एमडीयू के रंग–सुर में मोहन राकेश के आधे अधूरे का सशक्त मंच
- पारिवारिक विडंबनाओं को उजागर करती मार्मिक प्रस्तुति, डॉ. शरणजीत कौर रहीं मुख्य अतिथि
रोहतक : महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के रंग महोत्सव के तहत रंग–रास कार्यक्रम में बहुचर्चित नाटक आधे अधूरे का अत्यंत प्रभावपूर्ण मंचन विश्वविद्यालय के राधाकृष्णन सभागार में किया गया।
इस नाटक का उद्घाटन रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया की पूर्व अध्यक्षा डॉ. शरणजीत कौर ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। उन्होंने कहा कि मोहन राकेश के नाटक आज भी मानवीय संबंधों की जटिलताओं और सामाजिक यथार्थ को उतनी ही तीव्रता से अभिव्यक्त करते हैं। विद्यार्थियों का अभिनय अत्यंत सजीव और संवेदनापूर्ण रहा।
नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन प्रोफेसर विभांशु वैभव ने किया। महेंद्रनाथ की भूमिका में प्रिंस, जगमोहन की भूमिका में पुष्कर तथा सावित्री की भूमिका में भारती ने अपने प्रभावशाली अभिनय से पात्रों को जीवंत कर दिया।
आधे अधूरे स्त्री–पुरुष संबंधों में व्याप्त असंतुलन, पारिवारिक विखंडन और अधूरी आकांक्षाओं की त्रासदी को उभारता है। नाटक दर्शाता है कि भौतिक उपलब्धियों और महत्वाकांक्षाओं की दौड़ में व्यक्ति किस प्रकार अपने अस्तित्व, आत्मसम्मान और रिश्तों की मधुरता को खो देता है। घर को बचाए रखने के प्रयास में परिवार बिखर जाता है और संबंधों की ऊष्मा शुष्क हो जाती है।
नाटक प्रस्तुति ने दर्शकों को गहन आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। रंग रास के कन्वीनर प्रो हरीश कुमार ने इस कार्यक्रम का समन्वयन किया। इस अवसर पर रंग महोत्सव की संयोजक प्रो सपना गर्ग समेत एमडीयू के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी और शहर के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। निदेशक युवा कल्याण डॉ. प्रताप राठी और उनकी टीम ने आयोजन सहयोग दिया।
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