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Friday, June 5, 2026

June 05, 2026

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद बड़ी सियासी हलचल, कांग्रेस विधायक रेनू बाला के पति ऋषिपाल भाजपा में शामिल

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद बड़ी सियासी हलचल, कांग्रेस विधायक रेनू बाला के पति ऋषिपाल भाजपा में शामिल
Haryana Bulletin News : हरियाणा की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। यमुनानगर जिले की साढौरा सीट से कांग्रेस विधायक रेनू बाला (Sadhaura Congress MLA Renu Bala) के पति इंजीनियर ऋषिपाल ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (CM Nayab Singh Saini) ने व्यासपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान ऋषिपाल को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता दिलाई। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधायक रेनू बाला खुद मंच पर मौजूद नहीं थीं, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
*सीएम के कार्यक्रम के लिए खुद विधायक बांट रही थीं न्योता*

भले ही विधायक रेनू बाला आज मंच पर नहीं दिखीं, लेकिन पिछले कई दिनों से वे खुद मुख्यमंत्री नायब सैनी के इस व्यासपुर कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए गांव-गांव जाकर सभाएं कर रही थीं और लोगों को न्योता दे रही थीं।
भाजपा का पटका पहनने के बाद इंजीनियर ऋषिपाल (Engineer Rishipal joins BJP) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “कांग्रेस में अब विकास की कोई सोच नहीं बची है, वहां सिर्फ कुर्सी की राजनीति हो रही थी। भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर मैं पार्टी में आया हूं और यहां आकर बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं।” आपको बता दें कि पेशे से इंजीनियर ऋषिपाल ही अपनी विधायक पत्नी की पूरी सियासी गतिविधियां और क्षेत्र का काम संभालते हैं।
*राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस से निलंबित हैं रेनू बाला*

साढौरा से दो बार की विधायक रेनू बाला का नाम पिछले दिनों राज्यसभा चुनाव (Haryana Rajya Sabha election cross voting) में क्रॉस वोटिंग करने वाले कांग्रेस के 5 विधायकों में शामिल था। इन विधायकों ने कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार कर्मबीर बौद्ध की जगह भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल को वोट दिया था।
इस बगावत के बाद कांग्रेस आलाकमान ने रेनू बाला को पार्टी से निलंबित (Congress suspends MLA Renu Bala) कर दिया था। तब से ही कांग्रेस ने उन्हें अपनी बैठकों में बुलाना बंद कर दिया है और वे पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुकी हैं।

*मंत्री अनिल विज के साथ मंच पर आईं थीं नजर, बढ़ रही हैं नजदीकियां*

कांग्रेस से सस्पेंड होने के बाद से रेनू बाला लगातार सरकारी कार्यक्रमों में भाजपा नेताओं के साथ मंच साझा कर रही हैं। पिछले दिनों यमुनानगर में हुई ग्रीवेंस कमेटी की बैठक (Yamunanagar Grievance Committee meeting) में भी उनकी कुर्सी भाजपा विधायकों के बीच लगी थी। वह कैबिनेट मंत्री अनिल विज के बिल्कुल पास बैठी नजर आई थीं, जहां उन्हें पूरा मान-सम्मान मिल रहा था।
*आखिर विधायक खुद क्यों नहीं शामिल हुईं भाजपा में?*

ऋषिपाल ने साफ किया कि कांग्रेस ने रेनू बाला को सिर्फ निलंबित किया है, पार्टी से निष्कासित (expelled) नहीं किया है। इसलिए तकनीकी रूप से वे अभी भी कांग्रेस की विधायक हैं।
हरियाणा की खबरें पढ़ने www.haryanabulletinnews पर क्लिक करें


June 05, 2026

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद बड़ी सियासी हलचल, कांग्रेस विधायक रेनू बाला के पति ऋषिपाल भाजपा में शामिल

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद बड़ी सियासी हलचल, कांग्रेस विधायक रेनू बाला के पति ऋषिपाल भाजपा में शामिल
Haryana Bulletin News : हरियाणा की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। यमुनानगर जिले की साढौरा सीट से कांग्रेस विधायक रेनू बाला (Sadhaura Congress MLA Renu Bala) के पति इंजीनियर ऋषिपाल ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (CM Nayab Singh Saini) ने व्यासपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान ऋषिपाल को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता दिलाई। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधायक रेनू बाला खुद मंच पर मौजूद नहीं थीं, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
*सीएम के कार्यक्रम के लिए खुद विधायक बांट रही थीं न्योता*

