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Wednesday, June 9, 2021

बोर्ड परीक्षाएं रद होने के बाद अंकों को लेकर चिंता बढ़ी

बोर्ड परीक्षाएं रद होने के बाद अंकों को लेकर चिंता बढ़ी
बहादुरगढ़: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के साथ ही हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने भी कोविड संक्रमण के चलते बोर्ड परीक्षाएं निरस्त कर दिया है। अब सबकी निगाहें मार्किंग फार्मूले पर टिकी हुई है। ऐसा लगता है कि 12वीं में भी 10वीं की भांति आंतरिक परीक्षा के अंकों को आधार बनाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो मेधावियों को बोर्ड परीक्षा के नतीजे बहुत अच्छे नहीं आने का अंदेशा है। ऐसे में 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के साथ आईआईटी, जेईई, नीट आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र भी मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं।

दरअसल, आईआईटी, सिविल सेवा, जेईई आदि की तैयारी के साथ ये छात्र 12वीं पास करने के बाद दिल्ली, कुरुक्षेत्र व चंडीगढ़ जैसे टॉप विश्वविद्यालयों में स्नातक (बीए, बीएससी, बीकॉम) के लिए जाते हैं। बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे प्रदर्शन के लिए केंद्रित रहने वाले छात्र 11वीं और 12वीं के आंतरिक मूल्याकंन की परीक्षाओं पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। मौजूदा वक्त में जहां एट्रेंस और मेरिट पर बहस चल रही है। वहीं छात्रों के लिए इतनी ही राहत है कि सभी बोर्ड के वरीयता तय करने का फार्मूला एक जैसा ही होगा। हालांकि एक्सपर्ट मानते हैं कि एंट्रेस या मेरिट दोनों ही मामलों में मेधावी बच्चों को फायदा होने के आसार कम है। सीबीएसई और हरियाणा बोर्ड की परीक्षाएं निरस्त होने और मार्किंग के आधार पर रिजल्ट घोषित करने की घोषणा ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे छात्रों की नींद उड़ा दी है। छात्र-छात्राएं आंतरिक परीक्षाओं के आधार पर मूल्यांकन किए जाने की संभावना को लेकर जहां काफी चिंतित हैं। वहीं आईआईटी, नीट, जेईई परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को अपनी तैयारी पर फोकस रखना चाहिए।
ऐसे समय में अगर परीक्षा कराई जाती, तो कोरोना का खतरा अधिक रहता। पढ़ाई पर फोकस अधिक देने वाले छात्र जरूर कुछ निराश होंगे, लेकिन सरकार का फैसला स्थिति को देखते हुए स्वागत योग्य है। हालांकि निर्णय लेने में एक महीने की देरी की गई। समय पर लिया गया निर्णय अभिभावकों के लिए ठीक रहता। आईआईटी, नीट और जेईई की परीक्षा की तैयारी करने वाले बच्चों को माइंडसेट तैयार करने में वक्त लगता है। - अनिल हुड्डा, अध्यापक बेशक शिक्षक के नजरिए व प्रतियोगी परीक्षाओं के मद्देनजर यह पीड़ादायी है। क्योंकि बोर्ड परीक्षा का निर्णय पूरे शैक्षणिक जीवन में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हालांकि बच्चा काबिल है, तो परीक्षा रद होने के बाद भी प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करेगा। स्टूडेंट्स 12वीं के बाद टॉप के कॉलेज में एडमिशन के लिए जाते है। उन्हें फोकस रखते हुए तैयारी करनी चाहिए। कोविड के खतरे के बीच परीक्षाएं रद करना विद्यार्थियों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए जरूरी था।  *महिमा छिल्लर, अध्यापिका*

हमारी तैयारी पूरी थी। यदि परीक्षा होती तो हमारे नंबर और भी अच्छे आते, इंटरनल असेसमेंट के आधार पर पता नहीं कैसे अंक मिलेंगे। आगे की पूरी पढ़ाई अब नंबरों पर ही अटकी है। दसवीं-बारहवीं के अंक पूरे करियर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। हालांकि कोविड को देखते हुए सरकार ने सही फैसला ही लिया होगा। परीक्षाओं को बार-बार स्थागित करने से बेहतर है कि रद कर दिया। - मेघना राठी, छात्रा बारहवीं परीक्षा को लेकर हमारी तैयारियां पूरी थी। उम्मीद थी कि जुलाई के पहले सप्ताह में परीक्षाएं होंगी मगर रद हो गई। सुरक्षा कारणों के चलते पेपर रद हुए यह तो ठीक है, लेकिन अब नंबरों को लेकर चिंता शुरू हो गई है। भविष्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। अब इंट्रेस पर ध्यान देंगे। बहरहाल, सभी के हित में ही सरकार का निर्णय है। परीक्षा होती तो मन को काफी तसल्ली मिलती। 
*चिराग छिल्लर, छात्र बारहवीं*

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