Breaking

Friday, February 27, 2026

हरियाणा में विश्वविद्यालयों के संविदा व अंशकालिक शिक्षकों को सेवा सुरक्षा देने का है विचार : शिक्षा मंत्री

हरियाणा में विश्वविद्यालयों के संविदा व अंशकालिक शिक्षकों को सेवा सुरक्षा देने का है विचार : शिक्षा मंत्री

-उच्च शिक्षा विभाग ने समिति गठित कर शुरू कर दी है प्रक्रिया"
चंडीगढ़ - हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने बताया कि प्रदेश सरकार राज्य विश्वविद्यालयों में संविदात्मक तौर पर कार्यरत प्राध्यापकों के लिए "सेवा सुरक्षा विधेयक" का प्रारूप तैयार करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में अन्य विभागों से विचार विमर्श किया जा रहा है।

 श्री ढांडा आज हरियाणा विधानसभा के सत्र के दौरान सदन के दो सदस्यों सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि विभाग को हरियाणा यूनिवर्सिटीज कॉन्ट्रैक्चुअल टीचर्स एसोसिएशन (HUCTA) और हरियाणा यूनिवर्सिटीज पार्ट-टाइम टीचर्स एसोसिएशन (HUPTTA) से रिप्रजेंटेशन प्राप्त हुआ था। इन संगठनों ने वर्ष 2024 के सेवा सुरक्षा अध्यादेश की तर्ज पर कानून बनाने की मांग की है। इस प्रस्ताव में शिक्षकों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा प्रदान करने की बात कही गई।

श्री महिपाल ढांडा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति से समिति का गठन का गठन किया गया जिसमें महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलपति को अध्यक्ष, इसी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को , गुरुग्राम विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डीन अकादमिक अफेयर्स को सदस्य के तौर पर नामित किया गया।

उन्होंने बताया कि इस समिति को उक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का दायित्व दिया गया। रिपोर्ट मिलने के बाद मामला दोबारा मुख्यमंत्री के पास निर्णय हेतु भेजा गया। इसके बाद 29 जुलाई 2025 को इस विषय पर मुख्यमंत्री के ओएसडी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में गहन चर्चा हुई। इसके परिणामस्वरूप निर्णय लिया गया कि राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत पूरे शैक्षणिक स्टॉफ का विस्तृत डाटा एक निर्धारित प्रारूप में एकत्र किया जाए।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने 30 जुलाई 2025 को सभी राज्य विश्वविद्यालयों को पत्र जारी किया। इस पत्र के माध्यम से आवश्यक जानकारी मांगी गई। विश्वविद्यालयों से प्राप्त आंकड़ों को संकलित किया गया। इसके बाद यह संपूर्ण रिपोर्ट मुख्यमंत्री को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी गई।

इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से यह सुझाव दिया गया कि समिति की सिफारिशों पर अन्य संबंधित विभागों की भी राय ली जाए जिसके तहत 9 दिसंबर 2025 को विभिन्न विभागों चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग, आयुष विभाग, युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, खेल विभाग से सुझाव और टिप्पणियां मांगी गईं ताकि एक समग्र नीति तैयार की जा सके।
उन्होंने बताया कि हालांकि, निर्धारित समय में सभी विभागों से जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। इसलिए 29 जनवरी 2026 को संबंधित विभागों को रिमाइंडर भेजा गया। वर्तमान में सभी विभागों से आवश्यक सूचनाओं का इंतजार किया जा रहा है ,जैसे ही यह जानकारी प्राप्त होगी, मामले को पुनः मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

No comments:

Post a Comment