भले ही विधायक रेनू बाला आज मंच पर नहीं दिखीं, लेकिन पिछले कई दिनों से वे खुद मुख्यमंत्री नायब सैनी के इस व्यासपुर कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए गांव-गांव जाकर सभाएं कर रही थीं और लोगों को न्योता दे रही थीं।
भाजपा का पटका पहनने के बाद इंजीनियर ऋषिपाल (Engineer Rishipal joins BJP) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “कांग्रेस में अब विकास की कोई सोच नहीं बची है, वहां सिर्फ कुर्सी की राजनीति हो रही थी। भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर मैं पार्टी में आया हूं और यहां आकर बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं।” आपको बता दें कि पेशे से इंजीनियर ऋषिपाल ही अपनी विधायक पत्नी की पूरी सियासी गतिविधियां और क्षेत्र का काम संभालते हैं।
*राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस से निलंबित हैं रेनू बाला*

साढौरा से दो बार की विधायक रेनू बाला का नाम पिछले दिनों राज्यसभा चुनाव (Haryana Rajya Sabha election cross voting) में क्रॉस वोटिंग करने वाले कांग्रेस के 5 विधायकों में शामिल था। इन विधायकों ने कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार कर्मबीर बौद्ध की जगह भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल को वोट दिया था।
इस बगावत के बाद कांग्रेस आलाकमान ने रेनू बाला को पार्टी से निलंबित (Congress suspends MLA Renu Bala) कर दिया था। तब से ही कांग्रेस ने उन्हें अपनी बैठकों में बुलाना बंद कर दिया है और वे पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुकी हैं।

*मंत्री अनिल विज के साथ मंच पर आईं थीं नजर, बढ़ रही हैं नजदीकियां*

कांग्रेस से सस्पेंड होने के बाद से रेनू बाला लगातार सरकारी कार्यक्रमों में भाजपा नेताओं के साथ मंच साझा कर रही हैं। पिछले दिनों यमुनानगर में हुई ग्रीवेंस कमेटी की बैठक (Yamunanagar Grievance Committee meeting) में भी उनकी कुर्सी भाजपा विधायकों के बीच लगी थी। वह कैबिनेट मंत्री अनिल विज के बिल्कुल पास बैठी नजर आई थीं, जहां उन्हें पूरा मान-सम्मान मिल रहा था।
*आखिर विधायक खुद क्यों नहीं शामिल हुईं भाजपा में?*

ऋषिपाल ने साफ किया कि कांग्रेस ने रेनू बाला को सिर्फ निलंबित किया है, पार्टी से निष्कासित (expelled) नहीं किया है। इसलिए तकनीकी रूप से वे अभी भी कांग्रेस की विधायक हैं।
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June 05, 2026

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद बड़ी सियासी हलचल, कांग्रेस विधायक रेनू बाला के पति ऋषिपाल भाजपा में शामिल

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद बड़ी सियासी हलचल, कांग्रेस विधायक रेनू बाला के पति ऋषिपाल भाजपा में शामिल
Haryana Bulletin News : हरियाणा की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। यमुनानगर जिले की साढौरा सीट से कांग्रेस विधायक रेनू बाला (Sadhaura Congress MLA Renu Bala) के पति इंजीनियर ऋषिपाल ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (CM Nayab Singh Saini) ने व्यासपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान ऋषिपाल को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता दिलाई। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधायक रेनू बाला खुद मंच पर मौजूद नहीं थीं, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
*सीएम के कार्यक्रम के लिए खुद विधायक बांट रही थीं न्योता*

