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Friday, January 9, 2026

आईआईएम रोहतक के निदेशक प्रो. धीरज शर्मा को 46वें विश्व प्रबंधन कांग्रेस में ‘उत्कृष्ट शासन नेतृत्व पुरस्कार’ से सम्मानित

आईआईएम रोहतक के निदेशक प्रो. धीरज शर्मा को 46वें विश्व प्रबंधन कांग्रेस में ‘उत्कृष्ट शासन नेतृत्व पुरस्कार’ से सम्मानित
रोहतक / नई दिल्ली : भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रोहतक के निदेशक प्रो. धीरज शर्मा को वर्ल्ड मैनेजमेंट कांग्रेस की पुरस्कार एवं प्रशंसा समिति द्वारा ‘उत्कृष्ट शासन नेतृत्व पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 46वें विश्व प्रबंधन कांग्रेस के दौरान एक गरिमामय समारोह में प्रदान किया गया।

पुरस्कार समारोह में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जो कांग्रेस की वैश्विक प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को दर्शाती है। प्रमुख रूप से उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में अर्जेंटीना के राजदूत महामहिम श्री मारियानो काउचिनो, अंतर-धार्मिक संवाद के वैश्विक विशेषज्ञ एवं कार्मेलाइट्स ऑफ मैरी इमैक्युलेट से जुड़े फादर रोबी कन्ननचिरा, मोंटेनेग्रो की मानद कौंसुल जनरल महामहिम डॉ. जैनिस दरबारी, ग्लोबल पीस फाउंडेशन–इंडिया के अध्यक्ष एवं अरुणाचल प्रदेश स्थित इंदिरा गांधी टेक्नोलॉजिकल एंड मेडिकल साइंसेज़ यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. मार्कंडेय राय, अमेरिका में डेनमार्क के राजदूत जेस्पर मोलर सोरेनसन तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट के संस्थापक अध्यक्ष, कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के अध्यक्ष एवं 46वें विश्व प्रबंधन कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. प्रिया रंजन त्रिवेदी शामिल रहे। इसके अतिरिक्त, देशभर से कई कुलपति, प्रमुख संस्थानों के निदेशक, वरिष्ठ शिक्षाविद्, नीति-निर्माता और विचारक भी समारोह में उपस्थित रहे।

‘उत्कृष्ट शासन नेतृत्व पुरस्कार’ के लिए चयन प्रक्रिया अत्यंत कठोर, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक रही। विश्वभर से 1,400 से अधिक नामांकन प्राप्त हुए, जिनमें से केवल सात व्यक्तियों का चयन किया गया, जो इस सम्मान की विशिष्टता और उच्च मानकों को दर्शाता है।

प्रो. धीरज शर्मा को उनके दूरदर्शी नेतृत्व, उत्कृष्ट शासन पद्धतियों और संस्थान निर्माण की असाधारण क्षमता के लिए सम्मानित किया गया। उनके नेतृत्व में आईआईएम रोहतक ने एसोसिएशन ऑफ एमबीएज़ (AMBA) और बिज़नेस ग्रेजुएट्स एसोसिएशन (BGA) से अंतरराष्ट्रीय मान्यताएँ प्राप्त कीं, जिससे संस्थान की वैश्विक शैक्षणिक गुणवत्ता, शासन और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता और सुदृढ़ हुई।

उनके कार्यकाल की एक प्रमुख उपलब्धि वर्ष 2018 में आईआईएम रोहतक का स्थायी परिसर में सफल स्थानांतरण रहा, जो अनुमानित लागत से कम में पूरा हुआ। यह मजबूत वित्तीय अनुशासन, प्रभावी परियोजना प्रबंधन और पारदर्शी प्रशासन का उदाहरण है। शैक्षणिक स्तर पर, उन्होंने आईआईएम रोहतक में इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (IPM) और इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन लॉ (IPL) जैसे नवोन्मेषी कार्यक्रमों की शुरुआत की, जो सभी आईआईएम में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है।

एक प्रतिष्ठित शोधकर्ता के रूप में, प्रो. शर्मा को वर्ष 2023 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा जारी टॉप 2% शोधकर्ताओं की सूची में स्थान मिला। उन्होंने गृह मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, उपभोक्ता कार्य मंत्रालय तथा वाणिज्य मंत्रालय द्वारा प्रायोजित कई उच्च प्रभाव वाले शोध प्रोजेक्ट्स में प्रमुख अन्वेषक (Principal Investigator) के रूप में कार्य किया है, जिससे नीति-निर्माण और राष्ट्रीय विकास को महत्वपूर्ण योगदान मिला। उनके नेतृत्व में आईआईएम रोहतक छात्र संख्या के आधार पर देश का सबसे बड़ा आईआईएम बना। इसके साथ ही, संस्थान ने खेल प्रबंधन में कार्यकारी स्नातकोत्तर कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसे भारत के माननीय प्रधानमंत्री द्वारा विशेष सराहना प्राप्त हुई।

पुरस्कार स्वीकार करते हुए प्रो. धीरज शर्मा ने उच्च शिक्षा में उत्कृष्ट नेतृत्व पर एक विचारोत्तेजक संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि संस्थागत उत्कृष्टता की शुरुआत स्वायत्तता से होती है, विशेषकर वित्तीय स्वायत्तता से, जिसके बिना नवाचार और सतत गुणवत्ता संभव नहीं है। उन्होंने भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की सरकारी अनुदानों पर अत्यधिक निर्भरता को नवाचार में बाधक बताया।

आईआईएम के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आईआईएम की सफलता का आधार उनकी वित्तीय स्वतंत्रता है, जिससे वे संचालन और पूंजीगत व्यय का उत्तरदायी प्रबंधन कर पाते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा को रोजगारपरक बनाना आईआईएम की नैतिक जिम्मेदारी है, ताकि छात्रों की क्षमताओं को बाजार में पहचान और सम्मान मिल सके।

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का वास्तविक मूल्य डिग्रियों में नहीं, बल्कि मानव क्षमता की बाजार में मान्यता में निहित है। सीखने की प्रक्रिया को उन्होंने बहुआयामी, निरंतर और अनुभव-आधारित बताया, जो औपचारिक शिक्षा से कहीं आगे जाती है। विश्वास, भाषा विकास और संज्ञानात्मक क्षमता जैसे मूलभूत गुण प्रारंभिक जीवन अनुभवों से विकसित होते हैं।

प्रारंभिक बाल शिक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रो. शर्मा ने प्री-स्कूल शिक्षा क्षेत्र में नियमन की कमी और परीक्षा-केंद्रित सफलता तथा बुनियादी सीखने के बीच बढ़ते अंतर की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि बाल शिक्षा के साथ-साथ अभिभावक शिक्षा भी उतनी ही आवश्यक है, क्योंकि वही मूल्यों, व्यवहार, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और आजीवन सीखने की नींव रखती है।

अपने संबोधन के समापन में उन्होंने कहा कि शिक्षा में महान नेतृत्व का उद्देश्य केवल भौतिक अवसंरचना का विकास नहीं, बल्कि मूल्य-आधारित नागरिकों और बेहतर मानव समाज का निर्माण होना चाहिए।

प्रो. धीरज शर्मा को प्रदान किया गया यह सम्मान आईआईएम रोहतक के लिए गौरव का विषय है और राष्ट्रीय व वैश्विक प्रबंधन शिक्षा परिदृश्य में संस्थान की बढ़ती प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करता है।

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