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Thursday, October 15, 2020

रामलीला व रावण दहन पर कोरोना ग्रहण:270 साल से चली आ रही दिन की रामलीला का मंचन इस बार नहीं हाेगा

रामलीला व रावण दहन पर कोरोना ग्रहण:270 साल से चली आ रही दिन की रामलीला का मंचन इस बार नहीं हाेगा

झज्जर : 270 वर्षों से चली आ रही प्राचीन रामलीला मंचन की परंपरा इस बार कोविड-19 की भेंट चढ़ गई है। आसपास के कई शहरों में झज्जर की दिन की रामलीला प्रसिद्ध है। नवरात्र की शुरुआत के साथ ही इस रामलीला का सजीव मंचन होता है। अब इसका लाभ झज्जर के लोगों को नहीं मिलेगा। रामलीला कमेटी ने कोविड-19 के चलते इस बार रामलीला मंचन नहीं करने का फैसला लिया है।
रावण दहन और दशहरा मेला भी नहीं होगा। झज्जर-बहादुरगढ़ रोड स्थित प्राचीन रामलीला मैदान में दिन की रामलीला का मंचन होता है। यहां हर साल मथुरा वृंदावन से कलाकार अभिनय की छाप छोड़ते थे, लेकिन इस बार यह रामलीला नहीं होगी। प्राचीन रामलीला कमेटी के संरक्षक आजाद दीवान और प्रधान सुरेंद्र हरित ने बताया कि झज्जर में 270 वर्ष से चली आ रही परंपरा के अनुसार लोगों की भावनाओं को देखते हुए रामलीला के पहले दिन निकाले जाने वाली श्रीरामजन्म की झांकी इस बार 17 अक्टूबर और राम जब रावण पर विजय प्राप्त करके अयोध्या लौटते हैं।
तब आखिरी दिन निकाले जाने वाली झांकी का लाभ 26 अक्टूबर को शहर के लोगों को मिलेगा। झांकी कोविड-19 के नियम और शर्तों के जरिए निकाले जाने की योजना है। इसमें एक बैंड और एक रथ शामिल किया जाएगा। कमेटी के प्रधान सुरेंद्र हरित ने बताया कि चूंकि आखिरी झांकी के दिन पुराने शहर से जुड़े लोग और बाजार के लोग राम परिवार की आरती उतारते हैं।

*किसी भी आयोजन में 200 से ज्यादा लोगों की संख्या न हाे*

रामलीला मंचन की परंपरा और दशहरा मेला को इस बार किस नियम के जरिए निभाया जाए। इसकी चर्चा श्रीराम लीला प्राचीन कमेटी से जुड़े आजाद दीवान और सुरेंद्र हरित ने बुधवार को डीसी जितेंद्र कुमार के पीए से चर्चा कर फाइनल किया। इसके तहत किसी भी आयोजन में 200 से ज्यादा लोगों की संख्या नहीं होनी चाहिए। नगर परिषद झज्जर ने इस मैदान की सजावट के लिए लाखों रुपए का खर्चा किया है। इसके पहले चरण में यहां मिट्टी भराव की गई थी, जबकि इस साल पूरे मैदान पर टाइलें बिछाई गई थी। नए सिरे से मंच बनाए गए थे। अब हाई मास्क लाइट लगाई जा रही हैं।

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