चंडीगढ़ : हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि 39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1987 से शुरू हुआ यह मेला आज देश-विदेश में भारतीय सांस्कृतिक विरासत, शिल्प और कला की एक सशक्त पहचान बन चुका है। सूरजकुंड मेला ‘लोकल टू ग्लोबल’ विजन का सशक्त मंच बनकर स्वदेशी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प में हरियाणा का विशेष योगदान सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी निरंतर इसी दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जहां 44 देशों ने मेले में भागीदारी की थी, वहीं इस वर्ष 50 से अधिक देशों के 700 से ज्यादा विदेशी प्रतिनिधि और डेलीगेट्स हिस्सा ले रहे हैं। इस वर्ष का पार्टनर नेशन मिस्र (इजिप्ट) है, जो सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और सुदृढ़ करेगा। यह मेला कलाकारों और शिल्पकारों को न केवल अपनी कला प्रदर्शित करने का मंच देता है, बल्कि उन्हें अधिक राजस्व अर्जित करने और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने का अवसर भी प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा में ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर है, जिनमें 7000 वर्ष पुरानी सभ्यता वाली राखीगढ़ी विश्व स्तर पर प्रदेश की पहचान को सुदृढ़ करती है।
इस अवसर पर विधायक श्री दिनेश अदलखा, श्री सतीश फ़ागना, श्री तेजपाल तंवर, श्री मूलचंद शर्मा, श्री रणधीर पणिहार, श्रीमती कृष्णा गहलोत, विरासत एवं पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ अमित अग्रवाल, निदेशक श्री पार्थ गुप्ता, फरीदाबाद के उपायुक्त श्री आयुष सिन्हा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
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