August 03, 2026
विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रों के उच्चारण वैदिक परंपरा के अनुरूप घी एवं हवन सामग्री की आहुतियां अर्पित कर किया गया अंतिम संस्कार
विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रों के उच्चारण वैदिक परंपरा के अनुरूप घी एवं हवन सामग्री की आहुतियां अर्पित कर किया गया अंतिम संस्कार
जींद : अंतिम संस्कार वैदिक रीति-रिवाज एवं आर्य समाज पद्धति के अनुसार अत्यंत श्रद्धा एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया तथा परिवारजनों और उपस्थित श्रद्धालुओं ने वैदिक परंपरा के अनुरूप घी एवं हवन सामग्री की आहुतियां अर्पित कर दिवंगत आत्मा की शांति और सद्गति के लिए प्रार्थना की।
अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने वैदिक संस्कृति के महत्व को आत्मसात करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। आर्य समाज पद्धति से संपन्न इस संस्कार में अनावश्यक आडंबरों से दूर रहकर सादगी, वैज्ञानिक सोच और वैदिक परंपराओं का पालन किया गया। इस विधि में हवन के माध्यम से वातावरण की शुद्धता और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी दिया गया।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने कहा कि स्वर्गीय श्रीमती मूर्ति देवी का संपूर्ण जीवन सादगी, संस्कार, सेवा और धार्मिक मूल्यों के प्रति समर्पित रहा। उनके व्यक्तित्व से परिवार ही नहीं, बल्कि समाज के अनेक लोगों को भी प्रेरणा मिली। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा ईश्वर से प्रार्थना की कि वे पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।