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Wednesday, March 18, 2026

एमडीयू के सेंटर फॉर मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी में विशेषज्ञ व्याख्यान, तनाव की निरंतर निगरानी पर नई तकनीक पर चर्चा

एमडीयू के सेंटर फॉर मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी में विशेषज्ञ व्याख्यान, तनाव की निरंतर निगरानी पर नई तकनीक पर चर्चा
रोहतक : महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी में फ्रॉम सिलेक्शन टू सेंसिंग: वन-स्टेप ऑप्टमेर सिलेक्शन एंड कंटीन्यूअस स्ट्रेस मॉनिटरिंग विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली के जैव चिकित्सा अभियांत्रिकी केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार सिंह ने बतौर मुख्य वक्ता इस कार्यक्रम में शिरकत की।

अपने व्याख्यान में डॉ. नवीन कुमार सिंह ने एक चरणीय एप्टामर चयन की अभिनव विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह विधि पारंपरिक चयन पद्धतियों की सीमाओं को दूर करते हुए कम समय में अधिक सटीक और विशिष्ट जाँच अणुओं के विकास को संभव बनाती है। उन्होंने कहा कि इन एप्टामरों का उपयोग पहनने योग्य जैव संवेदक उपकरणों के माध्यम से कॉर्टिसोल जैसे जैव संकेतकों का त्वरित पता लगाकर व्यक्ति के तनाव स्तर की निरंतर निगरानी में किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि नैनो प्रौद्योगिकी और सूक्ष्म द्रविकी तकनीक के समन्वय से संवेदकों की संवेदनशीलता, सटीकता तथा त्वरित विश्लेषण क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। व्याख्यान में यह भी उल्लेख किया गया कि एप्टामर आधारित जैव संवेदक व्यक्तिगत उपचार पद्धति, मानसिक स्वास्थ्य निगरानी तथा बिना चीरा लगाए होने वाली जाँच प्रणालियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सीएमबीटी निदेशक डॉ. हरि मोहन ने प्रारंभ में स्वागत भाषण देते हुए कहा कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने के लिए आणविक जैव प्रौद्योगिकी तथा उन्नत संवेदन तकनीकों का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। ऐसे प्रयास भविष्य की स्वास्थ्य प्रणालियों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. अमिता एस. डंग, डॉ. अनिल कुमार तथा डॉ. रश्मि भारद्वाज का विशेष सहयोग रहा।

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