डा. रेखा को वर्ष 2026 में विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान प्राप्त हुआ
उन्नत औषधि वितरण प्रणालियों, नैनोफार्मूलेशन, त्वचा के माध्यम से दवाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने की तकनीकों पर कर रही शोध
Jind : हरियाणा के जींद के अलेवा खंड के गांव बधाना की बेटी डा. रेखा ने की वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर हरियाणा का गौरव बढ़ाया है। गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार के फार्मास्यिुटिकल साइंसेज विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डा. रेखा को वर्ष 2026 में विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान प्राप्त हुआ है। डा. रेखा फार्मास्युटिकल विज्ञान के क्षेत्र में शिक्षण एवं अनुसंधान कार्य कर रही हैं। उनका शोध कार्य उन्नत औषधि वितरण प्रणालियों, नैनोफार्मूलेशन और त्वचा के माध्यम से दवाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने की तकनीकों पर केंद्रित है। अनुसंधान के क्षेत्र में डा. रेखा को हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद के अंतर्गत हरियाणा स्टेट रिसर्च
फंड से 28 लाख रूपये की अनुसंधान परियोजना की स्वीकृति मिली है। परियोजना का शीर्षक स्तन कैंसर के उपचार हेतु त्वचा के माध्यम से सिंथेटिक एवं हर्बल औषधीय घटकों को संयुक्त रूप से पहुंचाने के लिए नैनोइमल्जेल का विकास एवं मूल्यांकन है। इस शोध के अंतर्गत स्तन कैंसर के उपचार के लिए सिंथेटिक एवं हर्बल औषधीय घटकों को त्वचा के माध्यम से पहुंचाने वाली नैनोइमल्जेल प्रणाली के विकास एवं
मूल्यांकन पर कार्य किया जा रहा है। डा. रेखा के शोध कार्यों की उपलब्धियों की बात करें तो उनके 100 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय
शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में उत्कृष्ट शोध एवं अकादमिक योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी ये उपलब्धिां फार्मास्युटिकल विज्ञान के क्षेत्र में उनके निरंतर प्रयासोंए शोध के प्रति समर्पण और वैज्ञानिक योगदान को दर्शाती हैं। डा. रेखा के पिता चतर सिंह महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक से सेवानिवृत्त डिप्टी रजिस्ट्रार हैं। उनके दादाजी चौधरी रिसाल सिंह से उन्हें हमेशा प्रेरणा मिलती रही है। परिवार से मिले संस्कार, दादाजी की प्रेरणा और शिक्षा के प्रति समर्पण ने उनके शैक्षणिक एवं शोध जीवन को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके भाई प्रो. अनुराग खटकड़ महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग में प्रोफेसर हैं और फार्मास्युटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। अपनी उपलब्धि पर डा. रेखा ने इसका श्रेय अपने पूरे गांंंव, परिवार और अपने संस्थान को दिया है। उन्होंने कहा कि गांव से मिले प्रोत्साहन, परिवार के सहयोग और विश्वविद्यालय में मिले अनुकूल शैक्षणिक वातावरण ने उनकी शोध यात्रा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गांव बधाना की बेटी की यह सफ लता जींद जिले और हरियाणा के युवाओं एवं विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी उपलब्धियांं दर्शाती हैं कि निरंतर मेहनत, लगन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बल पर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।
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