देवभूमि बनभौरी माता भ्रामरी धाम पर देश, विदेश से पहुंचेंगे श्रद्धालु
जींद : सोमवार से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो रहे है। नौ साल के बाद ऐसा संयोग दोबारा से बन रहा है जब 10 दिन मां दुर्गा की आराधना भक्त करेंगे। इस बार तृतीय तिथि की वृद्धि होने से माता की आराधना एक दिन ज्यादा होने से नवरात्र 10 दिन के होंगे। देवभूमि बनभौरी स्थित माता भ्रामरी धाम में नवरात्र को लेकर मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। नवरात्र में प्रदेश के साथ-साथ देश, विदेश तक से श्रद्धालु मनोकामना पूर्ति के लिए माता की पूजा-अर्चना करने पहुंचेंगे। 2016 में भी द्वितीय तिथि की वृद्धि होने के कारण ऐसे ही संयोग बना था। तब नवरात्र एक अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक मनाए गए थेे। 1 अक्टूबर से रामलीला शुरू हुई थी। प्रतिपदा तिथि दो दिन थी और 11 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई गई। इस वर्ष तृतीय तिथि दो दिन रहने से नवरात्र 10 दिन रहेंगे। दशहरा 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
माता भ्रामरी धाम पुजारी सुरेश कौशिक ने बताया कि नवरात्र की सभी तैयारी पूरी कर ली गई है। श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो इसको लेकर पूरे पुख्ता प्रबंध किए गए है। नवरात्र में प्रदेश, देश एवं विदेश तक से श्रद्धालु अपनी कुलदेवी की पूजा-अर्चना करने आते है। श्रद्धालुओं छठ के दिन महत्व अधिक पूजा का मानते है लेकिन हर दिन नवरात्र में महत्व होता है इसलिए विशेष दिन तय करने की बजाए माता की पूजा-अर्चना पूरे नवरात्र में कभी भी करें।
घट स्थापना मुहूर्त
22 सितंबर: सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 8:11 बजे तक, मध्याह् 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट। शुभ का चौघडिय़ा दिन में 9 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 49 मिनट तक। इस शुभ समय में कलश स्थापना करने से मांग दुर्गा की कृपा और सुख-शांति का विशेष अनुभव माना गया है। नौ दिनों की साधना के अंत में दशमी यानी विजयादशमी का पर्व मनाते है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह सामरिक और धार्मिक रूप से अत्यंत पूजनीय समय होता है जिसे भव्य उत्सव और पूजन के साथ मनाते है। शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। साल में चार बार नवरात्र आते है। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्र प्रमुख माना गया है, जबकि दो गुप्त नवरात्र होते है।
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