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Sunday, May 24, 2026

प्रदेश का औसतन लिंगानुपात रहा 898, जिले का रहा 872

प्रदेश का औसतन लिंगानुपात रहा 898, जिले का रहा 872
चंडीगढ़ : अप्रैल 2026 में जहां प्रदेश का लिंगानुपात 898 रहा, वहीं जिले का लिंगानुपात 872 रहा। जिले में छह गांव ऐसे हैं, जहां अप्रैल महीने में एक भी लड़की ने जन्म नहीं लिया। 147 गांवों का लिंगानुपात 900 से कम आने पर उन प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को नोटिस जारी किए हैं, जिनके अंतर्गत यह गांव आते हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों से इस बारे में जवाब मांगा गया है। 
लिंगानुपात के मामले में जींद जिला 2022 से लेकर 2023 तक पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा था। 2023 में जिले का लिंगानुपात 986 था, जो हरियाणा के 916 औसतन अनुपात से बहुत ज्यादा था। इसके बाद जिले में लिंगानुपात कम होता गया। अप्रैल 2026 में जिले का लिंगानुपात कम होकर 872 तक आ गया। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। जिले के सभी ऐसे लोगों जो विवाह करवाते हैं, उनको पत्र लिखकर वर-वधु को कन्या भ्रूणहत्या रोकने व लिंग जांच नहीं करवाने की शपथ दिलाने को कहा है। इसके अलावा सभी सरपंचों को भी गांव में नजर बनाए रखने व सभी गर्भवती महिलाओं का रिकार्ड रखने के निर्देश दिए हैं।  
जिले में 306 गांव हैं। इनमें से 147 गांव ऐसे हैं, जिनका लिंगानुपात 900 से कम है। ऐसे में इन सभी गांवों के सरपंचों को नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अलावा जिन सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के तहत यह गांव आते हैं, उनके सीनियर मेडिकल आफिसर को भी नोटिस जारी किए गए हैं। इस पत्र में साफ कहा गया है कि जनवरी से अप्रैल तक आपके अधीन आने वाले गांवों का लिंगानुपात 900 से कम है। नोटिस में लिंगानुपात कम होने का कारण बताने, एएनएम व आशा वर्कर से इसका जवाब लेकर टिप्पणी सहित सिविल सर्जन कार्यालय को भिजवाया जाए। इसके अलावा इन गांवों में लिंगानुपात सुधार के लिए लोगों को जागरूक करें। इसके तहत मीटिंग व अन्य गतिविधियां करवाई जा सकती हैं।
छह गांवों में एक भी लड़की ने नहीं लिया जन्म
जिले के रामपुरा, कारखाना, रामराय खेड़ा, खेड़ी जाजवान, तेली खेड़ा व रजाना खुर्द में अप्रैल महीने में एक भी लड़की ने जन्म नहीं लिया। इन छह गांवों में रामपुरा में चार, कारखाना में एक, रामराय खेड़ा में एक, खेड़ी जाजवान में एक, तेली खेड़ा में दो व रजाना खुर्द में एक लड़के ने जन्म लिया है। यह गांव मुआना, खरकरामजी, अलेवा व कालवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत आते हैं। ऐसे में इन स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों को विशेष रूप से इस पर अधिक ध्यान देने को कहा गया है।
35 गांव ऐसे जिनका 500 से भी कम लिंगानुपात
जिले के 35 गांव ऐसे हैं, जिनका लिंगानुपात 500 से भी कम है। इससे साफ है कि इन गांवों में लड़कियों के मुकाबले जन्म लेने वाले लड़कों की संख्या दोगुने से भी ज्यादा रही। इनमें बागडू खुर्द गांव में नौ लड़कों पर एक लड़की ने जन्म लिया। ईंटल खुर्द में सात पर एक, कर्मगढ़ में चार पर एक, पालवां व सिवाहा में 11 लड़कों पर तीन लड़कियों ने जन्म लिया है। ऐसे में 35 गांव हैं, जहां पर लड़कों की संख्या लड़कियों के दोगुने से भी ज्यादा रही है।

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