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Saturday, February 28, 2026

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर 2022, 2023 और 2024 के लिए चयनित 11 प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों को ‘हरियाणा विज्ञान रत्न’ और ‘हरियाणा युवा विज्ञान रत्न’ पुरस्कारों से किया सम्मानित

प्रयोगशाला से भूमि’ तक नवाचार पहुंचाना है समय की मांग-राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर 2022, 2023 और 2024 के लिए चयनित 11 प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों को ‘हरियाणा विज्ञान रत्न’ और ‘हरियाणा युवा विज्ञान रत्न’ पुरस्कारों से किया सम्मानित
चंडीगढ़- राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आज राज भवन हरियाणा में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष ने वर्ष 2022, 2023 और 2024 के लिए चयनित 11 प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों को ‘हरियाणा विज्ञान रत्न’ और ‘हरियाणा युवा विज्ञान रत्न’ पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि यह केवल सम्मान समारोह नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार और विज्ञान की परिवर्तनकारी शक्ति में हमारे सामूहिक विश्वास का यादगार क्षण है।

राज्यपाल ने सभी सम्मानित वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां न केवल हरियाणा बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1966 में गठन के बाद से हरियाणा ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हरित क्रांति के दौर में राज्य ने वैज्ञानिक कृषि, नवाचार और दृढ़ संकल्प के बल पर देश को खाद्य आत्मनिर्भरता दिलाने में अग्रणी भूमिका निभाई। यही विरासत आज भी हमें प्रेरित करती है।

उन्होंने कहा कि 21वीं सदी नई और जटिल चुनौतियां लेकर आई है। सतत कृषि, जैव प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता हमारी विकास रणनीति का आधार बननी चाहिए। हमारा लक्ष्य सतत, समावेशी और प्रौद्योगिकी संचालित विकास सुनिश्चित करना है।

राज्यपाल श्री घोष ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी को प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शासन व्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन में प्रत्यक्ष सुधार लाना चाहिए। अनुसंधान का वास्तविक माप उसके सामाजिक प्रभाव में निहित है। ‘प्रयोगशाला से भूमि’ और ‘प्रयोगशाला से बाजार’ के बीच की दूरी को कम करना आज की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि कि हरियाणा राज्य अनुसंधान कोष के माध्यम से छात्रों और शिक्षकों में वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ‘अटल टिंकरिंग लैब्स’ और ‘डिजिटल लैब्स’ के जरिए विद्यालयों के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। अंबाला में बन रहा ‘आर्यभट्ट विज्ञान केंद्र’ तथा कुरुक्षेत्र में कल्पना चावला मेमोरियल प्लैनेटेरियम का आधुनिकीकरण वैज्ञानिक चेतना को सुदृढ़ करेगा।

‘कल्पना चावला छात्रवृत्ति योजना’ के तहत अभियांत्रिकी विषयों में छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये तक की 250 छात्रवृत्तियां दी जाएंगी, जबकि ‘विज्ञान रत्न पुरस्कार’ के तहत 5 लाख रुपये तक की राशि प्रदान की जाती है।

राज्यपाल ने बताया कि 1983 में स्थापित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी निदेशालय राज्य में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा है। यह निदेशालय वरिष्ठ माध्यमिक स्तर से लेकर उन्नत अनुसंधान तक छात्रवृत्तियां प्रदान करता है तथा सामाजिक-आर्थिक अनुसंधान परियोजनाओं को 50 लाख रुपये तक के अनुदान से सहयोग देता है।

*प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत बनाए जाने के सपने को साकार करने में वैज्ञानिकों को रहेगा विशेष योगदान-शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा*

इस अवसर पर हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाना है। इस विजन को साकार करने में हमारे वैज्ञानिकों का भी विशेष योगदान रहेगा। भारतीय विज्ञान परंपरा विश्व की प्राचीनतम वैज्ञानिक परंपराओं में से एक रही है। प्राचीन काल में चिकित्सा विज्ञान में चरक और सुश्रुत, खगोल और गणित में आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त, रसायन विज्ञान में नागार्जुन ने अतुलनीय योगदान दिया।

उन्होंने कहा कि प्राचीन खोजें आधुनिक विज्ञान की नींव रही हैं। भारतीय विद्वानों ने खगोल, गणित, चिकित्सा, रसायन, वास्तुकला और यंत्र विज्ञान में ऐसे सिद्धांत स्थापित किए, जिनका प्रभाव भारत ही नहीं, बल्कि अरब और यूरोप तक फैला। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने विज्ञान और स्वास्थ्य क्षेत्र में अद्वितीय उपलब्धियां दर्ज कीं। तेज़ी से परीक्षण और उपचार प्रोटोकॉल विकसित किए गए और कोवैक्सिन तथा कोविशील्ड जैसे सुरक्षित एवं प्रभावी टीकों का विकास हुआ। इन प्रयासों ने न केवल भारतवासियों की रक्षा की, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय में भारत की नेतृत्व क्षमता को भी उजागर किया।

उन्होंने कहा कि भारत ने हाल ही में India AI Impact Summit 2026 में वैश्विक मंच पर अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की। 100+ देशों के विशेषज्ञों ने भाग लिया और वैश्विक एआई दिशा निर्देश पर साझा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। यह सम्मेलन भारत को एआई नवाचार और वैश्विक सहयोग का प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करता है।

इस अवसर पर राज्यपाल की धर्मपत्नी श्रीमती मित्रा घोष, उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विनीत गर्ग, राज्यपाल के सचिव श्री डीके बेहरा, विज्ञान एवं तकनीकी के निदेशक श्री राजीव रतन व अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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