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Thursday, October 8, 2020

अवैध खनन:टांगरी नदी की हरियाणा-पंजाब सीमा का फायदा उठा रहा माफिया रात में निकाल रहा रेत, विभाग का दावा- हम रोज पकड़ रहे वाहन

अवैध खनन:टांगरी नदी की हरियाणा-पंजाब सीमा का फायदा उठा रहा माफिया रात में निकाल रहा रेत, विभाग का दावा- हम रोज पकड़ रहे वाहन

अम्बाला : हरियाणा-पंजाब की सीमा से गुजर रही टांगरी नदी में दिन ढलते ही खनन का सिलसिला शुरू हो जाता है। अगले दिन सुबह 8 बजे तक यह खेल चलता है। हंडेसरा निवासी एवं रिटायर्ड टेलीकॉम इंजीनियर सरदारा सिंह ने मामले की शिकायत डीसी अम्बाला और मोहाली को दी है। डीसी मोहाली के आदेशों पर माइनिंग ऑफिसर टांगरी नदी का मुआयना कर चुके हैं। पंजाब के मोहाली माइनिंग ऑफिसर ने शिकायतकर्ता के साथ टांगरी नदी का दौरा करने के बाद तर्क दिया है कि टांगरी नदी की निशानदेही के लिए वह लिखेंगे।
इसके बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि टांगरी नदी का कितना हिस्सा पंजाब में है। पंजाब के हिस्से में कितना खनन हुआ है। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। डीसी अम्बाला को भेजी गई शिकायत के बाद अभी तक माइनिंग अधिकारियों ने शिकायतकर्ता के साथ कोई संपर्क नहीं किया है। यह हिस्सा नारायणगढ़ विधानसभा सीमा के अधीन आता है।

डस्ट, कोरसेंट में मिक्स होने से रेत की डिमांड

सरदारा सिंह ने बताया कि हंडेसरा के स्टोन क्रैशर है। यहां से एक नंबर में कोरसेंट, डस्ट और बजरी हरियाणा और पंजाब में सप्लाई होता है। टांगरी नदी का रेत डस्ट और कोरसेंट में मिलाकर बेचा जा रहा है। इसलिए टांगरी नदी में अवैध माइनिंग का खेल करीब 15 साल से चलता आ रहा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि खनन माफिया को हरियाणा और पंजाब पुलिस के नाकों से कोई दिक्कत नहीं है। रात के अंधेरे में तीन नाके क्रॉस आराम से हो जाते हैं। खनन माफिया नाके क्रॉस करने के लिए आरटीए पर नजर रखते हैं ताकि ओवरलोडिंग के दौरान पकड़े न जाएं।

टांगरी नदी से तीन रास्ते, जिनसे होता है खनन

बुधवार को टांगरी नदी में शिकायतकर्ता के साथ दैनिक भास्कर संवाददाता भी पहुंचे। शिकायतकर्ता संवाददाता को हंडेसरा से सीधे बुढाखेड़ा गांव में ले गए। शाम होते ही जिस रास्ते से चोरी छिपे ट्रैक्टर-ट्राॅली टांगरी नदी के बांध पर चढ़ते हैं, यह रास्ता मिलिट्री इंजीनियर वाटर वर्कर्स के कुएं के पास से टांगरी नदी में उतरता है। फिर टांगरी से रेत निकाला जाता है। ट्रैक्टर-ट्रॉली भर जाने के बाद आरटीए की लोकेशन मिलने के बाद रूट तय किया जाता है कि किस रास्ते से ट्रैक्टर-ट्रॉली निकाली जानी है। यदि पंजोखरा-हंडेसरा रोड पर सख्ती होती है खनन माफिया टांगरी नदी से होते हुए जटवाड़ पहुंच जाते हैं। जटवाड़ से फिर नारायणगढ़ रोड और फिर गांव के रास्ते से होते हुए कैंट में आ जाते हैं। यदि टांगरी बांध पर सख्ती नहीं होती तो फिर इसी रास्ते से ट्रैक्टर-ट्रॉलियां निकाल ली जाती हैं।

शिकायतकर्ता के 3 सुझाव, जिससे खनन रुक सके

1. पंजाब-हरियाणा सीमा पर खनन रोकने के लिए दोनों सरकार एक कोर्डिनेट टीम तैयार करे। दोनों सरकारों को अवैध खनन से राजस्व नुकसान रुकेगा।
2. पंजाब और हरियाणा पुलिस की एरिया एसएचओ और नाके पर तैनात जवान की जिम्मेदारी फिक्स की जाए। ट्रैक्टर निकला तो कार्रवाई होगी। एक सीसीटीवी लगाकर निगरानी की जाएं।
3. कोआर्डिनेट टीम टांगरी नदी का दिन में मुआयना करे ताकि पता चल सके कि खनन रुका है या फिर हो रहा है।
जटवाड़ शराब फैक्ट्री से पहले बांध से आते हैं
नारायणगढ़ की तरफ जाने वाले रोड पर जटवाड़ की जमीन में शराब फैक्टरी लगी हुई है। फैक्टरी से पहले टांगरी नदी का एक बांध लगा हुआ है। यह बांध नारायणगढ़ रोड से बुढाखेड़ा गांव तक जाता है। यह सुनसान रास्ता है। इस रास्ते से किसी तरह का आवागमन नहीं होता। इसलिए खनन-माफिया रात के समय के कोई गाड़ी या बाइक देख कर पहले ही सतर्क हो जाते हैं। कोई अधिकारी या माइनिंग टीम टांगरी नदी में इस रास्ते से खनन रोकने के लिए पहुंचती भी नहीं है। इसलिए यह रास्ता खनन माफिया के लिए मुफीद है। यदि यहां चौकसी होती है तो फिर टांगरी बांध की बजाए जटवाड़ की तरफ से ट्रैक्टर-ट्रॉली को लाया जाता है।
टांगरी नदी के किसी भी हिस्से में माइनिंग की इजाजत नहीं है। हमारी टीम रोजाना चालान कर रही है। ट्रैक्टर-ट्रॉली को पकड़ा भी जा रहा है। चार ट्रैक्टर-ट्रॉली को हमने पकड़कर पटवी चौकी के हवाले किया हुआ है और भारी जुर्माना भी लगाया गया है ताकि माइनिंग को रोका जा सके। -भूपेंद्र सिंह, माइनिंग ऑफिसर, अम्बाला।

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