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Tuesday, July 21, 2020

5 करोड़ की डकैती की वारदात: जुआरी और झोलाछाप डॉक्टर निकले गोल्ड लोन कंपनी में पांच करोड़ की डकैती

5 करोड़ की डकैती की वारदात:जुआरी और झोलाछाप डॉक्टर निकले गोल्ड लोनकंपनी में पांच करोड़ की डकैती के मास्टरमाइंड आरोपियों से बरामद 52.25 लाख रुपए और गहने


पानीपत। सनौली रोड पर भीम गौड़ा मंदिर के पास स्थित गोल्ड के बदले लोन देने वाली इंडिया इंफोलाइन फाइनेंस लिमिटेड (आईआईएफएल) के ऑफिस में हुई 5 करोड़ रुपए के गहनों की डकैती हुई थी। पुलिस ने खुलाया किया कि 4 साल पहले दाऊद मनमोहन नगर में किराए पर रहकर फैक्ट्री में काम करता था। जुए में कर्जदार होने पर वह परिवार सहित अपने गांव चला गया। इमरान उसका खास दोस्त है। दोनों का झोलाछाप डॉक्टर मित्र था। जो वारदात के समय बिजेंद्र के मकान में क्लीनिक चलाता था। मामा राजीव का भांजे बिजेंद्र के घर आना-जाना था। पानीपत से जाने के बाद दाऊद दोस्त सन्नी व इमरान से मिलने आता था। तब पांचों आरोपियों ने गैैंग बनाकर शॉर्टकट तरीके से रुपए कमाने के लिए डकैती की साजिश रची। करीब दो माह तक रैकी की। इस दौरान लोन लेने के बहाने पहले सन्नी व दाऊद और फिर बिजेंद्र व इमरान करीब 8 बार ऑफिस में भी गए। वहां की हर स्थिति से वे बाकिफ थे। दाऊद यूपी से 3 हथियार खरीदकर लाया। तब 29 जनवरी 2018 की सुबह 10 बजे दाऊद के दोस्त इमरान, राजीव और बिजेंद्र ने बैंक में घुसकर अकॉउंटेंट सोनिया,सीनियर कैशियर भारत भूषण और महिला स्वीपर मुकेश उर्फ गुड्‌डी को पिस्तौल के बल पर बंधक बनाया। लॉकर खुलवाकर वे 16 किलो 665 ग्राम सोने के गहने और 2.45 लाख रुपए कैश लूटकर ले गए थे। तब सोनिया ने किला थाने में केस दर्ज कराया था। तब सोने की कीमत प्रति तोला करीब 30 हजार होने के कारण गहनों की कीमत करीब 5 करोड़ आंकी गई थी।

इसलिए एक सप्ताह तक बाहर नहीं गए


डीएसपी हेडक्वार्टर सतीश कुमार वत्स ने बताया कि आरोपी इतने शातिर थे कि वारदात के बाद वे जिले से बाहर नहीं गए। उन्हें पता था कि पुलिस नाकाबंदी करेगी तो वे पकड़े जाएंगे। इसलिए कमरे पर गए और फिर दिन में जॉब करने भी गए। करीब एक सप्ताह बाद वे घूमने के लिए देहरादून व मसूरी गए थे। इसके बाद अपने-अपने घर चले गए। 5 दिन का पुलिस रिमांड खत्म होने पर आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। जहां से आरोपी दाऊद व सन्नी को जेल भेज दिया गया। वहीं वारदात करने वाले इमरान, राजीव व बिजेंद्र 5 दिन की पुलिस रिमांड पर है। इनसे गहनों की बरामदगी करना बकाया है। वारदात करने वाले 3 आरोपी 10वीं व 12वीं पास हैं। चौथा बीए और पांचवां अनपढ़ है। 

किस आरोपी से क्या बरामद

डीएसपी ने बताया कि आरोपियों ने अपने-अपने हिस्से में आए डकैती के गहने बेच दिए थे। दाऊद के पास बची हुई राशि 12 लाख रुपए, इमरान से 14 लाख व 81.310 ग्राम ज्वेलरी,बिजेंद्र से 15 लाख व गहने बेचकर खरीद गई एक स्विफ्ट कार,बिजेंद्र के मामा राजीव से 10 लाख रुपए और सन्नी से 1 लाख 25 हजार रुपए बरामद हुए।

आरोपी जिले में फिर से वारदात की फिराक में थे


बैंक में फुटेज मिले थे,लेकिन एक आरोपी ने हेलमेट व दो ने चेहरे ढक रखे थे। इसलिए कुछ खास मदद नहीं मिली। बैंक के बाहर पुलिस को सिल्वर कलर की स्पलेंडर बाइक पर भागते 3 बदमाशों की फुटेज मिली। बाइक का नंबर एचआर06 एएम 3356 था। जांच में ये नंबर स्कूटी का निकला। तब पुलिस की जांच ठहर गई। कुछ समय पहले मुखबिर ने एक पुलिसकर्मी को एक नंबर दिया और बताया कि ये वारदात में शामिल हो सकता है। सीआईए-3 ने जांच की तो यह मोबाइल नंबर वारदात के समय मौके पर एक्टिव मिला। इससे साफ हो गया कि इस मोबाइल नंबर के आरोपी व उसके साथियों ने ही वारदात की है। तब से पुलिस उनके पीछे लगी थी। आरोपी सन्नी अब कृष्णा गार्डन के पास चौधरी क्लीनिक चला रहा था। जहां 14 जुलाई को पांचों आरोपी एकजुट होकर फिर से किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। तब मुखबिर की सूचना पर सीआईए-3 प्रभारी इंस्पेक्टर अनिल छिल्लर, एसआई हरिप्रकाश, एएसआई कृष्ण, मुख्य सिपाही डिम्पी, रविन्द्र, बिजेन्द्र, जितेन्द्र, बलिन्द्र, सिपाही सहदेव, प्रवेश, संजय ने आरोपियों को दबोच लिया।

547 के गहने रखे थे, 518 के ले गए थे आरोपी


आईआईएफएल के ऑफिस में 547 लोगों ने अपने गहने गिरवी रखकर करीब 2 करोड़ 82 लाख रुपए का लोन ले रखा था। पिस्तौल के बल पर तिजोरी खुलवाकर बदमाश 518 लोगों के गहने बैग में भरकर ले गए थे। बैग में जगह नहीं होने के कारण 29 लोगों के गहने तिजोरी में छोड़ गए थे।

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