*एशियाई खेल 2026 में एलपीयू के खिलाड़ियों ने भारत के कुल स्वर्ण पदकों में 62% का योगदान दिया*
- एलपीयू की नीरू धांडा ने निशानेबाजी में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर रचा इतिहास; ट्रैप शूटिंग में व्यक्तिगत एशियाई खेल स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और समापन समारोह में भारत की ध्वजवाहक बनीं
- एलपीयू के 32 विद्यार्थियों ने जीते 28 पदक, जिनमें 13 स्वर्ण, 11 रजत और 4 कांस्य शामिल; एशियाई खेल 2026 में भारत के अभियान में एलपीयू का महत्वपूर्ण योगदान
*नई दिल्ली : जापान के आइची-नागोया में आयोजित 20वें एशियाई खेलों में भारतीय खेल अभियान में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। एलपीयू के 32 विद्यार्थियों ने नौ खेल विधाओं में कुल 28 पदक जीते, जिनमें 13 स्वर्ण, 11 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल हैं। एलपीयू के खिलाड़ियों ने भारत के कुल स्वर्ण पदकों में 62 प्रतिशत, रजत पदकों में 41 प्रतिशत और कांस्य पदकों में 11 प्रतिशत का योगदान दिया, जिससे भारत के कुल पदक तालिका में लगभग एक-तिहाई योगदान एलपीयू के विद्यार्थियों का रहा।
भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 15 खेल विधाओं में कुल 58 एलपीयू विद्यार्थी देश के एशियाई खेल दल का हिस्सा रहे। इनके पदक जीतने वाले प्रदर्शन निशानेबाजी, तीरंदाजी, हॉकी, कुश्ती, एथलेटिक्स, रोइंग, मुक्केबाजी, क्रिकेट और भारोत्तोलन में देखने को मिले। यह प्रदर्शन सटीकता वाले खेलों और मुकाबला आधारित खेलों से लेकर टीम स्पर्धाओं और एथलेटिक्स तक एलपीयू के विद्यार्थियों की व्यापक खेल भागीदारी को दर्शाता है।
इस अभियान को एलपीयू की छात्रा और भारतीय ट्रैप शूटर नीरू धांडा के शानदार प्रदर्शन से और मजबूती मिली। उन्होंने निशानेबाजी में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। उन्होंने इतिहास रचते हुए ट्रैप शूटिंग में व्यक्तिगत एशियाई खेल स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने का गौरव हासिल किया। आइची-नागोया में उनका यह प्रदर्शन भारत के निशानेबाजी अभियान में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हुआ। इसके बाद उन्हें एशियाई खेल 2026 के समापन समारोह में भारत की ध्वजवाहक नियुक्त किया गया, जिससे महाद्वीपीय खेल आयोजन के समापन पर भारत के प्रतिनिधित्व में एलपीयू की छात्रा को महत्वपूर्ण स्थान मिला।
स्वर्ण पदक अभियान में विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। तनीपर्थी चिकिता और साहिल राजेश जाधव ने कंपाउंड तीरंदाजी में दो-दो स्वर्ण पदक जीते। अमन सहरावत ने पुरुषों की फ्रीस्टाइल 57 किलोग्राम कुश्ती में, सुजीत कलकल ने पुरुषों की फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम कुश्ती में और लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं की 75 किलोग्राम मुक्केबाजी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। किरण पहल भारत की स्वर्ण पदक विजेता महिला 4×400 मीटर रिले टीम का हिस्सा रहीं।
टीम स्पर्धाओं ने भी इस अभियान के कुछ सबसे महत्वपूर्ण क्षण दिए। एलपीयू के सात विद्यार्थी भारत की स्वर्ण पदक विजेता पुरुष हॉकी टीम का हिस्सा रहे, जबकि साक्षी राणा स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं। ईशान किशन भी भारत की स्वर्ण पदक विजेता क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे। एलपीयू के विद्यार्थियों से जुड़ी इन तीन स्वर्ण पदक जीतों ने भारत को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक खेलों के लिए योग्यता हासिल करने में भी मदद की। कंपाउंड मिश्रित टीम तीरंदाजी में स्वर्ण पदक से दो कोटा स्थान हासिल हुए, जबकि पुरुष और महिला हॉकी में जीत ने भारत को सीधे ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कराया।
पदकों की यह उपलब्धि केवल स्वर्ण पदकों तक सीमित नहीं रही। बोम्मदेवरा धीरज, इलावेनिल वलारिवन और हिमांशु ढिल्लों ने दो-दो रजत पदक जीते, जबकि विदारसा के. विनोद और नीरज चौहान ने भी कई पदक हासिल किए। सैखोम मीराबाई चानू ने महिलाओं की 49 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीता, जबकि अंतिम पंघाल और नितेश सिवाच ने कुश्ती में रजत पदक अपने नाम किए। कांस्य पदक नीरज चौहान, पूजा सिंह, धर्मवीर चौधरी, सलमान खान और सतनाम सिंह के नाम रहे।
एलपीयू के संस्थापक कुलाधिपति और राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने कहा, “यह उपलब्धि शिक्षा के व्यापक उद्देश्य को दर्शाती है, जिसका लक्ष्य ऐसे व्यक्तियों का निर्माण करना है जो अपनी प्रतिभा, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के माध्यम से देश को गौरवान्वित कर सकें। एलपीयू में हम ऐसी व्यवस्था की कल्पना करते हैं, जहां युवाओं को न केवल अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, बल्कि देश की प्रगति और वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा में सार्थक योगदान देने के लिए भी प्रेरित किया जाए। हमारे विद्यार्थियों को भारतीय ध्वज को गौरव के साथ आगे ले जाते देखना हमारे लिए अत्यंत गर्व का विषय है और इस सोच का सशक्त प्रतिबिंब है। उनकी यात्रा हमें ऐसे अवसर तैयार करने के लिए प्रेरित करती है, जहां उत्कृष्टता, महत्वाकांक्षा और राष्ट्र के प्रति योगदान साथ-साथ आगे बढ़ें।”
एलपीयू के पदक विजेता प्रदर्शन नौ खेल विधाओं में रहे। निशानेबाजी ने 9 पदकों के साथ सबसे अधिक योगदान दिया, जिसके बाद तीरंदाजी में 6, कुश्ती में 4, एथलेटिक्स में 3, हॉकी में 2 पदक रहे, जबकि मुक्केबाजी, क्रिकेट, रोइंग और भारोत्तोलन में एक-एक पदक मिला।
13 स्वर्ण, 11 रजत और 4 कांस्य पदकों के साथ एशियाई खेल 2026 एलपीयू के विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे उल्लेखनीय खेल प्रदर्शनों में से एक रहा। एलपीयू में शिक्षा और उच्च स्तरीय खेलों का बढ़ता समन्वय युवा भारतीय खिलाड़ियों के लिए उच्चतम स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के नए अवसर तैयार कर रहा है। ओलंपिक में प्रतिनिधित्व से लेकर एशियाई खेलों के पदक मंच तक, एलपीयू के खिलाड़ी लगातार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भारतीय ध्वज को गौरवान्वित कर रहे हैं।
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