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Tuesday, May 25, 2021

जींद के निजी अस्पताल ने मचाई लूट, कोरोना मरीजों को बना रहा शिकार

जींद के निजी अस्पताल ने मचाई लूट, कोरोना मरीजों को बना रहा शिकार


जींद :  एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। बताना लाजमी है कि कोरोना काल में लोग मौत और जिंदगी की जंग लड़ रहे है तो वहीं दूसरी तरफ हरियाणा के जींद जिले से अजीबो -गरीब मामला सामने आया है। बता दें कि शहर के रोहतक रोड स्थित बालाजी अस्पताल पर कोरोना मरीजों से ज्यादा रुपये वसूलने के आरोप सही पाए गए हैं। मामले की जांच कर रही कमेटी ने डीसी को सौंपी अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कहा है कि बालाजी अस्पताल में कोरोना मरीजों से जमकर लूट हुई है। इन मरीजों से सरकार द्वारा निर्धारित रेट से ज्यादा रुपये वसूले गए।
बिजेंद्र हुड्डा की अगुआई में टीम ने शुक्रवार को बालाजी अस्पताल पर छापा मारा था। उस दौरान अस्पताल के रिकॉर्ड की फोटोकॉपी कराकर अपने कब्जे में ली थी। जांच के दौरान ने जब अस्पताल से ऑरिजनल रिकॉर्ड मंगाया गया तो उसमें काफी छेड़छाड़ मिली है। जहां 40 हजार थे, उनके चार हजार रुपये बना दिए हैं। सभी रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की गई है, जबकि प्रशासन के पास उनकी फोटो प्रतियां हैं। जांच कमेटी ने रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ मिलने पर अपनी जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब इलाज करवा चुके कोरोना मरीजों से ओवर चार्जिंग के मामले में जांच में शामिल किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार डीसी डा. आदित्य दहिया को सौंपी जांच रिपोर्ट में कमेटी ने यह भी कहा है कि अस्पताल में संक्रमण फैलने का खतरा है। अस्पताल के अंदर काम करने वाला स्टाफ पीपीई किट नहीं पहनता। आइसीयू के नाम पर पूरी तरह खानापूर्ति है। अस्पताल के अंदर वेंटिलेशन न होने और अन्य खामियों के चलते मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों में भी संक्रमण बढ़ सकता है। सूत्र बताते हैं कि अस्पताल में एक मरीज कई दिन भर्ती रहा। हालत बिगड़ने पर उसे दूसरी जगह रेफर कर दिया। जहां उसकी मौत हो गई। बाद में उस मरीज का बेटा, बहू व पोता भी कोरोना से संक्रमित हो गए।
मरीजों से ज्यादा रुपये वसूलने की जांच का सामना कर रहे बालाजी अस्पताल के कारनामों की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। जांच टीम के संज्ञान में यह मामला भी आया है कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मौत होने के बाद या मौत होने से कुछ समय पहले रेफर के नाम पर मरीज स्वजनों के हवाले कर दिया। ऐसे में अब बालाजी अस्पताल को मिसिंग हुए कोरोना पॉजिटिव मरीजों की जांच का सामना भी करना पड़ सकता है। अब जांच टीम अप्रैल व मई में अस्पताल में हुई मौत व रेफर हुए मरीजों की पड़ताल करेगी।
ऐसे कोरोना पॉजिटिव मरीज जिन्हें अस्पताल से रेफर कर दिया, लेकिन वे उस अस्पताल में पहुंचे या नहीं, जहां रेफर किया था। रेफर किए गए मरीजों की सेहत अब कैसी है। रेफर किए जिन मरीजों की मौत हुई, उनका अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के तहत हुआ या स्वजनों ने साधारण मौत की तरह किया। इसलिए अब जांच टीम अस्पताल में अप्रैल-मई हुई सारी मौतों का रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेगी। जांच टीम के संज्ञान में यह भी आया है कि दूसरी लहर के शुरुआती दौर में अस्पताल में काफी मरीजों की मौत हुई, बाद में मौत का सिलसिला थम गया।
डीसी डा. आदित्य दहिया ने कहा कि उन्हें प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मिल गई है। इसे सरकार के पास भेजा जाएगा। अस्पताल को बंद करने या अन्य सख्त एक्शन सरकार की तरफ से ही लिया जाएगा। अभी टीम पूरे रिकॉर्ड की जांच कर रही है। वहीं, कालाबाजारी रोकने के लिए नियुक्त किए गए नोडल अधिकारी एवं रोडवेज जीएम बिजेंद्र हुड्डा ने बताया कि बालाजी अस्पताल द्वारा ज्यादा रुपये वसूलने के तथ्यों की गहनता से जांच की जा रही है। मिसिंग हुए मरीजों का डाटा भी लिया जा रहा है। उन्होंने बालाजी अस्पताल में इलाज करवा चुके मरीजों से भी अपील की है कि वे ओवर चार्जिंग समेत अन्य तथ्यों की जांच में सहयोग करें। किसी मरीज से ओवर चार्जिंग हुई तो वह नियुक्त कमेटी के सामने अपनी बात रख सकता है।

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