करवा चौथ पर आयोजित किया गया मेहंदी उत्सव, सैकड़ों महिलाओं ने अपने हाथों पर लगवाई मेहंदी
एक से बढ़कर एक आकर्षक डिजाइनों से सजाए महिलाओं के हाथ, महात्मा गांधी संस्थान ने किया कार्यक्रम का आयोजन
बेटियों के हुनर को मिला मंच, कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की अनूठी पहल
जींद : करवा चौथ के पावन अवसर पर महात्मा गांधी शिक्षा एवं समाज विकास संगठन जींद द्वारा हरियाणा नॉलेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के सहयोग से दो दिवसीय मेहंदी उत्सव का आयोजन किया गया। अर्बन एस्टेट स्थित संगठन के कार्यालय में आयोजित इस उत्सव में सैकड़ों महिलाओं ने अपने हाथों पर मेहंदी लगवाई। इस दौरान महिलाओं के हाथों पर एक से बढ़कर एक आकर्षक और खूबसूरत डिजाइनों की मेहंदी लगाई गई। पारंपरिक डिजाइनों से लेकर आधुनिक पैटर्न तक, मेहंदी की सुंदर कलाकारी ने महिलाओं के उत्साह और त्योहार की खुशियों को दोगुना कर दिया।
इस आयोजन की विशेष बात यह रही कि मेहंदी लगाने का कार्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रही बेटियों ने किया। बेटियों ने अपनी कला, रचनात्मकता और हुनर का शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के हाथों पर सुंदर डिजाइन उकेरे। आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाएं मेहंदी लगवाने पहुंचीं और उन्होंने इस पहल की जमकर सराहना की। महिलाओं ने कहा कि करवा चौथ जैसे त्योहार पर इस प्रकार का आयोजन उनके लिए सुविधाजनक और आनंददायक रहा। साथ ही इससे बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक अच्छा मंच भी मिला।कार्यक्रम में नगर परिषद जींद की चेयरमैन डॉ. अनुराधा सैनी मुख्य अतिथि तथा अखिल भारतीय अग्रवाल समाज हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी डॉ. राजकुमार गोयल विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन संस्था के अध्यक्ष राजकुमार भोला के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर आईटी प्रमुख अंकिता खटकड़, साइकोलॉजिस्ट किरण सिंधु, अंजली वर्मा, सीमा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
बेटियों को कौशल और स्वरोजगार के अवसर देना समय की जरूरत : डॉ. अनुराधा सैनी
मुख्य अतिथि डॉ. अनुराधा सैनी ने कहा कि आज के समय में बेटियों को शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना बेहद जरूरी है। मेहंदी उत्सव जैसी पहल बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने, आत्मविश्वास बढ़ाने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि जब बेटियों को उचित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर मिलते हैं, तो वे अपने हुनर के दम पर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। ऐसे कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पारंपरिक संस्कृति को महिला सशक्तिकरण से जोड़ने का सराहनीय प्रयास : डॉ. राजकुमार गोयल
विशिष्ट अतिथि एवं प्रमुख समाजसेवी डॉ. राजकुमार गोयल ने कहा कि करवा चौथ मेहंदी उत्सव पारंपरिक संस्कृति और त्योहारों की खुशियों को महिला सशक्तिकरण तथा कौशल विकास से जोड़ने का सराहनीय प्रयास है। इस आयोजन में जहां सैकड़ों महिलाओं को सुंदर मेहंदी लगवाने का अवसर मिला, वहीं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही बेटियों को अपने हुनर का प्रदर्शन करने और उसे रोजगार से जोड़ने का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि युवाओं और महिलाओं को कौशल आधारित गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसे प्रयास लगातार किए जाने चाहिए।
बेटियों के हुनर को रोजगार से जोड़ना हमारा संकल्प : राजकुमार भोला
संस्था के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम आयोजक राजकुमार भोला ने कहा कि महात्मा गांधी शिक्षा एवं समाज विकास संगठन का उद्देश्य केवल शिक्षा और कंप्यूटर प्रशिक्षण देना ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं और बेटियों को व्यावहारिक अनुभव तथा रोजगारोन्मुख अवसर उपलब्ध करवाना भी है। दो दिवसीय मेहंदी उत्सव इसी सोच का परिणाम है। इसके माध्यम से बेटियों को अपनी कला निखारने, नए-नए डिजाइन बनाने और अपने हुनर को कमाई का साधन बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी शिक्षा, डिजिटल कौशल, महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां आयोजित करती रहेगी।
महिलाओं ने की महात्मा गांधी संस्थान की पहल की प्रशंसा
मेहंदी उत्सव में पहुंचीं महिलाओं ने महात्मा गांधी शिक्षा एवं समाज विकास संगठन की इस पहल की सराहना की। महिलाओं ने कहा कि करवा चौथ के अवसर पर एक ही स्थान पर विभिन्न प्रकार की आकर्षक मेहंदी डिजाइन बनवाने का अवसर मिला। इस आयोजन से आसपास के क्षेत्र की महिलाओं को लाभ हुआ और त्योहार की रौनक भी बढ़ी। साथ ही, बेटियों को अपनी कला दिखाने और आगे बढ़ने का मौका मिला। इस दो दिवसीय आयोजन ने यह संदेश दिया कि त्योहार केवल परंपराओं और खुशियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से सामाजिक सरोकारों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। मेहंदी उत्सव बेटियों के हुनर को मंच देने, महिलाओं को प्रोत्साहित करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक कदम साबित हुआ।
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