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Monday, February 22, 2021

जिले को एनीमिया मुक्त करने के लिए राष्टीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत 5 लाख बच्चो को दी जाएगी एल्बेंडाजोल टेबलेट, मिलेगी पेट मे होने वाले कीड़ो से निजात

जिले को एनीमिया मुक्त करने के लिए राष्टीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत लांच किया अभियान

- 5 लाख बच्चो को दी जाएगी एल्बेंडाजोल टेबलेट, पेट मे होने वाले कीड़ो से मिलेगी निजात 
-22 फरवरी से 3 मार्च तक जिले भर में चलेगा कार्यक्रम 
-एक साल से लेकर 19 साल तक के बच्चो को खिलाई जाएगी एल्बेंडाजोल टेबलेट 

जींद :( संजय तिरँगाधारी ) सोमवार को स्वास्थ्य विभाग ने जिले को एनीमिया मुक्त करने के लिए साप्ताहिक कार्यक्रम को हरी झंडी दी। इस कार्यक्रम के तहत जिले में 4, 99, 388 बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोली फ्री में खिलाई जाएगी। इसके अलावा जो लडकिया 20 साल से 24 साल के बीच की उम्र में है और गर्भवती नही है और बच्चो को दूध नही पिलाती है उनको भी ये एल्बेंडाजोल टेबलेट दी जाएगी। ऐसी महिलाओं की जिले में 36,838 संख्या है। 

स्वास्थ्य विभाग में  डिप्टी सिविल सर्जन डॉक्टर रमेश पांचाल ने बताया की इस टेबलेट को कोई साइड इफ़ेक्ट भी नही है और पूरी तरह से सुरक्षित है। 
डॉक्टर पांचाल ने बताया की सिविल सर्जन मंजीत सिंह की अगुवाई में आज इस अभियान को हरी झंडी दी गई है, जो 3 मॉर्च तक चलेगा। 22 फरवरी से लेकर 28 फरवरी तक जिले में इस अभियान को घर घर चलाया जाएगा। इसके बाद 3 मॉर्च तक ये घर घर जाकर ये सुनिश्चित किया जाएगा की कोई बच्चा छूट न गया हो। इस अभियान की सफलता के लिए जिले में 12 मोबाइल टीम लगाई गई है जो अलग अलग खंडों में तैनात रहेगी। साथ ही 12 आपातकालीन टीम भी लगाई गई है ताकि किसी बच्चे को उल्टी या कोई अन्य शिकायत होती है तो उसका इलाज किया जा सके। इस कार्यक्रम को आंगनवाड़ी, एएनएम और आशा वर्कर घर घर चलाएगी। 19 साल तक की उम्र के बच्चों के पेट में होने वाले खून चूसने वाले कीड़ों को मारने के लिए 28 फरवरी तक चलने वाले एनडीडी अभियान का सोमवार को डा. साधना और सिविल सर्जन डा. मंजीत सिंह ने शुभारंभ किया है। शहर की बुढ़ा बाबा बस्ती के आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में दोनों अधिकारियों ने बच्चों को अपने हाथों से एलबैंडाजोल की गोलियां खिलाई। 
आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यालय से एनडीडी, एमएचएस, डब्ल्यूआईएफएस की स्टेट कन्सलटैंट डा. साधना खासतौर पर पहुंची। सिविल सर्जन डा.मंजीत सिंह, डिप्टी सिविल सर्जन डा.आरएस पूनिया, स्कूल हैल्थ के डिप्टी सिविल सर्जन डा.रमेश पांचाल, आरकेएसके की डीएएचओ डा.पुष्पा जागलान, एएमओ डा.भव्या खासतौर पर मौजूद रहे। डा.साधना और सिविल सर्जन डा.मंजीत सिंह ने बच्चों को एलबैंडाजोल की गोलियां खिलाते हुए कहा कि एनएचएम के तहत यह कार्यक्रम 19 साल तक की उम्र के बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए चलाया जा रहा है। इस उम्र के बच्चों के पेट में खून चूसने वाले कीड़े पैदा हो जाते हैं। एलबैंडाजोल की गोलियां खाने से इस तरह के कीड़े मर जाते हैं और बच्चे स्वस्थ रहते हैं। साल में 2 बार एनडीडी अभियान के तहत बच्चों को एलबैंडाजोल की गोलियां खिलाई जाती हैं। आशा वर्कर, एएनएम और आंगनबाड़ी वर्करों को घर-घर जाकर बच्चों को गोलियां खिलाने का काम सौंपा गया है। यह गोलियां पूरी तरह से सुरक्षित हैं। सावधानी केवल यह बरतनी होती है कि यह गोलियां बच्चों को खाली पेट नहीं खिलाई जाएं। फिर भी गोलियां खाने से किसी बच्चे को दिक्कत होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता और एम्बुलैंस आदि के सभी इंतजाम जिले में किए गए हैं। 

*-कैसे लें गोली-*

डॉक्टर पांचाल ने बताया की इस गोली को पीसकर या चबाकर खाना होता है। जो चबाकर नही खा सकते वो इसको पीसकर खा सकते है। एक साल से दो साल के बच्चो को आधी गोली दी जाएगी। एक गोली 400 मिलीग्राम की होती है और 2 साल से लेकर 19 साल के बच्चो को एक टेबलेट दी जाएगी। 

*-इसके लक्षण और फायदे -*

जिन बच्चो में खून की कमी होती है, पढ़ाई में मन नही लगता है, मरोड़ी लगती है, शरीर में कमजोरी, शरीर विकसित नही होना, दिमाग केंद्रित नही होना आदि सब प्रकार के लक्षणों में इसका फायदा होता है। उन्होंने बताया की ग्रामीण इलाके के बच्चो को सबसे ज्यादा समस्या पाई जाती है। जो बच्चे हाथ नही धोते, मिट्टी में ज्यादा खेलते है और सफाई नही करते उनमें ज्यादा कमी पाई जाती है। इस टेबलेट को बच्चो को हर हाल में लेना चाहिए ताकि बच्चो का सम्पूर्ण विकास हो सके।

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