बंदरों के आतंक से परेशान जींद को अब मिलेगी राहत
नगर परिषद ने पकड़ने के लिए मांगे टेंडर
पांच हजार से अधिक बंदरों का अनुमान
जींद अस्पताल में रिकॉर्ड फाड़ने से लेकर लोगों पर हमले तक सामने आ चुके हैं मामले
शहरवासियों की शिकायतों और हाउस की बैठकों में भी उठता रहा मुद्दा
जींद: जींद शहर में बंदरों के बढ़ते आंतक पर रोक लगाने के लिए नगर परिषद ने टेंडर योजना तैयार कर दी है। इसके लिए टेंडर लगाकर एजेंसियों से आवेदन मांगे हैं। शहर में गलियों से लेकर घरों की छतों, बाजारों और सार्वजनिक संस्थानों तक बंदरों की मौजूदगी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। बंदरों के झुंड कई बार लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर चुके हैं। अब नगर परिषद ने शहर में बंदरों को पकड़ने के लिए एक साल का ठेका देने की प्रक्रिया शुरू की है।
परिषद ने इसके लिए ओपन टेंडर जारी कर दिया है। टेंडर के तहत ठेकेदार को नगर परिषद के अधिकार क्षेत्र में बंदरों को पकड़ना होगा। शहर में पांच हजार से अधिक बंदर होने का अनुमान बताया जा रहा है। बंदरों की समस्या को लेकर लंबे समय से प्रशासन के सामने शिकायतें पहुंच रही थीं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ की ओर से भी बंदरों को पकड़ने की मांग को लेकर 40 बार रिमाइंडर भेजे है। वहीं शहरवासी भी नगर परिषद कार्यालय में कई बार शिकायत देकर बंदरों से निजात दिलाने की मांग कर चुके हैं। नगर परिषद की हाउस की बैठकों में भी यह मुद्दा उठता रहा है। बंदरों की समस्या की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ दिन पहले नागरिक अस्पताल में बंदरों ने रिकॉर्ड फाड़कर नष्ट कर दिया था। अस्पताल परिसर में बंदरों के घूमने और रिकॉर्ड रूम तक पहुंचने का मामला सामने आने के बाद भी यह मुद्दा चर्चा में रहा। इससे पहले शहर के अलग-अलग हिस्सों में बंदरों के लोगों के घरों में घुसने, सामान उठाने और लोगों पर झपटने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
*पहले भी एजेंसी को दिया था ठेका, नियमों के उल्लंघन पर रद्द करना पड़ा*
बंदरों को पकड़ने के लिए इससे पहले भी शहर में एजेंसी को काम दिया गया था, लेकिन नियमों के अनुसार कार्य नहीं करने के कारण उसका टेंडर रद्द कर दिया गया था। इसके बाद बंदरों को पकड़ने का अभियान प्रभावित हुआ और समस्या फिर बढ़ती गई। अब नगर परिषद ने दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। ऐसे में शहरवासियों की नजर इस बात पर रहेगी कि नई एजेंसी को काम मिलने के बाद वास्तव में कितने बंदर पकड़े जाते हैं और शहर को इससे कितनी राहत मिलती है। वहीं बंदरों के हमलों के अलावा जिले में आवारा कुत्तों के काटने के मामले भी बड़ी संख्या में सामने आते रहे हैं। पिछले नौ माह में बंदर और कुत्तों के काटने के हज़ारों मामले आए हैं। ऐसे में बंदरों को पकड़ने की मांग केवल शहर की समस्या नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा भी बन गई है।
नगर परिषद के ईओ सुशील भुक्कल ने बताया कि नगर परिषद के टेंडर के अनुसार बंदरों को पकड़ने का कार्य 365 दिन की अवधि के लिए दिया जाएगा। इच्छुक फर्म या ठेकेदार 8 अक्टूबर तक निविदा जमा कर सकेंगे। तकनीकी बोली 8 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे नगर परिषद कार्यालय में खोली जाएगी।
यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद शहर में बंदरों के आंतक से राहत मिलेगी।
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