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Friday, February 27, 2026

प्रदेश में प्रत्येक मानसून सत्र से पूर्व नदियों की वार्षिक डी-सिल्टिंग की कोई निर्धारित परंपरा नहीं है : श्रुति चौधरी

प्रदेश में प्रत्येक मानसून सत्र से पूर्व नदियों की वार्षिक डी-सिल्टिंग की कोई निर्धारित परंपरा नहीं है : श्रुति चौधरी 
चंडीगढ़- हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रीमती श्रुति चौधरी ने विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया कि प्रदेश में प्रत्येक मानसून सत्र से पूर्व नदियों की वार्षिक डी-सिल्टिंग की कोई निर्धारित परंपरा नहीं है।

उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में लगातार भारी वर्षा और बाढ़ की स्थिति के कारण नदियों में बड़े पैमाने पर गाद जमा हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए टांगरी और मारकंडा नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ाने तथा बाढ़ के खतरे को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2025 के दौरान विशेष विकासात्मक गतिविधि के रूप में डी-सिल्टिंग का कार्य किया गया। 30 जून 2025 से पहले टांगरी नदी से लगभग 5.50 लाख घन मीटर तथा मारकंडा नदी से लगभग 37,500 घन मीटर मिट्टी निकाली गई।

इसके अतिरिक्त, मानसून 2026 से पूर्व टांगरी, मारकंडा और बेगना नदियों से क्रमशः लगभग 53.85 लाख घन मीटर, 10.94 लाख घन मीटर और 0.60 लाख घन मीटर गाद निकालने का प्रस्ताव है। इन कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।

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