भले ही विधायक रेनू बाला आज मंच पर नहीं दिखीं, लेकिन पिछले कई दिनों से वे खुद मुख्यमंत्री नायब सैनी के इस व्यासपुर कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए गांव-गांव जाकर सभाएं कर रही थीं और लोगों को न्योता दे रही थीं।
भाजपा का पटका पहनने के बाद इंजीनियर ऋषिपाल (Engineer Rishipal joins BJP) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “कांग्रेस में अब विकास की कोई सोच नहीं बची है, वहां सिर्फ कुर्सी की राजनीति हो रही थी। भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर मैं पार्टी में आया हूं और यहां आकर बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं।” आपको बता दें कि पेशे से इंजीनियर ऋषिपाल ही अपनी विधायक पत्नी की पूरी सियासी गतिविधियां और क्षेत्र का काम संभालते हैं।
*राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस से निलंबित हैं रेनू बाला*

साढौरा से दो बार की विधायक रेनू बाला का नाम पिछले दिनों राज्यसभा चुनाव (Haryana Rajya Sabha election cross voting) में क्रॉस वोटिंग करने वाले कांग्रेस के 5 विधायकों में शामिल था। इन विधायकों ने कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार कर्मबीर बौद्ध की जगह भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल को वोट दिया था।
इस बगावत के बाद कांग्रेस आलाकमान ने रेनू बाला को पार्टी से निलंबित (Congress suspends MLA Renu Bala) कर दिया था। तब से ही कांग्रेस ने उन्हें अपनी बैठकों में बुलाना बंद कर दिया है और वे पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुकी हैं।

*मंत्री अनिल विज के साथ मंच पर आईं थीं नजर, बढ़ रही हैं नजदीकियां*

कांग्रेस से सस्पेंड होने के बाद से रेनू बाला लगातार सरकारी कार्यक्रमों में भाजपा नेताओं के साथ मंच साझा कर रही हैं। पिछले दिनों यमुनानगर में हुई ग्रीवेंस कमेटी की बैठक (Yamunanagar Grievance Committee meeting) में भी उनकी कुर्सी भाजपा विधायकों के बीच लगी थी। वह कैबिनेट मंत्री अनिल विज के बिल्कुल पास बैठी नजर आई थीं, जहां उन्हें पूरा मान-सम्मान मिल रहा था।
*आखिर विधायक खुद क्यों नहीं शामिल हुईं भाजपा में?*

ऋषिपाल ने साफ किया कि कांग्रेस ने रेनू बाला को सिर्फ निलंबित किया है, पार्टी से निष्कासित (expelled) नहीं किया है। इसलिए तकनीकी रूप से वे अभी भी कांग्रेस की विधायक हैं।
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Thursday, June 4, 2026

June 04, 2026

जन्मदिन पर डॉ. रमेश पांचाल का सराहनीय कदम, 10 टीबी मरीजों को लिया गोद

जन्मदिन पर डॉ. रमेश पांचाल का सराहनीय कदम, 10 टीबी मरीजों को लिया गोद
जींद : जींद के नागरिक अस्पताल में डिप्टी सिविल मेडिकल ऑफिसर डॉ. रमेश पांचाल ने सामाजिक सेवा और मानवीय संवेदना की एक अनूठी मिसाल पेश की है। अपने जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने 10 टीबी मरीजों को गोद लेने की घोषणा की है।
डॉ. रमेश पांचाल ने न केवल इन मरीजों को गोद लिया है, बल्कि उनके पूरे छह माह के उपचार के दौरान हर महीने राशन उपलब्ध कराने और उसका पूरा खर्च स्वयं वहन करने का संकल्प भी लिया है। उनके इस कदम की अस्पताल स्टाफ और आमजन द्वारा सराहना की जा रही है।
डॉ. पांचाल ने बताया कि टीबी के मरीजों को उपचार के दौरान पौष्टिक आहार की विशेष आवश्यकता होती है। आर्थिक रूप से कमजोर कई मरीज इलाज के साथ-साथ पर्याप्त भोजन नहीं जुटा पाते, जिसके कारण वे बीच में ही दवाइयां छोड़ देते हैं। इससे बीमारी और गंभीर हो जाती है तथा मरीजों में दवा प्रतिरोधक क्षमता (DR-TB) विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए उन्होंने 10 टीबी मरीजों को गोद लेने और उनके पोषण की जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया है, ताकि मरीजों को बेहतर उपचार के साथ पौष्टिक आहार भी मिल सके और वे जल्द स्वस्थ हो सकें।
डॉ. रमेश पांचाल की इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए लोगों ने इसे मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।

