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Saturday, August 14, 2021

एचआईवी पाॅजिटिव महिला को सताने का मामला

एचआईवी पाॅजिटिव महिला को सताने का मामला

पानीपत : 7 साल पहले विवाह हुआ, शादी के डेढ़ साल बाद एचआईवी पाॅजिटिव मिलीं, अब ससुराल में रहने की मांग
काेर्ट में 25 को होगी सुनवाई

मैं 27 साल की अन्नु (बदला हुआ नाम) हूं। जब मेरी शादी गाेहाना राेड स्थित एक काॅलाेनी में रहने वाले रमेश (बदला हुआ नाम) से हुई थी, तब मेरी उम्र 20 साल की थी। सब कुछ ठीक चल रहा था। फिर मुझे पेट दर्द (पीरियड्स) हाेने लगा। तबीयत ज्यादा खराब रहती थी। एक दिन ननद ने कहा कि चलाे दवाई दिलाकर लाते हैं। फिर मुझे पेट दर्द की नहीं गर्भवती हाेने की दवा दिला लाए। कुछ दिनाें बाद मैं गर्भवती हाे गई। फिर सिविल अस्पताल में जांच कराई ताे एचआईवी पाॅजिटिव मिली।

पति काे बताया कि अभी छाेड़ना हाे ताे छाेड़ दाे, बाद में मत छाेड़ना। पति ने तब कुछ नहीं कहा और न छाेड़ा। फिर परिवार में कभी बच्चाें से नहीं मिलने दिया, ताे कभी खाना बनाने के लिए रसाेई में नहीं घुसने दिया जाता। कभी कहते थे इस सामान काे न छू। मुझसे भेदभाव किया जाने लगा जैसे मुझे काेई छुआछूत की बीमारी हाे। फिर पति राेजाना मारपीट करने लगा। बेल्ट से भी मारते और गाली-गलाैज करते थे।

इसी तनाव में मेरे बच्चे की भी पेट में धड़कन नहीं बनी और वह मिस हाे गया। पति कहते थे कि ये बीमारी तू लाई है। मैंने कहा था कि अगर मुझे पहले से ये बीमारी हाेती ताेे पति काे भी ताे हाेती, लेकिन पति सहित सब जांच में निगेटिव आए थे। मैंने कहा था कि मुझे भी आज ही एचआईवी राेग के बारे में पता लगा है। सब परिवार वाले मुझ पर ही गुस्सा निकालते थे। जब सहने की शक्ति हद से बाहर हाे गई ताे मैं मायके आ गई। जैसा कि 27 साल की एचआईवी पीड़ित महिला ने बताया....

पीड़िता नहीं देना चाहती तलाक 
महिला ने कहा कि उसने 12वीं, जेबीटी और बीए की पढ़ाई भी पति के घर रहकर की है। पढ़ी लिखी हाेने के बावजूद मेरे साथ साैतेला व्यवहार हाे रहा है। पति ढाई लाख रुपए देकर कह रहे हैं कि मुझे छाेड़ ताे और तलाक दे दाे। महिला बाेली उसे पैसे की नहीं छत की जरूरत है। वह तलाक नहीं देना चाहती। उसे रहने के लिए सिर्फ घर और खर्चा चाहिए, ताकि उसका आगे का जीवन व्यतीत हाे सके। वह दूसरी शादी भी नहीं कर सकती। मायके कब तक रहेगी।

*जहां काम करती हैं, वह सब दे रहे साथ*
महिला ने बताया कि जब ये मायके आई वह एक एनजीओ के साथ मिलकर नाैकरी कर रही है। उनकाे मेरी बीमारी के बारे में पता है, लेकिन वाे ऐसा व्यवहार नहीं करते, जैसा मेरे अपनाें ने मेरे साथ किया है। मार्च-अप्रैल में बहुत बीमार हुई ताे उन्हाेंने मुझे छाेड़ा नहीं बल्कि मेरी सुविधा काे देखते हुए ऑनलाइन काम दे दिया।

*पीड़ित महिला की शिकायत मिली है*
आज के समाज में भी एचआईवी राेग काे छुआछूत समझा जा रहा है। इस महिला काे सिर्फ इसलिए छाेड़ दिया कि वह एचआईवी पीड़ित है। पीड़ित महिला घरेलू हिंसा का शिकार हुई है। साथ-साथ समाज में भी उसे बहुत कुछ सुनना पड़ता है। पीड़ित महिला की शिकायत मिली है, काेर्ट से उसे न्याय जरूर मिलेगा। -रजनी गुप्ता, प्राेटेक्शन अधिकारी, पानीपत।

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