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Thursday, September 24, 2020

किसान अध्यादेशों को लेकर नेताओं में बढ़ी नाराजगी:इनेलो पृष्ठ भूमि के भाजपा नेताओं के बगावती सुर, भाजपा के 5 और कांग्रेस के पूर्व विधायक में बैठक

किसान अध्यादेशों को लेकर नेताओं में बढ़ी नाराजगी:इनेलो पृष्ठ भूमि के भाजपा नेताओं के बगावती सुर, भाजपा के 5 और कांग्रेस के पूर्व विधायक में बैठक

चंडीगढ़ : हरियाणा की सियासत में अब नया मोड़ आने वाला है। भाजपा के 5 और कांग्रेस का एक पूर्व विधायक मिलकर अलग ही रणनीति बना रहे हैं। उन्होंने बगावत की तैयारी कर ली है। इन पूर्व विधायकों में ज्यादा इनेलो की पृष्ठभूमि से है। सभी अंदरखाने योजना बनाने में लगे हैं। बुधवार को भाजपा समर्थित पांच पूर्व विधायकों समेत छह नेताओं ने मंथन किया है। जिसमें कहा गया है कि सभी पार्टियों में उपेक्षित पूर्व विधायकों को जोड़ा जाएगा और जल्द ही हरियाणा के मध्य में दूसरी मीटिंग बुलाई जाएगी।
बुधवार को गुपचुप की गई मीटिंग में पिछले साल ही इनेलो छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक परमिंद्र सिंह ढुल, रामपाल माजरा, बलवान सिंह दौलतपुरिया के अलावा बूटा सिंह शामिल हैं। पिछली सरकार में संसदीय सचिव रहे श्याम सिंह राणा और कांग्रेसी नेता एवं पूर्व विधायक भाग सिंह छातर भी मीटिंग में शामिल रहे। दावा किया गया है कि दूसरी पार्टियों के दो दर्जन नेता इनके संपर्क में हैं, जिन्हें वे साथ जोड़कर एक मंच पर लाएंगे। इधर, बता दें कि जजपा में भी रामकुमार गौत्तम, देवेंद्र बबली भी खुलकर पार्टी की खिलाफत कर चुके हैं।

उपेक्षित पूर्व विधायकों को जोड़ा जाएगा : माजरा

पूर्व संसदीय सचिव रामपाल माजरा का कहना है कि सभी पार्टियों में जितनी भी राजनीतिक तौर पर उपेक्षित पूर्व विधायक या नेता हैं, उन्हें जोड़ा जाएगा। सभी को जल्द ही एक मंच पर लाया जाएगा। हम जनता के मुद्दे उठाएंगे। आज प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ी है। कारखाने नहीं लग रहें हैं। अध्यादेशों पर किसानों और विपक्ष से बातचीत होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। प्रदेश में आत्महत्या के मामले इसलिए बढ़ते जा रहें हैं। माजरा ने कहा कि अध्योदशों में कहीं भी एमएसपी का जिक्र नहीं है।

किसान संगठनों से होनी चाहिए थी बातचीत: ढुल

पूर्व विधायक परमिंद्र सिंह ढुल ने कहा कि हमने मिलकर सभी समस्याओं पर विचार किया है। सभी नेताओं को मुख्यधारा में लाया जाएगा। कृषि बिलों पर पता नहीं कि हम भ्रम में हैं या भ्रमित किया जा रहा है। हमारा प्रयास होगा कि हमारे जैसे लोगों को जोड़ा जाए। सरकार को किसान संगठनों से बातचीत की जानी चाहिए थी। अभी भी उसमें सुधार किया जा सकता है। अडियल रवैया नहीं रखना चाहिए।

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