Wednesday, June 3, 2026

June 03, 2026

ख़ान सर के कोचिंग सेंटर के बाहर हमला, पुलिस ने क्या बताया

ख़ान सर के कोचिंग सेंटर के बाहर हमला, पुलिस ने क्या बताया
पटना : पटना में मंगलवार रात को शिक्षक और यूट्यूबर ख़ान सर के कोचिंग सेंटर के बाहर हमला हुआ है. पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, हमले में एक सुरक्षा गार्ड गंभीर रूप से घायल हुआ है.
बुधवार सुबह ख़ान सर की कोचिंग के बाहर छात्रों का भारी हुजूम इकट्ठा हो गया और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.
पटना एसपी सिटी ने कहा है कि इस घटना में शामिल 10 से 12 संदिग्धों की पहचान कर ली गई है.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, जिस समय यह हमला हुआ उस समय कोचिंग में क्लासेज़ ख़त्म हो चुकी थीं.

घटना की ख़बर मिलने के बाद पटना एसएसपी, डीएसपी समेत पुलिस की कई टीमें कोचिंग सेंटर पर पहुंच गईं.

एसपी कार्तिकेय शर्मा ने एएनआई से कहा, "इस हमले में गार्ड के घायल होने की ख़बर है. इस मामले में गार्ड और स्थानीय लोगों के बयान दर्ज कर जांच की जा रही है. घायल व्यक्ति का इलाज हो रहा है."
*पुलिस ने क्या कहा*

एसपी सिटी दीक्षा ने बताया कि 10 से 12 लोगों की पहचान की जा चुकी है।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "इसमें शामिल लोग सड़क के दूसरी ओर स्थित कोचिंग सेंटर से जुड़े हुए हो सकते हैं. फ़िलहाल सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है. औपचारिक शिकायतें दर्ज की जा रही हैं और आगे की प्रक्रिया जारी है."
उन्होंने बताया, "सभी वीडियो फ़ुटेज की गहन जांच की जा रही है और हर पहलू का सत्यापन किया जा रहा है. हमें सूचना मिली है कि एक व्यक्ति घायल हुआ है. उसका फ़िलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है. सीसीटीवी फ़ुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है. "

इससे पहले पटना के एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने कहा था, "जो भी इस मामले में शामिल पाया जाएगा, उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी."
*ख़ान सर ने क्या बताया*

ख़ान सर ने पत्रकारों से बातचीत में आशंका जताई कि 'हमलावरों का संबंध कोचिंग संस्थानों से हो सकता है.'

उन्होंने कहा, "क्लासें ख़त्म हो चुकी थीं. बिहार पुलिस भर्ती का परिणाम आया था. हज़ारों अभ्यर्थी सफल हुए थे. हम थके हुए थे. तभी कुछ असामाजिक तत्व आए, हमें धमकाने लगे और गार्डों के साथ मारपीट की."
उन्होंने दावा किया, "दस मिनट के अंदर कम से कम आठ-दस राउंड गोली चली और चारों ओर अफ़रा-तफ़री का माहौल पैदा हो गया. ऑफ़िस को पूरी तरह तोड़ दिया है."

उन्होंने कहा, "गार्ड को मार कर इतना लहूलुहान कर दिया है कि उन्हें पीएमसीएच में भर्ती कराया गया है. देखिए यहां क्या हो रहा है. ये बिल्कुल असामाजिक तत्व हैं."
ख़ान सर ने संदिग्धों की पहचान का दावा करते हुए कहा, "लोगों को चिह्नित कर लिया गया है, गार्ड ने भी उनकी पहचान कर ली है. ऐसा लगता है कि उनका संबंध कोचिंग संस्थानों से है. वे कम फ़ीस से परेशान हैं. मेरा मानना है कि ग़रीबों को भी पढ़ने का अधिकार है."

मुसल्लहपुर हाट इलाक़ा बिहार की राजधानी पटना का एक प्रमुख शैक्षणिक हब है. यहीं ख़ान सर का कोचिंग संस्थान है.
इस इलाक़े में एक प्रमुख कोचिंग केंद्र है- 'ख़ान जीएस रिसर्च सेंटर', जिसे मशहूर ख़ान सर चलाते हैं. उनका पूरा नाम है फ़ैज़ल ख़ान.

उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई उत्तर प्रदेश के देवरिया के एक स्कूल से की है. ख़ान सर ने बाद में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है.

ख़ान सर का दावा है कि उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट की पढ़ाई भी की है. उनका कहना है कि उनके यूट्यूब चैनल को कोविड लॉकडाउन ने ज़्यादा लोगों तक पहुँचा दिया.
इसी दौर में ख़ान सर भी काफ़ी मशहूर हुए. ख़ासकर देसी अंदाज़ में पढ़ाने और समझाने के तरीक़ों की वजह से वो चर्चा में आए.

ख़ान सर मूल रूप से बिहार की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले हैं.

ख़ान सर स्टूडेंट्स में लोकप्रिय हैं और हज़ारों छात्र उनके संस्थान में पढ़ते हैं लेकिन अपनी टिप्पणियों से वो विवादों में भी रहे हैं.

वो छात्रों ही नहीं बल्कि आम लोगों के बीच भी एक चर्चित नाम हैं. उनके यूट्यूब चैनल 'ख़ान जीएस रिसर्च सेंटर' के 2.9 करोड़ से ज़्यादा सबस्क्राइबर हैं.
उन्होंने कहा, "मुझे सुरक्षा मिलनी चाहिए, लेकिन यह प्रशासन पर निर्भर करता है. सीसीटीवी फ़ुटेज पुलिस को सौंप दिया गया है."

ख़ान सर ने कहा, "हमारे सुरक्षा गार्ड ने भी हमलावरों की पहचान कर ली है. ये लोग पास के कोचिंग सेंटर से हैं. यह साफ़ है कि इस घटना के पीछे आसपास का कोचिंग संस्थान है. उन्होंने ऐसे बयान भी दिए हैं, जिनमें कहा गया है कि वे ख़ान सर के कोचिंग सेंटर को उड़ा देंगे."
June 03, 2026

शशि थरूर ने कहा, 'सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और आख़िर में पूरा वंदे मातरम गाना ग़ैर-ज़रूरी'

शशि थरूर ने कहा, 'सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और आख़िर में पूरा वंदे मातरम गाना ग़ैर-ज़रूरी'

शशि थरूरकांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और आख़िर में 'वंदे मातरम के सभी छंदों को गाना वहां मौजूद लोगों के लिए ग़ैर-ज़रूरी' है.

नई दिल्ली: समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक दिन पहले वंदे मातरम विवाद पर प्रतिक्रिया दी.

उन्होंने कहा, "सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और अंत में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सभी छंदों को बजाने या गाने की अनिवार्यता वहां मौजूद ऑडियंस के लिए ग़ैर-ज़रूरी और बोझिल है."

उनके इस बयान पर बीजेपी की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है.

बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने पीटीआई से कहा है, "कांग्रेस पार्टी को वंदे मातरम से समस्या है, क्योंकि वह मुस्लिम लीग के प्रभाव में आ गई है."

उन्होंने कहा, "गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश स्पष्ट रूप से कहते हैं कि वंदे मातरम गाना वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य है. इस मुद्दे पर विवाद खड़ा करके राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी ने साफ़ कर दिया है कि उसकी नीतियां और मंशा देशभक्ति से नहीं, बल्कि देश के विरोध से प्रेरित हैं."

उधर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वंदे मातरम से जुड़े विवाद को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया था और उम्मीद जताई कि इसका समाधान आपसी सहमति से हो जाएगा.

शशि थरूर ने कहा, "मैं समझ सकता हूं कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री से जुड़े औपचारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम को एक बार गाया जाए. लेकिन किसी छोटे कार्यक्रम में पूरा गीत दो बार गाना समझ से परे है. मुझे इसका कोई औचित्य नहीं दिखता, और यह ख़ास तौर पर प्रभावी भी नहीं है."

वह पुरानी परंपरा का हवाला देते हुए कहते हैं कि पहले कार्यक्रम की शुरुआत में वंदे मातरम बजाया जाता था और अंत में राष्ट्रगान.

