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Monday, September 7, 2026

गांव-गांव प्राकृतिक खेती का संदेश पहुंचाएंगे 43 किसान , 16 जिलों में संभालेंगे मास्टर ट्रेनर की भूमिका

गांव-गांव प्राकृतिक खेती का संदेश पहुंचाएंगे 43 किसान
16 जिलों में संभालेंगे मास्टर ट्रेनर की भूमिका
हमेटी जींद में पांच दिवसीय सीआरपी प्रशिक्षण संपन्न
किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों के साथ दूसरे किसानों को प्रशिक्षित करने का दिया गया प्रशिक्षण
जींद : खेतों में रसायनों का इस्तेमाल कम करने और प्राकृतिक खेती को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए अब किसान ही किसानों के प्रशिक्षक बनेंगे। हरियाणा के 16 जिलों से चयनित 43 किसानों को कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) के रूप में तैयार किया गया है। ये किसान अपने-अपने क्षेत्रों में अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और रसायन मुक्त खेती के तौर तरीकों की जानकारी देकर उन्हें इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (हमेटी) जींद में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के साथ इन किसानों को प्राकृतिक खेती के विस्तार की जिम्मेदारी सौंपी गई। प्रशिक्षण कार्यस्र5म का आयोजन हमेटी के निदेशक डा. सुरेंद्र सिंह यादव के दिशा-निर्देशन में किया गया। 
गत वर्ष बनाए थे प्राकृतिक खेती करने वाले 125-125 किसानों के 150 क्लस्टर 
पिछले वर्ष हरियाणा के विभिन्न खंडों में प्राकृतिक खेती करने वाले 125-125 किसानों के 150 क्लस्टर बनाए गए थे। इस वर्ष प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए 38 नए क्लस्टर बनाने का निर्णय लिया गया है। प्रत्येक क्लस्टर से दो किसानों का चयन कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के रूप में किया गया है। इन किसानों को प्रशिक्षण देकर इस तरह सक्षम बनाया गया है कि वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्र में किसानों को 
प्राकृतिक खेती की सही और वैज्ञानिक जानकारी दे सकें। 
प्रशिक्षण में खेत पर सिखाई गई तकनीक
प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक एवं प्राकृतिक खेती ट्रेनर डा. सुभाष चंद्र ने बताया कि पांच दिनों के दौरान किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई बल्कि प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। किसानों को जीवामृत और घन जीवामृत तैयार करने एवं उनके प्रयोग, मल्चिंग से खरपतवार नियंत्रण व जल संरक्षण, बहुफसलीय खेती के फायदे तथा नीम, ऑक और धतूरा जैसी वनस्पतियों से प्राकृतिक कीट नियंत्रक तैयार करने की विधि सिखाई गई। इसके अलावा बिना जहरीले रासायनिक कीटनाशकों के फसल सुरक्षा के विभिन्न उपायों की जानकारी भी दी गई है ताकि सीआरपी किसान आगे अपने क्षेत्र के किसानों को इन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे सकें।
फार्म विजिट में देखा प्राकृतिक खेती का मॉडल
प्रशिक्षणार्थी किसानों को गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्राकृतिक खेती फार्म तथा गांव करोड़ा के प्राकृतिक खेती करने वाले सीआरपी किसान मनोज कुमार के फार्म का शैक्षणिक भ्रमण भी करवाया गया। यहां किसानों ने प्राकृतिक तरीके से बहुफसलीय प्रणाली में उगाई जा रही विभिन्न फसलों का अवलोकन किया। मनोज कुमार के फार्म पर एक एकड़ में मल्टीलेयर खेती के माध्यम से एक साथ चार फसलें उगाने का मॉडल दिखाया गया। किसानों ने इस मॉडल को उपयोगी बताते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती के साथ फसल विविधीकरण और बेहतर प्रबंधन अपनाकर किसान अपनी आमदनी के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
उत्पादन के साथ बाजार पर भी ध्यान जरूरी : राजकुमार

महेंद्रगढ़ के किसान राजकुमार ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्राकृतिक खेती से जुड़ी कई नई और व्यावहारिक जानकारियां मिली। इससे उनका क्षमता निर्माण हुआ है और अब वे अपने क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित एवं प्रशिक्षित करने में अधिक सक्षम होंगे। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के विस्तार में सीआरपी मॉडल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वहीं पुंडरी के किसान विशाल वालिया ने गांव करोड़ा में लगाए गए बिक्री स्टाल पर प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और ब्रांडिंग का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य हासिल करने के लिए केवल उत्पादन पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए बल्कि मूल्य संवर्धनए आकर्षक पैकेजिंगए लेबलिंगए ब्रांडिंग और बाजार में बिक्री की रणनीति पर भी काम करना होगा।
गांव-गांव प्राकृतिक खेती पहुंचाने का लिया संकल्प

प्रशिक्षण के समापन पर सीआरपी किसानों ने प्राकृतिक खेती को गांव-गांव तक पहुंचाने तथा अधिक से अधिक किसानों को रसायन मुक्त और टिकाऊ खेती के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण के बाद अब ये किसान अपने-अपने क्लस्टरों में किसानों और कृषि विभाग के बीच कड़ी का काम करेंगे। विभाग को उम्मीद है कि किसानों के बीच से तैयार किए गए ये प्रशिक्षित किसान प्राकृतिक खेती के संदेश को अधिक प्रभावी ढंग से खेतों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
प्राकृतिक खेती आज समय की आवश्यकता : डा. सुरेंद्र यादव

हमेटी के निदेशक डा. सुरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि प्राकृतिक खेती आज समय की आवश्यकता है। भूमि की घटती उर्वरा शक्ति को बनाए रखनेए खाद्यान्न में रसायनों के दुष्प्रभाव को कम करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर बढऩा चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को निशुल्क प्रशिक्षण के साथ देशी गाय खरीदने के लिए 30 हजार रुपये की सहायता और एक एकड़ प्राकृतिक खेती करने पर चार हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर रही है।

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