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Monday, September 21, 2020

रोष:109 रूटों पर 151 ट्रेनों के संचालन को प्राइवेट पार्टनर को देने की योजना के विरोध में उतरे रेलवे कर्मचारी

रोष:109 रूटों पर 151 ट्रेनों के संचालन को प्राइवेट पार्टनर को देने की योजना के विरोध में उतरे रेलवे कर्मचारी

सिरसा:  भारतीय रेलवे के निजीकरण के खिलाफ नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे  एम्पलाइज यूनियन शाखा सिरसा ने मुखर होकर विचार गोष्ठी की। गोष्ठी में शाखा सचिव प्रेम सैनी ने कहा कि रेलवे में 95 फीसदी गरीब मजदूर सफर करते हैं, जबकि सिर्फ पांच फीसदी ही अमीर तबका सफर करता है, लेकिन केंद्र सरकार की चिंता सिर्फ पांच फीसदी अमीरों को लेकर है, वो गरीबों के हालात से पूरी तरह बेखबर है।

शाखा सचिव ने सवाल उठाया कि जब हर तरह की ट्रेनों का संचालन करने में रेल कर्मचारी सक्षम है तो फिर प्राईवेट पार्टनर को बुलाने की आखिर जरूरत क्या है? गोष्ठी में जिला के नगर पार्षदों के अलावा विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक एवं कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मंच का संचालन यूनियन के उपाध्यक्ष उमेश कुमार वर्मा ने किया। गोष्ठी के अध्यक्ष ओपी बिश्नोई थे। कार्यक्रम के दौरान ही 19 सितंबर 1968 में शहीद हुए पठानकोट स्टेशन पर रेलवे कर्मचारियों को 2 मिनट का मौन देकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

शाखा सचिव प्रेम सैनी ने कहा कि रेल मंत्रालय जिस तरह 109 रुट पर 151 ट्रेनों का संचालन प्राईवेट पार्टनर को देने की योजना पर विचार कर रहा है, उससे सरकार की विचारधारा सामने आ गई है। सब जानते हैं कि भारतीय रेल आज भी सिर्फ देश में ही नहीं दुनिया में गरीब लोगों को सबसे सस्ती यातायात सेवा देने वाली ट्रेन है। इन ट्रेनों में 95 फीसदी मजदूर, किसान, व्यापारी वर्ग, छात्र सफर करते हैं जबकि सिर्फ पांच फीसदी ही अमीर यात्री होता है। इसके बाद भी सरकार की चिंता महज पांच फीसदी यात्रियों को लेकर है।

यूनियन नेता उमेश वर्मा ने कहा कि रेल को बचाने के लिए यूनियन पहले की तरह ही अडिग है और किसी भी कुर्बानी को तैयार है। उन्होंने कहा कि यूनियन किसी भी प्रकार से सरकार के षड्यंत्रों को कामयाब नहीं होने देगी और जो भी कुर्बानी देनी पड़े देगी। उन्होंने कहा कि अगर भारतीय रेल का निजीकरण होता है तो इससे रेलकर्मियों से कहीं ज्यादा असर रेल उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। कार्यक्रम में पार्षद गोपीराम, श्याम सुंदर सैनी, लक्ष्मी प्रजापत, पम्मी, ओपी बिश्नोई, अध्यापक नेता गुरदीप सैनी ने भी भारत सरकार की निजीकरण की नीति की घोर आलोचना की।

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