महाराजा सूरजमल ने "भारत को एक राष्ट्र" के रूप में देखा : डॉ मलिक
महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित
पंचकुला - हरियाणा पुलिस के सेवानिवृत महानिदेशक तथा जाट सभा पंचकुला /चंडीगढ़ के प्रधान डॉ महेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि महाराजा सूरजमल अपने समय के एक महान योद्धा, एक महान राजनयिक और एक महान राजनेता थे। उन्होंने "भारत को एक राष्ट्र" के रूप में देखा। उनमें राजनीतिक समझ, स्थिर बुद्धि और स्पष्ट दृष्टि थी।
डॉ मलिक आज यहां सेक्टर 6 स्थित चौधरी छोटूराम भवन में महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस अवसर पर हवन एवं यज्ञ भी किया गया।
डॉ महेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि वे किसी एक कौम या क्षेत्र के राजा नहीं थे बल्कि
उन्होंने हिंदू , सिख और मुस्लिम समाज के विभिन्न गुटों को एकजुट किया और उन्हें एक साथ बनाए रखा। उन्होंने अन्य धर्मों के राजाओं द्वारा निर्मित ऐतिहासिक स्मारकों की देखभाल की और लोगों को उनकी योग्यता के अनुसार, उनकी जाति की परवाह किए बिना, उच्च पदों पर नियुक्त किया। महाराजा सूरजमल का मानना था कि मानवता ही मनुष्य का एकमात्र धर्म है।
उन्होंने "भारत को एक राष्ट्र" के रूप में देखा और अपना जीवन राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में समर्पित कर दिया। महाराजा सूरजमल किसानों को समाज का सबसे महत्वपूर्ण वर्ग मानते थे और उनका बहुत सम्मान करते थे। उन्होंने स्वयं किसानों की समस्याओं की पहचान की और उन्हें दूर करने के लिए सुधार लागू किए।
इस अवसर पर विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि महाराजा सूरजमल ने मुगलों और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए समाज को संगठित किया। उन्होंने अपने जीवनकाल में 80 युद्द लड़े लेकिन कभी पराजित नहीं हुए। उन्होंने देश की स्वतंत्रता व स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि महाराजा सूरजमल ने अपने शासनकाल में सामाजिक न्याय, समानता और जनकल्याण को प्राथमिकता दी। उनकी नीतियां आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने युवाओं से महाराजा सूरजमल के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने हरियाणा सरकार से मांग की कि महाराजा सूरजमल के ऐतिहासिक योगदान को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में उचित स्थान दिया जाए तथा उनके नाम से जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान और योगदान से परिचित हो सकें।
इस अवसर पर जाट सभा के उपप्रधान जयपाल पुनिया , सचिव बीएस गिल , सयुंक्त सचिव महावीर फोगाट , लक्ष्मण फोगाट , सुनीता मान , पुनीत देशवाल , राजेंद्र सिंह श्योराण , सुनीता मलिक , सरोज ढाका , राजेश अहलावत , हेमराज , ईश्वर सिंह दुहन , रामचंद्र , वीना अरोड़ा , ओमप्रकाश सिहाग समेत अनेक लोग उपस्थित थे।
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