अखिल भारतीय साहित्य परिषद की जींद इकाई ने वाल्मीकि जयंती पर किया आयोजन, भजन संध्या और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में बच्चों ने लिया भाग
जींद : अखिल भारतीय साहित्य परिषद की जींद इकाई की ओर से वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में गीता कॉलोनी में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ इकाई अध्यक्षा मंजु मानव और साहित्यकार केवल कृष्ण पाठक ने दीप प्रज्वलित करके किया। इस अवसर पर बच्चों के लिए भजन संध्या और महर्षि वाल्मीकि के जीवन से संबंधित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यक्रम का संचालन इकाई महामंत्री डॉ. क्यूटी ने किया। उन्होंने उपस्थित अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित भी किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्यकार केवल कृष्ण पाठक ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत के आदिकवि थे। उन्होंने रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना करके भारतीय साहित्य और संस्कृति को अमूल्य योगदान दिया। महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में माता सीता ने लव और कुश को जन्म दिया था। उनका जीवन और साहित्य आज भी समाज को आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
इकाई अध्यक्षा मंजु मानव ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में 24 हजार श्लोक हैं। रामायण की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और घर-घर में इसका पाठ किया जाता है। उन्होंने कहा कि हमें महर्षि वाल्मीकि के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेकर स्वयं को एक अच्छा इंसान और मार्गदर्शक साबित करना चाहिए। उनके आदर्श समाज को सही दिशा दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भजन प्रतियोगिता में हृदयांश प्रथम, ऋषिका द्वितीय
कार्यक्रम के दौरान आयोजित भजन प्रतियोगिता में हृदयांश ने प्रथम, ऋषिका ने द्वितीय और समायरा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में अरना, सीरत और आरोही ने स्थान प्राप्त किए। विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जबकि प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले सभी बच्चों को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर अमृत वर्षा, अनिता, नीलिमा, कीर्ति, पायल, नेहा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को महर्षि वाल्मीकि के जीवन, साहित्य और आदर्शों से परिचित कराने का प्रयास किया गया।
No comments:
Post a Comment