1008 कुंडीय जनकल्याण शिव शक्ति महायज्ञ में 11 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने दी आहुति, पर्यावरण संरक्षण और मानव जीवन रक्षा का दिया संदेश
जींद : 1008 कुंडीय जनकल्याण शिव शक्ति महायज्ञ में आज जींद जिले की 25 से अधिक शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थियों, आचार्यों, शिक्षकों एवं अभिभावकों सहित बड़ी संख्या में भाई-बहनों ने श्रद्धापूर्वक भाग लेकर यज्ञ में आहुति अर्पित की। महायज्ञ के माध्यम से मानव जीवन की रक्षा, पर्यावरण संरक्षण, भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं के संरक्षण का संदेश समाज और विश्व तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थाओं से आए 11 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने यज्ञ में आहुति देकर जनकल्याण की भावना को मजबूत किया।
यह भव्य आयोजन यज्ञ सम्राट श्री श्री 1008 श्री हरि ओम जी महाराज के पावन सानिध्य में तथा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मानव जीवन रक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में विद्यार्थियों की सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। अलग-अलग शिक्षण संस्थाओं से विद्यार्थी अनुशासनबद्ध तरीके से महायज्ञ स्थल पर पहुंचे और आचार्यों के मार्गदर्शन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ में आहुति प्रदान की।
महायज्ञ में वुडस्टॉक पब्लिक स्कूल जींद, एम.वी.एम. विद्यालय बारा खुर्द, एम.एस.एम. विद्यालय बारा खुर्द, नव विद्या विद्यालय पटियाला चौक जींद, शारदा विद्या मंदिर पटियाला चौक जींद, गोपाल विद्या मंदिर रोहतक रोड जींद, गुरुकुल विद्यापीठ गोहाना रोड जींद, विनय बाल मंदिर विद्यालय, सोनी क्लासेस, हिंदू विद्यालय विद्या मंदिर, सनातन धर्म विद्या मंदिर सफीदों सहित विभिन्न विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थाओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। संस्थाओं के आचार्यों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने इसे केवल धार्मिक आयोजन न मानते हुए सामाजिक एवं पर्यावरणीय जागरूकता का महत्वपूर्ण अभियान बताया।
वुडस्टॉक पब्लिक स्कूल के निदेशक श्री आशुतोष शर्मा ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थाओं का एक साथ महायज्ञ में शामिल होना समाज के लिए सकारात्मक संदेश है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी संस्कृति, संस्कार, परंपराओं और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भी बोध कराया जाए। यज्ञ भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपरा है और इसके माध्यम से हम आने वाली पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन रक्षा और पर्यावरण संरक्षण आज केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जींद से इतने बड़े स्तर पर विद्यार्थियों की सहभागिता के माध्यम से पूरे देश और विश्व को यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि पर्यावरण की रक्षा, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और मानव कल्याण के लिए समाज को मिलकर कार्य करना होगा।
महायज्ञ में विद्यार्थियों ने पूरे श्रद्धाभाव एवं अनुशासन के साथ सहभागिता की। आयोजन ने शिक्षा जगत, सामाजिक संस्थाओं और आमजन को एक मंच पर जोड़ते हुए “जनकल्याण, पर्यावरण संरक्षण और संस्कारयुक्त शिक्षा” के संदेश को मजबूत किया। आयोजकों ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को प्रकृति, संस्कृति और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाना ही इस प्रकार के आयोजनों का मूल उद्देश्य है।
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