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Monday, September 6, 2021

सीआरएसयू गेट पर छात्रों ने जड़ा ताला

सीआरएसयू गेट पर छात्रों ने जड़ा ताला
-ऑनलाइन परीक्षाओं में शीशा लगाने का कर रहे विरोध
-परीक्षाओं में गलत ढंग से यूएमसी बनाने का भी है आरोप
जींद ÷ ( ब्यूरो , संजय कुमार ) चौ. रणबीर सिंह विश्वविद्यालय द्वारा आनलाइन परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए परीक्षार्थी के पीछे मिरर लगाने के फैसले और यूएमसी (अनफेयर मीन्स केस) के मामले में छात्र संगठन एबीवीपी, इनसो, एसएफआइ, एवीएस, यूएनएसआइ ने सोमवार को गेट पर ताला जड़ कर प्रदर्शन किया। छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर आनलाइन परीक्षाओं में गलत तरीके से यूएमसी बनाने के आरोप लगाए। छात्र संगठनों के प्रदर्शन के चलते डीएसपी पुष्पा खत्री और सदर थाना प्रभारी मनीष कुमार पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। गौरतलब है कि इस साल करीब 2300 विद्यार्थियों की यूएमसी बन चुकी हैं। अानलाइन परीक्षाओं में हो रही नकल को रोकने के लिए विश्वविद्यालय ने परीक्षार्थियों को अपने पीछे चार बाय तीन फीट का शीशा लगाने के निर्देश दिए हैं। जिसका छात्र संगठन विरोध कर रहे हैं। हालांकि प्रदर्शन के दौरान छात्र संगठनों में मतभेद दिखे। शीशे वाले विषय पर विद्यार्थियों में आपस में विवाद हो गया। कुछ विद्यार्थी शीशे की मांग का विरोध करते हुए धरने पर बैठे और कुछ ने शीशे की मांग के विरोध में विश्वविद्यालय के दोनों गेट बंद कर दिए। छात्र संगठनों ने एबीवीपी पर प्रदर्शन का विरोध करने और छात्रों को गेट पर ही रोक के रखने तथा धक्का-मुक्की करने के आरोप लगाए। जब विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कोई भी बाहर नहीं आया, तब शिव छात्र मोर्चा ने विरोध करते हुए अंदर जाने का प्रयास किया, तो पुलिस ने उनको बाहर निकाला। 
*-प्रैक्टिकल लेने आए प्रोफेसर गेट पर फंसे-*

गेट पर ताला लगा होने की वजह से विश्वविद्यालय में आने-जाने वालों को परेशानी हुई। दूसे विश्वविद्यालयों से प्रैक्टिकल लेने आए हुए प्रोफेसर की गाड़ियां विश्वविद्यालय के साथ चौकी में खड़ी करवाई गई और उन्हें पैदल ही विश्वविद्यालय के अंदर लाया गया। जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संगठनों से उनकी मांगों के बारे में जानकारी मांगी। छात्र संगठनों की मुख्य मांग विद्यार्थियों की यूएमसी हटाने, उत्तर पुस्तिका की लिखाई की जांच ना करने और शीशे के साइज को कम करने की थी। एबीवीपी, इनसो, एसएफआइ, एवीएस, यूएनएसआइ मांग रखी कि बीएड की परीक्षा में पीछे शीशा लगाने की शर्त को हटा दिया जाए। रजिस्ट्रार डा. राजेश बंसल ने छात्र संगठनों से ज्ञापन लेते हुए उनकी मांगें सुनी। 
*-विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार ने बातचीत में दिए ये आश्वासन-*

--जिन विद्यार्थियों की एक मिनट से कम इंटरनेट नेटवर्क बाधित होने पर और अपलोडिंग के समय यूएमसी बनी है। विश्वविद्यालय प्रशासन यूएमसी कमेटी से अनुरोध करेगा कि विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके पक्ष में निर्णय ले। 
--ज्यादा समय तक इंटरनेट बाधित रहने से जिन विद्यार्थियों की यूएमसी बनी, उनके बारे में विचार नहीं किया जाएगा। 
--अगर एक उत्तर पुस्तिका में लिखाई में स्वभाविक अंतर नहीं पाया गया, तो उस पर कोई यूएमसी नहीं बनाई जाएगी। उत्तर पुस्तिका में पूरी लिखाई या कुछ पेज विद्यार्थी की लिखाई से मेल नहीं खाते हैं, तो उसकी यूएमसी बनाई जाएगी। इसलिए जिन विद्यार्थियों ने उत्तर पुस्तिका खुद लिखी है, उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। 
*-चार बाय तीन के शीशे से रुकेगी नकल-*

शीशे वाले मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा की नकल माफिया द्वारा यूट्यूब पर जो वीडियो डाले गए थे, उसमें दो बाय तीन फीट के शीशे के साथ सफलतापूर्वक नकल करने के तरीके बताए गए हैं। जबकि चार बाय तीन फीट के शीशे के साथ नकल करने का कोई तरीका नकल माफिया खोज नहीं पाया है। इसलिए इस बात को मानना सीधे-सीधे नकल माफिया के साथ खड़ा होना है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य नकल रहित परीक्षा करवाना है। उत्तर पुस्तिका में कंप्यूटर और मोबाइल को विद्यार्थी के सिर से ऊपर तथा दाएं बाएं को कैमरे में दिखाता हो, वो शीशा मान्य होगा। 
-डिप्टी सीएम से मिलेंगे छात्र-

इनसो के जिला चेयरमैन दीपक देशवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन फर्जी यूएमसी बनाकर विद्यार्थियों के भविष्य को खराब करने की कोशिश कर रहा है। सीआरएसयू सबसे छोटा विश्वविद्यालय है और यूएमसी सबसे ज्यादा बनी हैं। उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से मिलकर विद्यार्थियों को दी जा रही मानसिक प्रताड़ना से अवगत करवाया जाएगा और उचित कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि शीशे का साइज छोटा किया जाए या बड़ा शीशा विश्वविद्यालय खुद उपलब्ध करवाए। बेवजह विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ ना डाला जाए।

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