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Friday, July 17, 2020

प्रशिक्षु बन गया फर्जीवाड़े का एक्सपर्ट :ऑफिस के हर काम से वाकिफ था अतुल, अपरेंटिस पूरी होने के बाद भी ली गई उसकी मदद

प्रशिक्षु बन गया फर्जीवाड़े का एक्सपर्ट ऑफिस के हर काम से वाकिफ था अतुल, अपरेंटिस पूरी होने के बाद भी ली गई उसकी मदद

जींद : ( संजय तिरँगाधारी ) महिला एवं बाल विभाग में कंप्यूटर की अपरेंटिस करने आए युवक ने अपने काम से पहले जीता कर्मचारियों-अधिकारियों का दिल, फिर किया 8.65 लाख रु. का फर्जीवाड़ा

सवाल ये- एक साथ खातों में कैसे आ गई पूरी राशि


मिर्चपुर गांव का 27 वर्षीय युवक अतुल कंप्यूटर का पूरा एक्सपर्ट था। इसके साथ-साथ वह महिला एवं बाल विकास विभाग के हर कामकाज से वाकिफ था। विभाग के कर्मचारियों, अधिकारियों के सामने जब भी किसी कामकाज में कोई दिक्कत आती तो उसको याद किया जाता था। इसी वजह से कंप्यूटर डिप्लोमा की अपरेंटिस करने के बाद भी उसका विभाग में आना-जाना लगा रहा। किस सीडीपीओ की पोर्टल की क्या आईडी है और पासवर्ड है। इसके बारे में उसको किसी से पूछने तक की जरूरत नहीं थी।

कर्मचारियों व अधिकारियों का उस पर पूरा विश्वास व काम की नॉलेज के चलते उसने प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में 8.65 लाख रुपए के फर्जीवाड़े को आसानी से अंजाम दे दिया। इस फर्जीवाड़े में सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि लाभार्थियों के खातों में एक साथ पूरी 5 हजार रुपए की सहायता राशि कैसे आ गई। जबकि यह 3 किस्तों में आती है।
कई दिन पहले जब उसके द्वारा किए फर्जीवाड़े का महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को पता चला तो उन्होंने इसको दबाने के भी प्रयास किए। अधिकारियों ने अतुल को ऑफिस बुलाकर उससे किए गए फर्जीवाड़े के बारे में पूछा। इसके बाद अधिकारियों ने फर्जीवाड़े की राशि जमा कराने के निर्देश दिए। इसके लिए बाकायदा अतुल से शपथ पत्र भी लिया गया। लेकिन जब निर्धारित समय में अतुल ने राशि जमा नहीं कराई तो फिर सीडीपीओ उचाना उषा आनंद ने मामले की शिकायत पुलिस को दी।

जानिए... क्या है प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना

कामकाजी महिलाओं के पोषण व उनका स्वास्थ्य ठीक रहे। इसके लिए जिले में जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना शुरू की गई थी। इस योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं को गर्भवती होने और टीकाकरण शुरू होने के बाद ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। इसके लिए महिला व उसके पति का आधार कार्ड, टीकाकरण की कॉपी और और उसके बाद बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र देना जरूरी है। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा संबंधित लाभार्थी के खाते में राशि डाली जाती है।
कैसे होता है आवेदन और कौन देता है मंजूरी : प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के आवेदन महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर के माध्यम से ऑनलाइन भरे जाते हैं। इसमें शुरुआत में पति-पत्नी का आधार कार्ड और गर्भवती को हुए टीकाकरण की काॅपी व बैंक खाते की कॉपी साथ में लगती है। इसके बाद आवेदन मंजूरी के लिए सीडीपीओ के पास जाता है। सीडीपीओ की मंजूरी के बाद पहले स्टेट मुख्यालय को और फिर केंद्र सरकार को भेजा जाता है। आवेदन करने के एक सप्ताह से 10 दिन के अंदर राशि खाते में आ जाती है।
3 बार मिलती है सहायता राशि

पहली किस्त : 1000 रुपए गर्भावस्था के समय पंजीकरण होने के बाद तुरंत खाते में आती है।

दूसरी किस्त : 2000 रुपए यदि लाभार्थी  प्रसवपूर्व एक बार जांच कर लेते हैं।

तीसरी किस्त : 2000 रुपए बच्चे का जन्म होने और उसका जन्म प्रमाण पंजीकरण करवाने के बाद खाते में आती है।

*फर्जीवाड़े पर उठ रहे हैं ये सवाल*

सवाल 1 : दिसंबर 2018 में अतुल की अपरेंटिस पूरी हो गई थी लेकिन कर्मचारी व अधिकारियों द्वारा मदद क्यों ली जा रही थी।

सवाल 2 : जिनके फाॅर्म भरे गए उनके खाते में एक साथ 5 हजार की पूरी राशि कैसे आ गई। जबकि यह 3 किस्तों में आती है।

सवाल 3 : अतुल से शपथ पत्र लेकर क्यों राशि जमा कराने के लिए कहा गया। उसी समय पुलिस को शिकायत क्यों नहीं दी गई।

सीधी बात- उषा मुवाल, डिस्ट्रिक प्राेग्राम ऑफिसर, (महिला एवं बाल विकास विभाग)
सवाल. इतने लंबे समय से ये फर्जीवाड़ा चलता रहा अधिकारियों को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी।
जवाब: जिलास्तर पर इस योजना के तहत कोई काम नहीं होता। ब्लॉक स्तर पर सीडीपीओ के माध्यम से ही ये योजना के फाॅर्म भरे जाते हैं और उन्हीं के द्वारा इनको मंजूरी दी जाती है।
सवाल : इस फर्जीवाड़े में विभाग के कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं इसके लिए क्या कोई कदम उठाया गया है।
जवाब. यदि उच्च अधिकारी मामले की विभागीय जांच के आदेश देते हैं तो वो भी करवाई जाएगी। मैं भी अपने स्तर पर इस मामले की जांच कर रही हूं।
सवाल. कितने लोगों के फाॅर्म भर कितने रुपए का यह फर्जीवाड़ा किया गया है।
जवाब. उचाना ब्लॉक में कुल 173 लोगों के फाॅर्म भरकर कुल 8 लाख 65 हजार रुपए की राशि का फर्जीवाड़ा किया गया है।

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