/>

Breaking

Monday, May 3, 2021

एक कोर्ट में 4 केसों में फर्जी दस्तावेजों पर 4 को जमानत दिला ले गई निशा

एक कोर्ट में 4 केसों में फर्जी दस्तावेजों पर 4 को जमानत दिला ले गई निशा

अम्बाला : नाम-निशा आर्य। पता-यमुनानगर जिले के फर्कपुर का पृथ्वी नगर। व्यवसाय-फर्जी जमानती। ये बायोडाटा भले अटपटा लगे लेकिन अम्बाला की अदालतों में सुर्खियों में आ गया है। वजह निशा का कारनामा। उसने चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट  अंबरदीप सिंह की कोर्ट में 4 मामलों में फर्जी दस्तावेजों पर जमानती बनकर 4 आरोपियों को जमानत दिलाई।

उसने झपटमार, धोखाधड़ी के आरोपी व महामारी एक्ट में फंसे नेपाल के तबलीगी जमाती की जमानत कराई। अक्टूबर 2020 में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विनोद कुमार ने फर्जी दस्तावेजों पर जमानत कराने का मामला पकड़ा था। तब नकली नोट के साथ पकड़े आरोपी की जमानत के लिए जमीन की फर्जी जमाबंदी व आधार कार्ड लगाया गया था।

रेलवे वर्कशॉप के मोहम्मद सलीम ने खुद को मोहन कुमार बताकर जमानत दी थी। मामले में भी निशा आर्य की भूमिका सामने आई थी। वहीं से जांच शुरू हुई और 4 मामलों में फर्जी दस्तावेजों पर जमानत दिए जाने की बात सामने आई। पुलिस ने निशा आर्य के साथ उसके भाई शुभम, नंदा कॉलोनी की रेनू बाला व फर्कपुर की महिला सिमरन पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।

फर्कपुर में पृथ्वी नगर व नंदा कॉलोनी आमने-सामने हैं। संभावना है कि निशा ने गैंग बना रखा है। सिमरन भी 1 मामले में फर्जी जमानती बन चुकी है। उसने महाराष्ट्र के ठाणे निवासी जितेंद्र मग्गन राठौड़ उर्फ रमेश महेश अग्रवाल उर्फ अजय पंकज शर्मा उर्फ संजय श्याम नरैण को धोखाधड़ी केस में जमानत दिलाई।

इन केसों में दिए फर्जी दस्तावेज

1. महेशनगर थाने में वर्ष 2019 में दर्ज झपटमारी के मामले में कैंट की अमरपुरी कॉलोनी के शुभम को जमानत दिलवाई। जमानती निशा आर्य की तरफ से कोर्ट में फर्जी दस्तावेज दिए गए। 2. यही दस्तावेज सिटी थाने में 6 जुलाई 2019 को दर्ज धोखाधड़ी केस के आरोपी लुधियाना के सुनील डेनिस की जमानत में दिए थे। जमीन से संबंधित दस्तावेज पटवारी व तहसीलदार ने फर्जी बताए। 3. कैंट थाने में 4 फरवरी 2020 को दर्ज धोखाधड़ी केस में यूपी के सुलतानपुर निवासी आरोपी अविनाश उर्फ अर्पित ढींगरा की जमानत के लिए जेएमआईसी नीलम कुमारी की कोर्ट में फर्जी दस्तावेज लगाए। 4. महेश नगर पुलिस द्वारा फॉरेनर्स एक्ट व आपदा अधिनियम में गिरफ्तार किए गए नेपाल के तबलीगी जमाती मोहम्मद गनी मियां तेली की जमानत भी फर्जी दस्तावेजों पर कराई गई। 24 जून 2020 को आरोपी की जमानत के लिए जेएमआईसी नीलम कुमारी की कोर्ट में रेनू बाला ने जो दस्तावेज लगाए थे, वो फर्जी मिले। जाली दस्तावेज तैयार करने में निशा आर्य, उसके भाई शुभम व सिमरन की भी संलिप्तता मिली।

*निशा के घर से फर्जी मुहरें मिली थी*

3 सितंबर 2020 को 26 हजार के नकली नोट के साथ पकड़े कमल विहार के अजीत सिंह उर्फ सोनू की 9 अक्टूबर को एडिशनल सेशन जज कमल कांत शर्मा ने 6 दिन की अंतरिम जमानत मंजूर की थी। अंतरिम जमानत के लिए 80 हजार रुपए का श्योरिटी बांड देने आए व्यक्ति ने मजिस्ट्रेट विनोद कुमार के सामने अपनी पहचान मोहन कुमार के तौर पर बताई। आधार कार्ड, साल 2014-15 की जमाबंदी, 25 सितंबर 2020 का प्रॉपर्टी वेल्युएशन डॉक्यूमेंट व शपथ पत्र दिया था। व्यक्ति की शिनाख्त आरोपी अजीत कुमार की पत्नी रणबीर कौर ने की थी। कोर्ट को दस्तावेजों पर शक हो गया।

जांच में पाया कि फर्कपुर की जमाबंदी के दस्तावेज में कुल भूमि का उल्लेख नहीं किया था। जगाधरी के तहसीलदार को छोटू राम ने जमाबंदी फर्जी होने की रिपोर्ट दी। पकड़े जाने पर मोहन कुमार ने बताया कि वो तो रेलवे वर्कशाप का मोहम्मद सलीम है। सलीम निशा आर्य के ही संपर्क में था। निशा भी गिरफ्तार हुई और उसके घर से दस्तावेजों पर उपयोग की गई मुहरें बरामद की थी। निशा बैंक फर्जीवाड़े में भी फंसी थी। पति मेघराज रेलवे वर्कशॉप में नौकरी करता है।

No comments:

Post a Comment