Breaking

Tuesday, March 17, 2026

हरियाणा राज्यसभा चुनाव में चौंकाने वाला उलटफेर, मामूली अंतर से तय हुई बाजी

हरियाणा राज्यसभा चुनाव में चौंकाने वाला उलटफेर, मामूली अंतर से तय हुई बाजी
चंडीगढ़ : हरियाणा में हुए राज्यसभा चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और हाई-वोल्टेज ड्रामे से भरपूर रहे। आंकड़ों का खेल, क्रॉस वोटिंग, रद्द हुए वोट और निर्दलीय उम्मीदवार की रणनीति के फेल होने ने इस चुनाव को खास बना दिया। नतीजों ने साफ कर दिया कि राजनीति में एक-एक वोट कितना अहम होता है और छोटी सी चूक भी पूरा खेल पलट सकती है।
इस चुनाव में कुल 90 विधायकों को मतदान करना था, लेकिन मतदान के दिन इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के दो विधायकों ने वोट नहीं डाला। इससे कुल मतदान 88 वोटों तक सीमित रह गया। जब मतगणना हुई तो 5 वोट रद्द पाए गए, जिनमें कांग्रेस के 4 और भाजपा का 1 वोट शामिल था। इसके बाद कुल 83 वोट ही वैध माने गए।
राज्यसभा चुनाव में जीत का फार्मूला सामान्य चुनावों से अलग होता है। इसमें कुल वैध वोटों को सीटों की संख्या में एक जोड़कर भाग दिया जाता है और फिर उसमें एक जोड़ा जाता है। इस बार 83 वैध वोट और 2 सीटें थीं। ऐसे में जीत का कोटा लगभग 27.66 वोट बन गया।
भाजपा के पास कुल 48 विधायक थे, लेकिन एक वोट रद्द होने के कारण उनके 47 वोट ही वैध रहे। पहली प्राथमिकता के आधार पर भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया को 39 वोट मिले, जिससे उन्होंने जीत का कोटा पार कर लिया। वहीं भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को 8 वोट मिले। दूसरी तरफ कांग्रेस के पास 37 विधायक थे, लेकिन 4 वोट रद्द हो गए और 5 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी। इसके बावजूद कांग्रेस के पास 28 वैध वोट बचे, जो जीत के कोटा 27.66 से थोड़ा अधिक थे। इसी आधार पर कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध ने जीत दर्ज कर ली।
निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को कुल 16 पहली प्राथमिकता के वोट मिले थे। इनमें भाजपा के 8, कांग्रेस के 5 और 3 निर्दलीय विधायकों के वोट शामिल थे। हालांकि भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया ने पहले ही जीत का कोटा पार कर लिया था। उनके अतिरिक्त बचे वोटों का एक हिस्सा दूसरी प्राथमिकता के आधार पर ट्रांसफर होकर नांदल को मिला। इसके बाद नांदल का कुल वोट वैल्यू 27.34 तक पहुंच गया। लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध के पास 28 वोट थे, जो नांदल से 0.66 वोट ज्यादा थे। यह अंतर बेहद छोटा था, लेकिन इसी मामूली अंतर ने नतीजा तय कर दिया।
इस चुनाव में INLD के दो विधायकों का मतदान से दूर रहना भी बड़ा फैक्टर रहा। अगर दोनों विधायक वोट डालते और वे नांदल के पक्ष में जाते, तो चुनाव का परिणाम पूरी तरह बदल सकता था। भाजपा का एक वोट रद्द होना भी अहम साबित हुआ। अगर यह वोट वैध होता, तो सतीश नांदल के पक्ष में वोट वैल्यू बढ़ सकती थी और परिणाम अलग हो सकता था। कांग्रेस को चार वोट रद्द होने और पांच विधायकों की क्रॉस वोटिंग के बावजूद जीत मिली। यह इस बात का उदाहरण है कि चुनावी गणित और परिस्थितियां कई बार अप्रत्याशित परिणाम भी दे देती हैं।
कांग्रेस विधायक भरत सिंह बेनीवाल के वोट को लेकर भी विवाद हुआ था। शिकायत के बाद जांच की गई, लेकिन उनका वोट वैध पाया गया। यदि यह वोट रद्द हो जाता तो कांग्रेस के लिए स्थिति मुश्किल हो सकती थी।

No comments:

Post a Comment