‘काग़ज़ों में अमीर, ज़मीनी हक़ीक़त में लाचार’बुज़ुर्गों की पेंशन काटकर सरकार ने छीना आख़िरी सहारा
अंबाला शहर :- हरियाणा में सामाजिक सुरक्षा पेंशन अब अधिकार नहीं, सरकारी पोर्टलों की दया बन चुकी है।अम्बाला जिले में जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच पीपीपी (परिवार पहचान पत्र) में की गई कथित “डेटा अपडेटिंग” ने हजारों बुज़ुर्गों को एक झटके में काग़ज़ी अमीर बना दिया और ज़मीनी हक़ीक़त में अपाहिज। हरियाणा कांग्रेस विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री चौधरी निर्मल सिंह ने कहा कि यह प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि गरीबों के खिलाफ़ सुनियोजित डिजिटल हिंसा है।
निर्मल सिंह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जनवरी 2025 में अम्बाला जिले में 2,33,325 परिवार सरकारी योजनाओं से जुड़े थे, लेकिन जुलाई 2025 तक यह संख्या घटकर 2,04,220 रह गई और जनवरी 2026 आते-आते सिर्फ 1,69,023 कार्ड ही सक्रिय बचे। इसी अवधि में 54,302 परिवार सरकारी रिकॉर्ड में “अमीर” घोषित कर दिए गए। परिणामस्वरूप हजारों बुज़ुर्गों की बुढ़ापा पेंशन बंद कर दी गई। उन्होंने कहा कि यह गिरावट सामान्य नहीं है — हर कटती पेंशन के पीछे एक कांपता शरीर, सूनी रसोई और टूटता आत्मसम्मान खड़ा है जब इस पेंशन को हरियाणा में कांग्रेस सरकार ने बढ़ाया था तो इसका नाम मानदेय रखा था जिसको बुजुर्गों का मान सम्मान कहा जाता था एक झटके में इतनी पेंशनों को काटकर सरकार ने पेंशन तो बंद कर ही दी साथ ही उनका मानदेय भी छीन लिया।
उन्होंने बताया कि जिले में एक साल के भीतर 53,213 बीपीएल कार्ड कटे, जिससे 1,64,138 लोग पात्रता से बाहर कर दिए गए। इसके साथ ही 1,089 गुलाबी कार्ड कटने से 11,129 लोग सामाजिक सुरक्षा की सूची से बाहर हो गए। चौधरी निर्मल सिंह ने कहा कि जिन परिवारों की वास्तविक वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम है, उनके पीपीपी रिकॉर्ड में 3 से 15 लाख तक की काल्पनिक आय दर्ज कर दी गई। यही एक झूठी पंक्ति हजारों बुज़ुर्गों की पेंशन छीनने के लिए काफी साबित हुई।
उन्होंने कहा कि ज़मीनी सच्चाई यह है कि बुज़ुर्ग,विधवाएं और दिहाड़ी मजदूर महीनों से एडीसी कार्यालय,सरल केंद्रों और तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। हर जगह एक ही जवाब मिलता है — “डेटा में गलती है, ठीक हो जाएगी”, लेकिन तारीखो पर तारीखे मिलती हैं, समाधान नहीं। कई परिवार छह-छह महीने से सुधार प्रक्रिया में फंसे हैं। जिन घरों में दो-तीन सदस्य हैं, वहीं सबसे ज्यादा मार पड़ी है — पेंशन भी गई और सम्मान भी।
चौधरी निर्मल सिंह ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार ने गरीबी को आंकड़ों से मिटाने की नीति अपना ली है। चौपहिया वाहन, बिजली बिल या किसी संपत्ति की एंट्री दिखाकर बुज़ुर्गों को आर्थिक रूप से सक्षम घोषित कर दिया जाता है और पेंशन काट दी जाती है, जबकि हकीकत यह है कि कई वृद्ध हार्ट के मरीज हैं,पेंशन आते ही उनकी दवाई घर आती है जो पेंशन ना आने से आज दवाई बूटी से भी मौहताज हो गए है, कई विधवाए जो इस पेंशन से अपने घर की दाल रोटी व बच्चों का पालन पोषण कर रही थी वो भी आज लाचार है बिना किसी आय के जी रही हैं। यह कल्याणकारी राज्य नहीं,संवेदनहीन एल्गोरिद्म का राज है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने सामाजिक पेंशन को भी तकनीकी जाल में उलझाकर कमजोर तबकों से उनका आख़िरी सहारा छीन लिया है। चौधरी निर्मल सिंह ने कहा कि जब केंद्र सरकार 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने के दावे करती है, उसी दौर में हरियाणा में बुज़ुर्गों की पेंशन चुपचाप काट दी जाती है। यह नीति नहीं, गरीबों के खिलाफ़ डिजिटल दमन है।
उन्होंने मांग की कि जिन बुज़ुर्गों की पेंशन पीपीपी की गलत एंट्री के कारण बंद हुई है, उनकी पेंशन तत्काल बहाल की जाए, सभी मामलों की स्वतंत्र जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही सुधार अवधि में प्रभावित परिवारों को अंतरिम पेंशन दी जाए, ताकि कोई वृद्ध भूख और अपमान के बीच दम न तोड़े।
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