जलवायु परिवर्तन को लेकर अस्ट्रेलिया में हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डा. कृष्ण मिड्ढा ने किया भारत प्रतिनिधित्व
पीएम नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नायब सैनी व पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल के नेतृत्व में जलवायु परिवर्तन, विधेयक निर्माण में एआई की भूमिका,
जींद : हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डा. कृष्ण मिड्ढा ने ऑस्ट्रेलिया में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। यह दौरा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी, पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल व विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण के नेतृत्व में सात दिवसीय ऑस्ट्रेलिया यात्रा का हिस्सा था। जिसमें उपाध्यक्ष डा. मिड्ढा शामिल हुए। इस दौरान विभिन्न विधायी और पर्यावरणीय विषयों पर गहन बातचीत हुई। विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन, विधेयक निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका और संबंधित नीतिगत मुद्दों पर फोकस रहा। यहां डा. मिड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दूरदर्शी नेतृत्व का हवाला देते हुए भारत की जलवायु कार्रवाई और सतत विकास की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। ऑस्ट्रेलिया में मौजूद विक्टोरिया पार्लियामेंट्री मेलबर्न के मुख्यमंत्री जैकिंटा एलन, अध्यक्ष मैरी एडवर्ड, उपाध्यक्ष मैट फ्रेगॉन मौजूद रहे और उनके साथ अनुसंधान और नवाचार पर चर्चा हुई। जहां जलवायु परिवर्तन से जुड़े अनुसंधान कार्यों की जानकारी सांझा की गई। डा. कृष्ण मिड्ढा ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के बीच सहयोग बढ़ाना आवश्यक है। एआई का उपयोग विधेयक निर्माण और पर्यावरण नीतियों में तेजी ला सकता है। जिससे अधिक प्रभावी और डेटा आधारित निर्णय लिए जा सकें। डा. मिड्ढा ने कहा कि दुनिया के तमाम देशों में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव साफ देखने को मिल रहा है। आज मौसम से संबंधित घटनाएं चिंता का विषय बन गई हैं। कहीं तूफान, कहीं बर्फबारी, कहीं भारी बारिश और कहीं प्रचंड गर्मी जैसी मौसमी घटनाओं ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। मौसम में हो रहे बदलावों को लेकर भारत और ऑस्ट्रेलिया मिल कर काम करे। इसके अलावा अन्य देश भी इस गंभीर विषय को समझें। भारत जलवायु परिवर्तन को लेकर अहम कदम लगातार उठा रहा है। डा. मिड्ढा ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया का यह दौरा हरियाणा विधानसभा की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है और जलवायु संरक्षण में भारत की मजबूत भूमिका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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