वुडस्टॉक पब्लिक स्कूल जींद में वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से गूंजा विद्यालय परिसर
जींद : वंदे मातरम् गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के गौरवपूर्ण अवसर पर वुडस्टॉक पब्लिक स्कूल, जींद में शुक्रवार को सामूहिक वंदे मातरम् गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती सुकृति गौतम जी ने की। कार्यक्रम में मीनू तायल जी एवं विकास जी विशेष रूप से उपस्थित रहकर इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय गीत के सामूहिक गायन के साक्षी बने।
प्रातः 11 बजे विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं समस्त स्टाफ ने एक साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया। इस दौरान पूरा विद्यालय परिसर “वंदे मातरम्” एवं “भारत माता की जय” के जयघोष से गूंज उठा। विद्यार्थियों में देशभक्ति, उत्साह और राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में लगभग दो करोड़ से अधिक विद्यार्थियों द्वारा एक साथ सामूहिक गायन किए जाने के राष्ट्रीय कार्यक्रम से वुडस्टॉक पब्लिक स्कूल भी जुड़ा। इस अवसर ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, संस्कार, राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रनिर्माण की भावना से जोड़ने का कार्य किया।
विद्यालय के सहसंयोजक आशुतोष शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति श्रद्धा, सम्मान, एकता और राष्ट्रसमर्पण की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देशसेवा केवल सीमा पर जाकर ही नहीं की जाती। विद्यार्थी मन लगाकर पढ़ता है तो यह भी देशसेवा है। किसी जरूरतमंद की सहायता करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, पर्यावरण को सुरक्षित रखना, ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करना तथा एक जिम्मेदार, संस्कारी और चरित्रवान नागरिक बनना भी भारत माता की सेवा के महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की 150 वर्ष की गौरवपूर्ण यात्रा हमें उस राष्ट्रभावना से जोड़ती है, जिसने देशवासियों को कठिन परिस्थितियों में भी एकजुट रहने और राष्ट्र के लिए समर्पित होने की प्रेरणा दी। जब हम सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन करें तो हमारे स्वर में केवल आवाज नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति श्रद्धा, एकता और संकल्प की शक्ति भी होनी चाहिए।
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती सुकृति गौतम जी ने कहा कि जब हमारे स्वतंत्रता सेनानी वंदे मातरम् का उद्घोष करते थे, तब उनके सामने अंग्रेजी शासन का दबाव, संघर्ष और अनेक कठिनाइयां थीं। इसके बावजूद उनके मन में यह अटूट विश्वास था कि भारत हमारी मातृभूमि है और इसकी स्वतंत्रता सर्वोपरि है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेकर अनुशासन, संस्कार, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने वंदे मातरम् का सामूहिक गायन करने के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने और समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर विद्यालय का वातावरण पूर्णतः देशभक्तिमय रहा। कार्यक्रम में उपस्थित मीनू तायल जी एवं विकास जी ने विद्यार्थियों के सामूहिक गायन और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत वातावरण को सराहा। कार्यक्रम का समापन “वंदे मातरम्” एवं “भारत माता की जय” के जयघोष के साथ हुआ।
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