उन्होंने कहा, "मगर अब वे चाहते हैं कि इसके सभी छंदों को सभी कार्यक्रमों की शुरुआत और अंत में बजाया जाए. मेरे विचार में यह गैर-ज़रूरी रूप से थोपना है."

थरूर ने यह भी कहा, "वंदे मातरम हमारा राष्ट्रगीत है और हम सब इसे बजाए जाने पर सम्मान में खड़े होते हैं और इसका पहला अंतरा या शुरूआती कुछ अंतरे आम लोगों को कंठस्थ हैं."

बता दें कि गृह मंत्रालय के मुताबिक, वंदे मातरम के आधिकारिक संस्करण को गाने की पूरी अवधि 3 मिनट, 10 सेकंड है.

इसे सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में बजाया जाना अनिवार्य है. इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा. अब तक राष्ट्रगीत के पहले दो अंतरे गाए जाते थे.

थरूर ने यह भी कहा कि केरल सरकार का मानना था कि वंदे मातरम को पूरा गाना अनिवार्य नहीं है, जबकि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आलेकर की राय अलग है.

थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्हें राष्ट्रीय गीत से कोई आपत्ति नहीं है. वे इसे ख़ुशी-ख़ुशी गा सकते हैं.

June 03, 2026

सीबीएसई के नए चेयरपर्सन का एलान, राहुल सिंह के तबादले के बाद इन्हें मिली कमान

सीबीएसई के नए चेयरपर्सन का एलान, राहुल सिंह के तबादले के बाद इन्हें मिली कमान

सीबीएसई

इमेज कैप्शन,सीबीएसई के नए चेयरपर्सन लोखंडे प्रशांत सीताराम 2001 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने आईएएस ऑफिसर लोखंडे प्रशांत सीताराम को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया है. वरुण भारद्वाज को सचिव बनाया गया है.

यह फ़ैसला उस समय आया जब ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम को लेकर विवाद के बीच पुराने पदाधिकारियों को हटा दिया गया.

मंगलवार को ही सीबीएसई के चेयरपर्सन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफ़र कर दिया गया था.

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, नए चेयरपर्सन लोखंडे प्रशांत सीताराम 2001 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं. वह एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिज़ोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर से आते हैं, फ़िलहाल गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव हैं.

वहीं, वरुण भारद्वाज साल 2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) अधिकारी हैं. भारद्वाज वर्तमान में शिक्षा मंत्रालय में निदेशक के रूप में कार्यरत हैं.

June 03, 2026

जेईई की गर्ल्स टॉपर की कहानी, तैयारी के लिए जब पूरे परिवार ने शहर ही बदल दिया

जेईई की गर्ल्स टॉपर की कहानी, तैयारी के लिए जब पूरे परिवार ने शहर ही बदल दिया
नई दिल्ली : बीते 15 दिनों से ही आरोही देशपांडे के दिन देर से शुरू हो रहे हैं. उठने के बाद वह या तो लॉर्ड ऑफ़ द रिंग्स त्रयी (ट्राइलॉजी) पढ़ती हैं या फ़िल्में देखती हैं.

लगभग चार साल बाद उनकी ज़िंदगी में यह सुकून लौटा है. लेकिन सोमवार, 1 जून से यह शांति भी चली गई है. वजह है रिश्तेदारों और परिचितों के लगातार बधाई वाले फ़ोन.

इस साल आरोही देशपांडे ने जेईई एडवांस्ड में देशभर की लड़कियों में पहला स्थान हासिल किया है. उन्होंने 360 में से 280 अंक पाकर कुल रैंकिंग में 77वाँ स्थान पाया.
उनका शानदार प्रदर्शन सिर्फ़ एडवांस्ड तक सीमित नहीं रहा. जेईई मेन्स में उन्होंने 99.996 पर्सेंटाइल स्कोर किया. उन्होंने 12वीं में 97.8% और 10वीं में 96.7% अंक हासिल किए थे.

आरोही की यह यात्रा नौवीं कक्षा से शुरू हुई. पुणे के लोकसेवा ई-स्कूल में पढ़ते हुए उन्होंने तय किया कि उन्हें इंजीनियरिंग में करियर बनाना है. इस फ़ैसले पर उनके परिवार में मौजूद इंजीनियरों की बड़ी संख्या का असर था.

