाती बल्कि पत्नी बनकर जाती है”, ऐसे में उसका सरनेम बदलना अनिवार्य क्यों होना चाहिए? उन्होने कहा कि अब इसे देश-प्रदेश स्तर पर जागरूकता अभियान बनाकर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं जागरूक होकर शादी के बाद भी अपना नाम और सरनेम न बदलें, तो उनकी एक पहचान जीवन भर बनी रहेगी। यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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