02 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन कार्य
- मूल्यांकन की शुचिता बनी रहे इसको लेकर शिक्षा बोर्ड ने कसी कमर
- मूल्यांकन में बच्चों के भविष्य के साथ कतई खिलवाड़ नहीं होगा-बोर्ड अध्यक्ष
भिवानी : हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ० पवन कुमार ने बताया कि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की सैकण्डरी(शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) फरवरी/मार्च-2026 परीक्षाएं समापन की ओर है। सैकेण्डरी कक्षा की परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य 02 अप्रैल से आरंभ हो रहा है। शिक्षा बोर्ड द्वारा उत्तरपुस्तिकाओं के अंकन का कार्य 22 जिलों में करवाया जा रहा है। प्रदेशभर में सैकेण्डरी की परीक्षा के लिए 75 मूल्यांकन केन्द्र बनाए हैं। सैकेण्डरी कक्षा के अंकन कार्य हेतु लगभग 6969 अध्यापक नियुक्त किए गए हैं तथा मूल्यांकन का कार्य 24 अप्रैल तक करवाया जाएगा।
उन्होंने आगे बताया कि सीनियर सैकेण्डरी (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) फरवरी/मार्च-2026 परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य 03 अप्रैल से आरंभ होकर 28 अप्रैल तक करवाया जाएगा। प्रदेशभर में सीनियर सैकेण्डरी की परीक्षा के लिए 52 मूल्यांकन केन्द्र बनाए हैं। सीनियर सैकेण्डरी की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य के लिए लगभग 5009 प्राध्यापक नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि सीनियर सैकेण्डरी(शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) फरवरी/मार्च-2026 की परीक्षा का परिणाम मई के दूसरे सप्ताह तक घोषित कर दिया जाएगा। इसके बाद सैकेण्डरी की परीक्षा का परिणाम घोषित किया जाएगा। बता दें कि बोर्ड की परीक्षाएं 25 फरवरी से आरंभ हुई थी। सीनियर सैकेण्डरी की परीक्षाएं 25 फरवरी से शुरू हुई थी और ये परीक्षाएं 01 मार्च को संपन्न होने जा रही है तथा सैकेण्डरी की परीक्षाएं 26 फरवरी को शुरू होकर 20 मार्च को समाप्त हो चूकी है। इसके अतिरिक्त डीएलएड की परीक्षाओं के लिए भी 04 मूल्यांकन केन्द्र बनाए गए है।
उन्होंने बताया कि प्रथम दिन एक उप-परीक्षक/एकल-परीक्षक द्वारा 15 उत्तरपुस्तिकाएं जांच की जानी है। इसके पश्चात प्रतिदिन 30 उत्तरपुस्तिकाओं की जांच की जानी है। उप-परीक्षकों द्वारा जांच की गई कुल उत्तरपुस्तिकाओं में से रैण्डमली आधार पर 10 प्रतिशत उत्तरपुस्तिकाओं की जांच मुख्य परीक्षक द्वारा की जानी हैं। उन्होंने परीक्षकों को निर्देश देते हुए कहा कि उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण हो, मूल्यांकन में बच्चों के भविष्य के साथ कतई खिलवाड़ न हो। मूल्यांकन की शुचिता बनी रहे इसको लेकर शिक्षा विभाग व बोर्ड ने कमर कस रखी है। इस दिशा में उठाए गए ये कदम मूल्यांकन प्रणाली को और सुदृढ़ बनायेंगे।
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