आरोही बताती हैं, "मुझे गणित अच्छा लगता था. इसके अलावा मेरे परिवार में कई इंजीनियर हैं. उन्हें देखकर मुझे लगा कि मुझे भी इंजीनियरिंग करनी चाहिए. इसके बाद मैंने तैयारी शुरू कर दी. उससे पहले तक मैंने अपने लिए कोई ख़ास, ठोस लक्ष्य तय नहीं किया था."

इसके बाद पूरा परिवार उनके इस लक्ष्य को पूरा करने में जुट गया. पहला क़दम था पुणे छोड़ने का.
एक प्रमुख न्यूज समाचार एजेंसी से बातचीत में उनके पिता प्रसाद देशपांडे ने कहा, "कोविड-19 महामारी के दौरान वह सातवीं और आठवीं में पढ़ रही थी. उस समय हमें कुछ ऑनलाइन लेक्चर मिले. इन्हें देखते हुए हमें पता चला कि ज़्यादातर प्रोफ़ेसर कोटा से हैं. इसलिए हमने कोटा और वहाँ की अकादमियों के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया."
इसके बाद पूरे परिवार ने कोटा शिफ़्ट होने का फ़ैसला किया. आरोही के पिता आईटी सेक्टर में काम करते हैं, जबकि उनकी माँ सिविल और एनवायरनमेंटल इंजीनियर हैं.

कोविड के बाद दोनों ने 'वर्क फ्रॉम होम' का विकल्प चुना. पूरा परिवार- आरोही, उनका छोटा भाई और माता-पिता कोटा में बस गए. वहां आरोही की पढ़ाई शुरू हो गई.

उन्होंने यह भी इंतज़ाम किया कि जब माता‑पिता को हर महीने अपनी कंपनियों में जाना पड़े, तो उसके लिए पहले से व्यवस्था हो.

चूंकि शहर में उनके कोई परिचित नहीं थे, इसलिए कोटा में उनके चार साल लगभग पूरी तरह परिवार तक ही सीमित रहे, सामाजिक मेल-जोल लगभग नहीं रहा. पिता की अपनी कंपनी की हैदराबाद और माँ की गुरुग्राम यात्रा भी आरोही के शेड्यूल को ध्यान में रखकर तय की जाती थी.

हालांकि पुणे छोड़ने का फ़ैसला दोनों के लिए आसान नहीं था. आरोही बताती हैं, "मेरी नानी पुणे में रहती थीं. मेरे दोस्त भी वहीं थे. मुझे बुरा लगा क्योंकि मुझे सबको पीछे छोड़ना पड़ा. कोटा आने के बाद भी मैं उन्हें याद करती थी. लेकिन आख़िरकार मैंने पढ़ाई पर ध्यान देने का फ़ैसला किया."

कोटा में उन्होंने क्लासेस जॉइन कीं और बोर्ड परीक्षाओं की पढ़ाई शुरू की. लेकिन असली ध्यान हमेशा जेईई पर रहा. आरोही कहती हैं कि उनकी पढ़ाई निश्चित घंटे पढ़ने की योजना पर आधारित नहीं थी.

वह बताती हैं, "मैंने बस यह तय किया था कि दिन का जो भी काम दिया जाएगा, उसे पूरा करना है. जितना समय लगे, उतना दूँगी. कभी छह घंटे लगते, कभी सात. जब तक काम पूरा न हो, मैं रुकती नहीं थी."

शुरुआती दौर में रविवार का दिन आराम के लिए मिलता था. माता-पिता बताते हैं कि समय बीतने के साथ उन्होंने आराम का वह समय भी कम कर दिया.

आरोही के पिता बताते हैं, "स्कूल के दिनों में आरोही को पेंटिंग और पढ़ने का शौक़ था. लेकिन आख़िरी कुछ महीनों में उन्होंने सब कुछ रोक दिया ताकि पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान लगाया जा सके."

कड़ी मेहनत के बावजूद उन्हें कुछ मॉक टेस्ट में असफलता का सामना करना पड़ा. लेकिन इससे उनका लक्ष्य नहीं डगमगाया. आरोही याद करती हैं, "कभी शिक्षक कठिन पेपर बना देते थे, कभी मैं ग़लतियाँ कर देती थी. जब भी ऐसा होता, मैं देखती कि कहाँ ग़लती हुई और उसी हिस्से पर ज़्यादा ध्यान देती."

