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Thursday, February 11, 2021

किसानों ने फिर भरी हुंकार, 18 फरवरी को रोकेंगे ट्रेन के पहिए

किसानों ने फिर भरी हुंकार, 18 फरवरी को रोकेंगे ट्रेन के पहिए 


नई दिल्ली :  कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली के कई बॉर्डर्स पर आंदोलन कर रहे किसानों ने एलान किया है कि वे 18 फरवरी को 4 घंटे तक देश भर में रेल रोकेंगे। इसका वक़्त दिन में 12 से 4 बजे तक निर्धारित किया गया है।किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने फरवरी के महीने भर में होने वाले प्रदर्शनों के बारे में जानकारी दी। मोर्चा के नेताओं ने कहा कि 12 फरवरी को राजस्थान में सभी टोल को फ्री कर दिया जाएगा। इससे पहले हरियाणा और पंजाब में किसान कई बार टोल को फ्री कर चुके हैं। 
5 फरवरी को किसानों ने चक्का जाम का आह्वान किया था और यह शांतिपूर्ण रहा था। 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान जिस तरह कुछ उपद्रवी तत्वों ने हिंसा का सहारा लिया, उसके बाद किसान संगठन बेहद सतर्कता बरत रहे हैं। चक्का जाम वाले दिन पंजाब और हरियाणा में कई जगहों पर प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे थे और यहां जाम का ख़ासा असर देखने को मिला था। इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में भी किसानों ने प्रदर्शन किया था। 
संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बयान में यह भी घोषणा की कि राजस्थान में 12 फरवरी से टोल संग्रह नहीं करने दिया जाएगा। बयान में कहा गया है कि पूरे देश में 18 फरवरी को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ‘रेल रोको’ अभियान चलाया जाएगा। तीन कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने की मांग को लेकर इस महीने के शुरू में उन्होंने 3 घंटे के लिए सड़कों को अवरुद्ध किया था। 
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ. दर्शन पाल ने बताया कि किसानों द्वारा 12 फरवरी से राजस्थान के सभी रोड के टोल प्लाजा को टोल फ्री कर दिया जाएगा। 14 फरवरी को देशभर में कैंडल मार्च, ‘मशाल जुलूस’ और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें पुलवामा हमले में शहीद सैनिकों के बलिदान को याद किया जाएगा। 16 फरवरी को किसान सर छोटूराम की जयंती पर देशभर में एकजुटता दिखाएंगे।
16 फ़रवरी को सर छोटू राम की जयंती के मौक़े पर भी किसान सरकार को अपनी एकजुटता दिखाएंगे। 
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि किसान इसलिए अब भी आंदोलन कर रहे हैं क्योंकि केन्द्र सरकार के मंत्री तीन नए कृषि कानूनों का कोई ‘विकल्प’ पेश करने में विफल रहे हैं।  लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन पर एसकेएम नेता दर्शन पाल ने कहा कि किसान संगठन के नेता किसानों के ‘असली’ मुद्दे उठा रहे हैं। पाल ने एक वीडियो संदेश में कहा कि आंदोलन इसलिए जारी है क्योंकि 11 दौर की बातचीत के बाद भी मोदी सरकार के मंत्री नये कानूनों या न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कोई ठोस विकल्प सामने नहीं ला पाए।
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलनकारी किसान केंद्र में कोई सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसान नेता आंदोलन के प्रसार के लिए देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा करेंगे। टिकैत ने सिंघू बॉर्डर पर किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि 3 नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि केंद्र कृषकों के मुद्दों का समाधान नहीं कर देता। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन (केंद्र में) का हमारा कोई उद्देश्य नहीं है। सरकार को अपना काम करना चाहिए। 
हम कृषि कानूनों को निरस्त कराना और एमएसपी पर कानून चाहते हैं। टिकैत ने यह भी कहा कि संयुक्त किसान मोर्चे की एकता अक्षुण्ण है और सरकार को किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशभर में बड़ी बैठकों का आयोजन कर और 40 लाख ट्रैक्टरों को शामिल कर आंदोलन को विस्तारित किया जाएगा। टिकैत ने कहा कि किसान नेता आंदोलन के प्रसार के लिए विभिन्न राज्यों का दौरा करेंगे।
कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ उत्तर भारत के कुछ राज्यों में हो रही किसान महापंचायतों को लेकर माहौल खासा गर्म है। 26 जनवरी के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर हरियाणा, राजस्थान और उत्तरांखड में हुई महापंचायतों में जितनी बड़ी संख्या में लोग उमड़े हैं, उससे पता चलता है कि यह आंदोलन कई राज्यों में फैल चुका है।

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