तीन साहित्यिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वाधान में बसंत पंचमी पर काव्य गोष्ठी आयोजित
जींद : अखिल भारतीय साहित्य परिषद जींद इकाई, संस्कार भारती तथा हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था के संयुक्त तत्वाधान में बसंत पंचमी पर्व एवं गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में महाराजा अग्रसेन सदाव्रत अन्न क्षेत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अखिल भारतीय साहित्य परिषद की अध्यक्ष मंजु मानव ने दीप प्रज्ज्वलन एवं मंत्रोच्चारण के साथ किया। उन्होंने कार्यक्रम का कुशल संचालन भी किया।
संस्कार भारती के अध्यक्ष ओम प्रकाश चौहान ने सभी साहित्यकारों का स्वागत करते हुए बसंत पंचमी पर्व के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला तथा देशभक्ति से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत की। हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था की अध्यक्ष शकुंतला काजल ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराजा अग्रसेन सदाव्रत अन्न क्षेत्र के संचालक महेश सिंगला ने की।
काव्य गोष्ठी में डॉ. बलराज स्नेही ने गीत “सरसों की पीली पग बांधे, बसंत देखो चले आते हैं” प्रस्तुत किया। कमलेश गोयत ने देशभक्ति से परिपूर्ण रचना में देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण किया। जगदीश चंद्र पांचाल ने वीर शहीदों के बलिदान को याद करते हुए भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया। दिनेश शर्मा ने “मानव सेवा उत्तम कर्म है” रचना के माध्यम से सेवा भावना का संदेश दिया।
मंजु मानव ने बसंत पर्व की आभा पर प्रकाश डालते हुए शहीदों को समर्पित भावनात्मक रचना प्रस्तुत की। शकुंतला काजल ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जय हिंद नारे पर आधारित रचना सुनाई। सुनीता पांचाल ने दोहों के माध्यम से नेताजी को श्रद्धांजलि अर्पित की। आज़ाद जुलानी और जयदेव अत्री ने भी अपने-अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को भावविभोर किया।
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष महेश सिंगला ने वीर बालक हकीकत राय के बलिदान को स्मरण करते हुए काव्य प्रस्तुति दी और आयोजन की सराहना की। सुभाष ढिंगाना और दीपिका ने मां सरस्वती को समर्पित भाव प्रस्तुत किए। अंत में सभी उपस्थित साहित्यकारों और अतिथियों ने मिष्ठान ग्रहण कर एक-दूसरे को बसंत पंचमी की शुभकामनाएं दीं।
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