उनके पिता प्रसाद देशपांडे कहते हैं कि इस दौरान माता-पिता का सहयोग बेहद अहम रहा.

वह कहते हैं, "अगर सब कुछ बच्चों पर छोड़ दिया जाए तो उन पर बहुत दबाव पड़ता है. इसलिए परिवार के तौर पर हमने तय किया कि जब भी उसे ज़रूरत हो, हम उसका साथ देंगे."

जेईई एडवांस्ड परीक्षा के दिन आरोही को अंदाज़ा भी नहीं था कि वह इतनी बड़ी सफलता हासिल करेंगी.

वह कहती हैं, "मैंने अपनी पूरी कोशिश की. लेकिन परीक्षा ख़त्म होने के बाद भी मुझे लगा कि मैं और बेहतर कर सकती थी." आंसर कीज़ देखने के बाद भी उन्हें अपने अंकों पर भरोसा नहीं था. हालाँकि उनके शिक्षक लगातार कहते रहे कि वह टॉप 100 में आएँगीं.

आरोही मानती हैं कि उनकी 77वीं रैंक और 280 अंक उनकी उम्मीद से कहीं ज़्यादा थे. वह साफ़ कहती हैं कि अपनी रैंक से खुश हैं, लेकिन अगर कोई और लड़की उनसे ऊपर आती तो उन्हें और भी अच्छा लगता. वह यह भी ज़ोर देकर कहती हैं कि इस साल कई लड़कियों ने जेईई में शानदार प्रदर्शन किया है.

अब उनका परिवार हैदराबाद में बस गया है. आरोही का सपना है कि वह आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर इंजीनियरिंग करें.

यूं तो यह महत्वपूर्ण मुकाम है, लेकिन उनके माता-पिता लगातार याद दिलाते हैं कि यह तो बस शुरुआत है. उनका छोटा भाई भी जेईई की तैयारी शुरू कर चुका है.

माता-पिता उन्हें यह भी समझा रहे हैं कि इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद देश के लिए योगदान देना उनका असली लक्ष्य होना चाहिए.

फ़िलहाल, आरोही रिश्तेदारों से मिलने, फ़िल्में देखने और किताबें पढ़ने में व्यस्त और खुश हैं.
June 03, 2026

केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना होगी सर्वोच्च प्राथमिकता: उपायुक्त डाॅ. वैशाली शर्मा

- केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना होगी सर्वोच्च प्राथमिकता: उपायुक्त डाॅ. वैशाली शर्मा

-जींद में नई उपायुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने संभाला पदभार
जींद : भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी डॉ. वैशाली शर्मा ने मंगलवार को जींद जिले की उपायुक्त (डीसी) के रूप में अपना पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालने के उपरांत उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ परिचयात्मक बैठक कर जिले की प्रशासनिक व्यवस्थाओं एवं विकास कार्यों की जानकारी प्राप्त की।
उपायुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने कार्यभार संभालने के उपरांत अधिकारियों के साथ जिले में चल रहे विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी, जिसमें सभी विभागों के विभागाध्यक्षों का साथ और सहयोग होना बहुत महत्वपूर्ण और आवश्यक है। उपायुक्त ने अधिकारियों के साथ जिले के विकास, जनसेवाओं की गुणवत्ता तथा प्रशासनिक कार्यों की प्रगति को लेकर भी चर्चा की और कहा कि जनहित से जुड़े मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित किया जाए।
बता दें कि वर्ष 2017 बैच की आईएएस अधिकारी डॉ. वैशाली शर्मा ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अपनी प्रशासनिक सेवाओं की शुरुआत पुन्हाना (मेवात) में उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) के रूप में की थी। इसके पश्चात उन्होंने नारायणगढ़ में एसडीएम, करनाल में एडीसी कुरुक्षेत्र में अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) आदि महत्वपूर्ण पदों पर सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं प्रदान की हैं। हाल ही में उनका स्थानांतरण करनाल नगर निगम आयुक्त से बतौर उपायुक्त जींद हुआ है।