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Wednesday, July 15, 2020

स्कूल मनमानी नहीं करता तो जिला में आती टॉप रिजल्ट देख फूट-फूट कर रोई छात्रा जया

स्कूल मनमानी नहीं करता तो जिला में आती टॉप रिजल्ट देख फूट-फूट कर रोई छात्रा

स्कूल मनमानी नहीं करता तो जिला में आती टॉप रिजल्ट देख फूट-फूट कर रोई छात्रा जया छात्रा ने स्कूल के खिलाफ कार्रवाई हेतु पीएम, सीएम व शिक्षा विभाग को भेजी शिकायत अमान्य मदो की फीस को लेकर स्कूल ने छात्रा को रखा था शिक्षा से वंचित, रोका था रोल नंबर

रेवाड़ी, 14 जुलाई (पंकज कुमार ) :  सीबीएसई द्वारा जारी 12वीं की परीक्षा परिणाम में अपने नंबर 91 प्रतिशत देख छात्रा जया फूट-फूट कर रोने लगी और स्कूल प्रबंधकों पर इसका ठीकरा फोड़ने लगी। उसका कहना था कि अगर स्कूल प्रशासन मनमानी नहीं करता तो आज वह जिलाभर में टॉप करती। लेकिन स्कूल प्रबंधकों ने अमान्य मदो की फीस को लेकर उसे जहां शिक्षा से वंचित कर दिया था, वहीं उसका रोल नंबर तक रोक लिया था। जिससे वह भारी डिप्रेशन में थी और परीक्षा से मात्र दो दिन पूर्व स्कूल ने कोर्ट के दबाव में आकर उसे रोल नंबर दिया था। जिससे वह रोल नंबर लेने की दौड़ के चलते पढ़ाई नहीं कर पाई और दिमागी रूप से परेशान होने लगी। उसने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, उपायुक्त व एसपी को शिकायत कॉपी भेज कर स्कूल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। रोल नंबर दिलाने में मदद करने वाले एडवोकेट कैलाश चंद के साथ छात्रा मंगलवार को उपायुक्त व एसपी के द्वार भी पहुंची। 

जिला के गांव कंवाली निवासी छात्रा जया ने बताया कि वह डहीना स्थित एक निजी स्कूल की छात्रा है। उसने बताया कि परीक्षा से तीन माह पूर्व स्कूल ने उसे फीस को लेकर परेशान करना शुरू कर दिया था। गरीब परिवार से होने के कारण वह स्कूल के अमान्य मदो की फीस भरने में सक्षम नहीं थी। फीस को लेकर स्कूल प्रबंधकों द्वारा कई बार उसके अभिभावकों को स्कूल में बुलाया गया। पढ़ाई में होशियार होने के कारण अभिभावक भी स्कूल प्रबंधकों से बार-बार पढ़ाई जारी रखने की गुहार कर रहे थे। लेकिन स्कूल प्रबंधकों की मनमानी के आगे उनकी एक नहीं चली और उसे स्कूल से निकाल दिया गया और शिक्षा से वंचित कर दिया गया। काफी मशक्कत के बाद उसे स्कूल तो दोबारा बुला लिया गया, लेकिन उसके रोल नंबर रोक लिये। जया का आरोप है कि स्कूल प्रबंधकों ने कहा था कि फीस जमा कर दो और रोल नंबर ले जाओ। जिसके बाद वह रोल नंबर को लेकर बार-बार स्कूल जाती रही, लेकिन उसकी नहीं सुनी गई। उसने भी हार मान ली थी कि अब वह परीक्षा नहीं दे सकती। उसके सपने दम तोड़ने लग गए थे। पूरे साल की मेहनत पर पानी फिरता देख मन में अजीब-अजीब ख्याल भी आने लगे थे। लेकिन जब उसने समाचार पत्र में पढ़ा कि जिला की एक छात्रा ने कोर्ट की मदद से रोल नंबर प्राप्त किये हैं तो उसकी भी आस जगी और उस छात्रा की मदद करने वाले एडवोकेट कैलाश चंद से संपर्क किया। 

कैलाश चंद ने बताया कि अमान्य मदो की फीस को लेकर स्कूल न तो शिक्षा से वंचित कर सकता है और न ही रोल नंबर देने से। छात्रा जया व उसके अभिभावकों द्वारा कोर्ट में शिकायत डाली गई। परीक्षा को केवल चार दिन ही बचे थे। परीक्षा को लेकर जहां छात्रा जया चिंतित थी, वहीं हम इस मामले को लेकर लगातार प्रयास कर रहे थे। आखिर में स्कूल ने कोर्ट के सामने घुटने टेके और परीक्षा से मात्र दो दिन पूर्व जया को रोल नंबर जारी किये। उन्होंने कहा कि छात्रा जया ने अब उक्त स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर शिकायत भेजी है। वह उसकी मदद को फिर से तैयार है। छात्रा के पिता प्रवीण कुमार ने बताया कि 10वीं में अच्छे अंक प्राप्त करने के बाद जया हमेशा कहती थी कि वे स्कूल ही नहीं जिला में टॉप करेगी। लेकिन स्कूल प्रबंधकों की मनमानी ने उसकी बेटी के भविष्य को खराब कर दिया। भारी डिप्रेशन के बावजूद जया 91 प्रतिशत अंक लेकर आई है अगर उसे स्कूल का साथ मिल जाता तो उसे यकीन है कि वह टॉप जरूर करती। 

1 comment:

  1. Ye school ka kya naam hai. Is school ki management ko jail hone chaiye.

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